Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

मानसून में पेट दर्द के पीछे हो सकते हैं ये 5 कारण, डॉक्‍टर से जानें बचाव के उपाय

मानसून आते ही पेट दर्द और अन्‍य पाचन समस्‍याएं जैसे उल्‍टी, दस्‍त का खतरा बढ़ जाता है। अक्‍सर दूष‍ित पानी और खाने के कारण पेट दर्द की समस्‍या होती है। डॉक्‍टर से जानें अन्‍य कारण और बचाव के उपाय।

मानसून आने से गर्मी से राहत म‍िलती है और दूसरी ओर पाचन समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है। कई लोगों को मानसून में पेट दर्द की श‍िकायत होती है। मानसून में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इस वजह से आसपास वायरस, बैक्‍टीर‍िया और फंगस का प्रकोप भी दोगुना हो जाता है। ज‍िन जगहों पर फूड स्‍टोरोज या खाना बनाते समय हाइजीन का ख्‍याल नहीं रखा जाता, वहां खाना जल्‍दी खराब होता है और पेट में दर्द की समस्‍या हो सकती है। ताजा और अच्‍छी गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों को भी अगर ठीक से स्‍टोर न क‍िया जाए, तो यह दूष‍ित होकर पाचन पर अटैक कर सकते हैं। डॉक्‍टर से जानें मानसून में पेट दर्द और अन्‍य पाचन समस्‍याओं से कैसे बचें? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

मानसून में पेट दर्द की समस्‍या क्‍यों होती है?

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Gastroenterologist Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि मानसून में केवल पेट दर्द ही नहीं बल्‍क‍ि कई पाचन समस्‍याएं जैसे दस्‍त, उल्‍टी, पेट में भारीपन जैसी श‍िकायतें बढ़ जाती हैं।

  1. मानसून में पीने का पानी या तरल चीजों का रख-रखाव सही नहीं होगा, तो बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी पानी को दूष‍ित कर सकते हैं ज‍िससे पेट दर्द, दस्‍त, उल्‍टी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  2. मानसून में बासी खाने के कारण पेट दर्द या पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं। जो खाना लंबे समय तक रखा रहता है उसमें नमी जमा हो जाती है और उसे खाने के बाद पेट में दर्द, ऐंठन या दस्‍त जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
  3. मानसून में ई.कोली जैसी बैक्‍टीर‍िया भोजन या पानी में पहुंचकर पेट दर्द और डायर‍िया का कारण बन सकते हैं।
  4. मानसून में पकौड़े, समोसे और अन्य ऑयली फूड्स का ज्यादा सेवन करने से अपच, गैस, एसिडिटी और पेट दर्द हो सकता है।
  5. मौसम में बदलाव, अनियमित खान-पान, ज्यादा तला-भुना भोजन और कम शारीरिक गतिविधि के कारण भी कुछ लोगों को गैस और अपच हो सकती है ज‍िसके कारण पेट दर्द की श‍िकायत हो सकती है।

साल 2020 में Environmental Health Perspectives में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, पानी में मौजूद पैथोजन (Pathogen) फैल सकते हैं। इससे कुछ स्थितियों में डायरिया और पेट से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

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मानसून में क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों को प्राथ‍म‍िकता दें

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि मानसून में पाचन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों को प्राथम‍िकता देनी चाह‍िए। जैसे मूंग दाल ख‍िचड़ी, दल‍िया, दाल-चावल, लौकी, तोरई, घर का बना सूप फायदेमंद होता है। सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने भी कई बार अपने वीड‍ियोज में इस बात पर जोर द‍िया है क‍ि हर मौसम में क्षेत्रीय भोजन पाचन और सेहत के ल‍िए अच्‍छा होता है और उसे प्राथम‍िकता देनी चाह‍िए। लोग व‍िदेश या दूर म‍िलने वाली चीजों के प्रत‍ि ज्‍यादा आकर्ष‍ित होते हैं जबक‍ि अपने आसपास की चीजें ही हमें बदलते मौसम में बीमार‍ियों से सुरक्ष‍ा दे सकती हैं।

साल 2024 में International Journal Of Innovative Science And Research Technology (IJISRT) में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, मानसून में पारंपर‍िक फूड्स सेहत के ल‍िए ज्‍यादा सेहतमंद होते हैं और उन्‍हें बार‍िश के द‍िनों में ज्‍यादा खाना चाह‍िए। जैसे हल्दी, अदरक, मक्का, मूंगफली वगैरह। ये सेहत और पाचन दोनों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

मानसून में स्‍ट्रीट फूड्स से सावधान रहें

मानसून में चटपटा खाने का मन करता है, लेक‍िन स्‍ट्रीट फूड्स खाते समय सावधानी बरतना जरूरी है। ढेलों पर अक्‍सर दूष‍ित पानी के इस्‍तेमाल से लोग बीमार हो जाते हैं। इससे पेट दर्द, डायर‍िया, पेट में ऐंठन जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। मानसून में कटे हुए फल, कच्‍ची सब्‍ज‍ियां खाने से बचना चाह‍िए। हमेशा घर के बने ताजे पके हुए भोजन को ही प्राथम‍िकता दें।

मानसून में डाइजेशन को सपोर्ट करने वाले फूड्स चुनें

मानसून में ऐसे फूड्स को डाइट में शाम‍िल करें जो डाइजेशन को सपोर्ट करें। जैसे हल्‍दी का दूध। हल्‍दी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और यह गट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद है। मानसून में केला और सेब का सेवन कर सकते हैं। ये आसानी से पच जाते हैं और इनमें फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। जीरा और सौंफ जैसे मसाले पाचन को मजबूत बनाने में मदद करेंगे और पेट दर्द से बचने में मदद करते हैं। सौंफ के सेवन से पेट की गैस दूर होती है और खाना आसानी से पच जाता है और पेट में भारीपन की समस्‍या भी दूर होती है।

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अधपका मीट या अंडा खाने से बचें

मानसून में अक्‍सर लोग अधपका मीट, च‍िकन, मछली या अंडा खा लेते हैं। अगर इन्‍हें सही तापमान पर अच्‍छे से न पकाया जाए, तो यह फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन का कारण बन सकते हैं और फूड पॉइजन‍िंग का खतरा भी बढ़ सकता है। मानसून में नमी और तापमान में बदलाव के कारण भोजन को अच्‍छी तरह से पकाना जरूरी है। साथ ही मीट बनाने के ल‍िए इस्‍तेमाल क‍िए गए चाकू और कट‍िंग बोर्ड को भी साफ रखें।

न‍िष्‍कर्ष:

मानसून में कई लोगों को पेट दर्द या पाचन समस्‍याएं होने लगती हैं। मानसून में बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी, खाने और पीने के पानी को दूष‍ित कर सकते हैं, मानसून में बासी खाने से पेट दर्द हो सकता है, मानसून में ई.कोली का प्रकोप बढ़ जाता है ऐसे में खाने को ठीक से स्‍टोर करना जरूरी है। मानसून में ज्‍यादा तला-भुना खाने से पेट दर्द, अपच, गैस, एसिडिटी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। मानसून में पेट दर्द या पाचन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए क्षेत्रीय खाद्य पदार्थों को प्राथ‍म‍िकता दें, स्‍ट्रीट फूड्स से सावधान रहें, पाचन के ल‍िए अच्‍छे माने जाने वाले फूड्स जैसे केला, सेब, हल्‍दी दूध, जीरा, सौंफ वगैरह का सेवन करें, अधपका मीट या अंडा खाने से बचें।

FAQ

  • मानसून में ज्‍यादा चाय या कॉफी क्‍यों नहीं पीना चाह‍िए?

    मानसून में हल्‍की ठंडक से कंफर्ट ढूंढने के ल‍िए लोग चाय या कॉफी का अध‍िक सेवन करने लगते हैं। इससे कुछ लोगों में एसिडिटी, पेट में जलन या गैस की समस्या बढ़ सकती है। इसल‍िए सीमि‍त सेवन ही सुरक्ष‍ित है।
  • मानसून में पाचन समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

    अगर पेट में दर्द लगातार या तेज होने लगे, बार-बार उल्‍टी हो, तेज बुखार हो, ड‍िहाइड्रेशन हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 12, 2026 17:43 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

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