हममें से कोई नहीं चाहता है कि त्वचा ढीली और बेजान नजर आए। हम सबको दमकती हुई निखरी त्वचा ही पसंद आती है। हालांकि, मौजूदा भाग-दौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग अपनी त्वचा पर विशेष ध्यान नहीं दे पाते हैं। नतीजतन, स्किन डल नजर आने लगती है। इसमें डार्क स्पॉट, हाइपरपिग्मेंटेशन जैसी समस्याएं भी दिखती हैं। अक्सर लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं। क्या आप जानते हैं कि त्वचा पर हो रहे छोटे-छोटे बदलाव बुढ़ापे के संकेत हो सकते हैं? जी, हां! यह सच है। यहां राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा आपको बता रही हैं कि स्किन पर नजर आने वाले बुढ़ापे के संकेतों के बारे में।
कम उम्र में स्किन एजिंग के लक्षण
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फाइन लाइन्स
आमतौर पर कोलेजन नाम के प्रोटीन के स्तर में कमी आने के कारण चेहरे पर फाइन लाइन्स नजर आने लगती हैं। हालांकि, सूरज की किरणों से निकलने वाले यूवी रेज के संपर्क में लंबे समय तक रहने के कारण भी कोलेजन उत्पादन कम हो जाता है, जिससे त्वचा में फाइन लाइन्स नजर आने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बुढ़ापे के शुरुआती संकेतों में से एक है।
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बेजान त्वचा
जब आप अपनी त्वचा की देखभाल सही तरह से नहीं करते हैं, तो इसकी वजह से स्किन बेजान और फीकी नजर आने लगती है। दरअसल, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, त्वचा की खुद को नया बनाए रखने और नमी बनाए रखने की क्षमता कम होने लगती है। इसके अलावा, डेड सेल्स की साफ होने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है, जिससे त्वचा की नमी अपने आप कम होने लगती है और कोलेजन का बनना भी कम हो जाता है। ऐसे में त्वचा प्राकृतिक रूप से बेजान हो जाती है।
स्किन टेक्सचर में बदलाव
डॉ. करुणा मल्होत्रा स्पष्ट कहती हैं, ‘स्किन टेक्सचर में नजर आ रहे बदलाव भी बुढ़ापे के लक्षण के तौर पर समझे जा सकते हैं। हालांकि, ऐसा कई बार यूवी रेज के संपर्क में अधिक समय तक रहने की वजह से हो सकता है।’ National Institutes of Health (NIH) के अनुसार, यूवी रेज स्किन सेल्स को डैमेज करती हैं, जिससे बढ़ती उम्र की प्रक्रिया की गति तेज हो जाती है। इससे स्किन टेक्सचर में भी बदलाव होने लगता है। ऐसे में कम उम्र के लोगों में भी स्किन एजिंग के लक्षण नजर आते हैं।
डार्क स्पॉट्स और हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या
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साल 2022 में Cells में प्रकाशित जर्नल आर्टिकल के अनुसार, बढ़ती उम्र में हमारी त्वचा का रंग फीका पड़ जाता है, काले धब्बे और हाइपरपिग्मेंटेशन की समस्या होने लगती है। असल में, उम्र बढ़ने के साथ स्किन सेल्स बूढ़ी हो जाती हैं और काम करना बंद कर देती हैं। इन्हें सेनेसेंट सेल्स कहा जाता है। यही सेल्स त्वचा के रंग बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस रिसर्च के अनुसार, फाइब्रोब्लास्ट और मेलानोसाइट्स जैसी कोशिकाएं मुख्य रूप से जिम्मेदार होती हैं। आपको बता दें कि मेलानोसाइट्स सेल्स खुद खराब नहीं होतीं, बल्कि आसपास मौजूद हेल्दी सेल्स को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
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रूखी त्वचा
क्या आप जानते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ रूखी त्वचा की समस्या होना आम बात होती है? जी, हां! असल में जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, त्वचा अपनी नमी खोती रहती है। ऐसे में अगर स्किन को प्रॉपर तरीके से हाइड्रेट न किया जाए, तो इसकी वजह से स्किन ड्राई होने लगती है। साल 2011 में Clinics in Dermatology में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ त्वचा में नमी और प्राकृतिक तेल या फैट (लिपिड) की कमी हो जाती है। ऐसे में स्किन में ड्राईनेस हो जाती है। हालांकि, इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सभी बुजुर्गों में ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन इस समस्या को बढ़ती उम्र के एक लक्षण के रूप में देखा जा सकता है।
रोमछिद्रों का बड़ा होना
जरा आप नोटिस करें कि क्या आपके रोमछिद्र यानी स्किन पोर्स नजर आने लगे हैं? यह भी स्किन एजिंग का एक लक्षण है। सवाल है ऐसा होता क्यों है? इस संबंध में डाॅ. करुणा बताती हैं, ‘बढ़ती उम्र के लक्षणों में स्किन पोर्स का बड़ा होना शामिल है। असल में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिक उम्र में कोलेजन प्रोडक्शन कम होने लगता है और इलास्टिन में भी कमी आती है, जो कि त्वचा को टाइट और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे स्किन का सपोर्टिव सिस्टम कमजोर हो जाता है, स्किन पोर्स भी बड़े नजर आने लगते हैं।
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आंखों के नीचे गड्ढे

वैसे तो अच्छी नींद न लेना, खराब जीवनशैली अपनाना और जंक या प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक करना भी आंखों के नीचे गड्ढे होने के कारण हो सकते हैं। हालांकि, इस स्थिति को सीधे-सीधे हम स्किन एजिंग से भी जोड़कर देख सकते हैं। साल 2025 में Scientific Reports में प्रकाशित एक शोध पत्र से यह पता चलता है कि बढ़ती उम्र में आंखें अंदर की ओर धंस जाती हैं। असल में उम्र बढ़ने के साथ हमारी ऊपरी पलक के ठीक नीचे ऑर्बिक्युलरिस ओकुली नाम की एक खास मांसपेशी मौजूद होती है, जो कि पतली होने लगती है और इसमें ताकत देने वाले फाइबर्स कम होने लगते हैं। यही कारण है कि आंखें अंदर की ओर धंसी हुई नजर आती हैं। बहरहाल, कम उम्र में खराब जीवनशैली के कारण यह समस्या हो सकती है।
स्किन एजिंग प्रक्रिया को धीमा कैसे करें?
- त्वचा का सूरज की किरणों से बचाव करें।
- जब भी घर से बाहर निकलें, एसपीएफ 30 लगाकर ही निकलें।
- स्मोकिंग और शराब का सेवन न करें।
- एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त डाइट फॉलो करें।
- ऑलिव ऑयल, एवोकाडो जैसी चीजों के जरिए हेल्दी फैट्स लें।
- प्राकृतिक चमक बनाए रखने के लिए एलोवेरा का उपयोग करें।
- अच्छी त्वचा के लिए 7-9 घंटे की गहरी नींद जरूर लें।
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निष्कर्ष
बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोक नहीं जा सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि, कम उम्र में ही बुढ़ापे के लक्षण त्वचा में नजर आने लगे, तो समझ जाएं कि आप खराब जीवनशैली अपना रहे हैं और खानपान का भी पूरा ध्यान नहीं रख रहे हैं। इस तरह की समस्या से बचने के लिए उपरोक्त दिए गए उपायों को अपनाएं। हां, अगर कम उम्र में स्किन से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या हो रही है और उसे घर में मैनेज नहीं किया जा सकता है, तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से संपर्क करें।
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FAQ
क्या चेहरे को बार-बार धोने से भी स्किन एजिंग प्रक्रिया तेज हो सकती है?
हां, दिन में दो से अधिक बार फेस वॉश करने से त्वचा का नेचुरल ऑयल कम हो जाता है, जिससे स्किन ड्राई हो जाती है और कम उम्र में ही झुर्रियां दिखने लगती हैं।क्या कम उम्र में बार-बार फेशियल या केमिकल पील्स कराने से त्वचा बूढ़ी हो सकती है?
हां, 20-25 साल की उम्र से ही बार-बार केमिकल ट्रीटमेंट करवाने से स्किन का नेचुरल बैरियर कमजोर हो जाता है, जिससे प्री-मैच्योर एजिंग की समस्या हो सकती है।
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Jul 14, 2026 11:07 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra