सोरायसिस स्किन से जुड़ी ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें मरीज का इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है और स्किन के नए टिश्यू बनने की प्रक्रिया कई गुना तेज हो जाती है। ऐसे में स्किन पर लाल, मोटे, पपड़ीदार और खुजली वाले चकत्ते बनने लगते हैं। इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवा के साथ-साथ ट्रिगर्स पर कंट्रोल करने की हिदायत भी देते हैं। कई बार मरीजों को पता ही नहीं चलता कि रोजमर्रा में होने वाली चीजें अचानक बीमारी को बढ़ा देती हैं। इसलिए सोरायसिस के ट्रिगर्स के बारे में जानने के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की।
सोरायसिस बढ़ाने वाले ट्रिगर्स
Cell Communication and Signaling में प्रकाशित एक रिव्यू के मुताबिक, सोरायसिस सिर्फ जेनेटिक कारणों से ही नहीं होता। इसकी वजह पर्यावरण, लाइफस्टाइल, इंफेक्शन, हार्मोन, मेंटल हेल्थ और कई बाहरी कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जिन लोगों में पहले से सोरायसिस जेनेटिकल कारणों से होता है, उनमें ये ट्रिगर्स बीमारी को शुरू करने या दोबारा बढ़ाने का काम कर सकते हैं।
इस बारे में Dr. Karuna Malhotra कहती हैं कि हर मरीज में ट्रिगर अलग-अलग हो सकते हैं। जो चीज एक व्यक्ति में फ्लेयर-अप का कारण बने, जरूरी नहीं कि दूसरे व्यक्ति पर उसका वही असर हो।अगर मरीज अपने ट्रिगर्स को पहचान करके उससे बचने की कोशिश करें, तो बीमारी के बार-बार बढ़ने की संभावना काफी कम हो सकती है। मरीजों को इन ट्रिगर्स से जरूर बचना चाहिए।
स्ट्रेस
Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, स्ट्रेस के कारण सोरायसिस बढ़ना सबसे आम कारण है। कई बार देखा गया है कि सोरायसिस के मरीज जब बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेते हैं, तो अचानक नए चकत्ते या पुराने चकत्तों में बढ़ोतरी होने लगती है। अगर लंबे समय तक स्ट्रेस बना रहे, तो शरीर में सूजन बढ़नी शुरू हो जाती है। इससे सोरायसिस फ्लेयर-अप हो सकता है। इसलिए सोरायसिस के मरीजों को मेडिटेशन, योग, गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, नींद पूरी लेना और अपनी मनपसंद एक्टिविटीज करने के लिए समय निकालना चाहिए।

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स्किन पर चोट लगना
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “सोरायसिस के मरीजों की स्किन में अगर कट लग जाए, खरोंच आ जाए, कीड़ा काट लें, सनबर्न हो जाए या किसी वजह से स्किन पर चोट लगे, तो उसी जगह पर सोरायसिस के नए चकत्ते बनने लग सकते हैं। इसे Koebner Phenomenon कहते हैं। इसलिए सोरायसिस के मरीजों को स्किन की खास देखभाल करने की सलाह दी जाती है। मरीजों के लिए खासतौर पर स्किन मॉइस्चराइज रखने की फायदेमंद हो सकता है।”
इंफेक्शन
Dr. Karuna Malhotra के अनुसार, शरीर में होने वाला किसी भी तरह का इंफेक्शन सोरायसिस को ट्रिगर कर सकता है। अगर किसी को गले में इंफेक्शन, टॉन्सिलाइटिस, साइनस इंफेक्शन, कान का संक्रमण, फ्लू, ब्रोंकाइटिस या सांस से जुड़ा इंफेक्शन हो जाए, तो उन मरीजों में सोरायसिस बढ़ सकता है। कई मामलों में गले में इंफेक्शन के बाद बच्चों में गुटेट सोरायसिस की शुरुआत देखी गई है। इसलिए इंफेक्शन के बाद अगर स्किन पर लाल रंग के दाने दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
मौसम में बदलाव
Dr. Karuna Malhotra ने कहा, “सर्दियों का मौसम सोरायसिस के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकता है। ठंडी और हवा में नमी कम होने के कारण, घर में हीटर का इस्तेमाल करने से मरीजों की स्किन बहुत रूखी हो सकती है। अगर रूखी त्वचा में खुजली बढ़ती है और त्वचा फटने लगती है, जिससे सोरायसिस के दाग ज्यादा उभर सकते हैं। हालांकि, हल्की धूप कुछ मरीजों के लक्षणों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा धूप या सनबर्न लेने से उल्टा बीमारी बढ़ सकती है।”
डाइट में बदलाव
Dr. Karuna Malhotra मानती हैं कि सोरायसिस के लिए कोई एक डाइट नहीं दी जा सकती, लेकिन जो मरीज रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, डेयरी प्रोडेक्ट्स, ग्लूटेन और नाइटशेड सब्जियां जैसे टमाटर, बैंगन और आलू खाते हैं, उनमें से कुछ लोगों का सोरायसिस बढ़ सकता है। हालांकि, हर मरीज में डाइट की वजह से अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। इसलिए हर मरीज को अपनी डाइट और लक्षणों का रिकॉर्ड रखना चाहिए, ताकि ट्रिगर्स को समझने में आसानी होती है।
शराब को बहुत ज्यादा पीना
Dr. Karuna Malhotra ने बताया कि सोरायसिस के मरीज अगर बहुत ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं, तो उनके शरीर में सूजन बढ़ सकती है। इससे सोरायसिस के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। कई मामलों में जो लोग रेगुलर शराब पीते हैं, उनमें सोरायसिस बढ़ने का खतरा हो सकता है। इसलिए जब भी सोरायसिस का इलाज होता है, तो शराब न पीने की हिदायत दी जाती है।
स्मोकिंग या वेपिंग
Dr. Karuna Malhotra ने कहा, “सिगरेट, तंबाकू और निकोटीन वाले वेपिंग सोरायसिस के लक्षणों को भी बढ़ा सकते हैं। दरअसल, स्मोकिंग शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन बढ़ा सकती है, जिससे बीमारी बार-बार उभर सकती है और इलाज का असर भी कम हो सकता है। यही वजह है कि सोरायसिस के मरीजों को स्मोकिंग छोड़ने की सलाह दी जाती है।”

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मोटापा
जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें सोरायसिस के लक्षणों को बढ़ा सकता है। शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट ऐसे केमिकल्स बनाता है, जो शरीर में सूजन पैदा कर सकता है। यही सूजन शरीर में सोरायिसस को फ्लेयर-अप कर सकती है। इसके अलावा, मोटापे की वजह से दवाओं का असर भी कई बार कम हो जाता है। इसलिए अगर मरीज बैलेंस्ड डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज के जरिए वजन को कंट्रोल में रखता है, तो सोरायसिस के लक्षणों में सुधार देखा जा सकता है।
दवाएं
Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “वैसे तो हर दवा सोरायसिस को प्रभावित नहीं करती, लेकिन कुछ दवाएं बीमारी बढ़ा सकती हैं। इसमें हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं, मानसिक रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाएं शामिल हैं। अगर किसी मरीज को पहले से सोरायसिस है, तो नई दवा शुरू करने से पहले डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। कभी भी अपनी दवा खुद से बंद या बदलनी नहीं चाहिए।”
हार्मोन में बदलाव
Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी सोरायसिस के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। महिलाओं में खासतौर पर प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण सोरायसिस के लक्षण कम या ज्यादा हो सकते हैं। हालांकि, इसका असर हर महिला में अलग-अलग हो सकता है।
जरूरत से ज्यादा धूप लेना
Dr. Karuna Malhotra के अनुसार, सोरायसिस मरीजों के लिए हल्की धूप लेना फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि नेचुरल यूवी किरणें शरीर की सूजन को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन अगर धूप तेज हो, तो सनबर्न का खतरा हो सकता है। इस कंडीशन में सनबर्न की वजह से नए सोरायसिस के चकत्ते उभर सकते हैं। इसलिए हल्की धूप लेना सही है और अगर लंबे समय तक धूप में निकलते हो, तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।
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निष्कर्ष
Dr. Karuna Malhotra सलाह देती हैं कि सोरायसिस के मरीजों को अपने ट्रिगर्स की पहचान करने के लिए एक डायरी में लिखना चाहिए कि किस वजह से बीमारी फ्लेयर-अप हुआ है। कुछ महीनों में पैटर्न समझ आने लगता है और भविष्य में इन ट्रिगर्स से बचना आसान हो जाता है। अगर बार-बार सोरायसिस बढ़ रहा हो, तो सिर्फ दवाएं बदलना काफी नहीं है, डॉक्टर से मिलकर अपने ट्रिगर्स की पहचान करना जरूरी है।
FAQ
नहाते समय की कौन सी आदत सोरायसिस के मरीजों के लिए नुकसानदेह है?
गर्म पानी से देर तक नहाना और त्वचा को रगड़ना। बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीन लेता है, जिससे सूखापन बढ़ता है। इसके अलावा, नहाते समय या तौलिये से त्वचा को जोर-जोर से रगड़ने पर कोएब्नर फेनोमेनन ट्रिगर हो सकता है, जिससे त्वचा की चोट वाली जगह पर नए पैच बन जाते हैं।मौसम के बदलाव के समय कौन सी लापरवाही भारी पड़ती है?
सर्दियों के आते ही या एसी में लंबे समय तक बैठने पर हवा शुष्क हो जाती है। इस समय कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल न करना और पानी कम पीने की आदत त्वचा को अंदर और बाहर दोनों तरफ से सुखा देती है, जिससे सोरायसिस का फ्लेयर-अप होना तय हो जाता है।
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Current Version
Jul 10, 2026 19:32 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 10, 2026 19:32 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra