Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

क्या सोरायसिस बढ़ा सकता है मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा? डॉक्टर से जानें दोनों का कनेक्शन

सोरायसिस को सिर्फ स्किन से जुड़ी बीमारी मान लेना गलत है। इस बीमारी के कारण कई तरह की मेटाबोलिक समस्याएं भी हो सकती है, जो बीमारी को और ज्यादा गंभीर कर सकती है। इस लेख में डॉक्टर ने मेटाबोलिक सिंड्रोम के बारे में विस्तार से समझाया है।

सोरायसिस स्किन से जुड़ी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें स्किन पर लाल रंग के बड़े-बड़े चकत्ते बन जाते हैं और उसके ऊपर चांदी या सफेद रंग की पपड़ी बनने लगती है। आमतौर पर लोग सोरायसिस को सिर्फ स्किन की समस्या मान लेते हैं, जबकि यब बीमारी पूरे शरीर में सूजन बढ़ा सकती है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो सोरायसिस मेटाबोलिक सिंड्रोम का कारण भी बन सकती है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से बात की। उन्होंने बताया कि सोरायसिस मरीजों में मेटाबोलिक सिंड्रोम होने का रिस्क सामान्य लोगों के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकता है। इसका कारण शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन हो सकती है।

मेटाबोलिक सिंड्रोम क्या होता है?

Dr. Karuna Malhotra कहती हैं, “सबसे पहले मेटाबोलिक सिंड्रोम को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि तभी सोरायसिस और मेटाबोलिक के कनेक्शन को बेहतर तरीके से जाना जा सकता है। आमतौर पर लोग मेटाबोलिक को बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन यह कई समस्याओं का ग्रुप है, जो एक साथ हो जाए, तो हार्ट की बीमारी, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है। इसमें पेट के आसपास ज्यादा फैट होना, हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर बढ़ना, ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर ज्यादा होना, HDL यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का कम होना शामिल है। अगर मरीज में इन पांच में से कम से कम तीन समस्याएं है, तो उसमें मेटाबोलिक सिंड्रोम माना जाता है।”

सोरायसिस कैसे मेटाबोलिक सिंड्रोम के रिस्क को बढ़ा सकता है?

Dr. Karuna Malhotra के मुताबिक, “सोरायसिस में शरीर का इम्यून सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है। इससे TNF-alpha, IL-6 और IL-17 जैसे सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन बनने लगते हैं। ये न सिर्फ स्किन पर असर डालते हैं, बल्कि ब्लड के जरिए पूरे शरीर में पहुंचकर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकते हैं। इस वजह से धीरे-धीरे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकती है, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना मुश्किल हो सकता है और कोलेस्ट्रॉल का बैलेंस भी बिगड़ सकता है। यही कारण है कि सोरायसिस की वजह से मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।”

psoriasis can increase risk of metabolic syndrome

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स्टडी क्या कहती है?

Clinics in Dermatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, सोरायसिस के मरीजों में मेटाबोलिक सिंड्रोम की दर करीब 20 से 50 फीसदी तक देखी गई थी। कुछ स्टडीज में पाया गया है कि सोरायसिस से पीड़ित मरीजों में मेटाबोलिक सिंड्रोम होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले लगभग दोगुना हो सकता है। गंभीर सोरायसिस वाले मरीजों में यह रिस्क और भी ज्यादा पाया गया।

Indian Journal of Dermatology के मुताबिक, जिन लोगों का गंभीर सोरायसिस होता है, उनमें खासतौर पर महिलाओं में, 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में मेटाबोलिक सिंड्रोम की समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसका कारण नसों में थक्के जमना और इंसुलिन की गड़बड़ी हो सकती है। इसके अलावा, सोरायसिस मरीजों को स्किन और ब्लड में TNF-alpha का लेवल बहुत बढ़ा हुआ होता है और इससे लिपिड मेटाबॉलिज्म बिगड़ सकता है। सोरायसिस मरीजों में फोलिक एसिड के स्तर को कम कर देता है, जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है और खून में लिपिड और कोलेस्ट्रॉल का लेवर बढ़ जाता है।

सोरायसिस के इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Dr. Karuna Malhotra का कहना है, “अगर किसी को सोरायसिस के साथ मेटाबोलिक सिंड्रोम भी है, तो इलाज सिर्फ स्किन तक सीमित नहीं होना चाहिए। मैं मरीज की उम्र, वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और लिवर की कंडीशन को ध्यान में रखकर दवा दी जाती हैं। हर मरीज का इलाज एक जैसा नहीं होता, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। आजकल सोरायसिस के इलाज के लिए बायोलॉजिकल थेरेपी की जा सकती है, लेकिन इलाज कैसे होगा, इसका फैसला मरीज की कंडीशन देखकर किया जाता है।”

सोरायसिस के रिस्क को कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?

Dr. Karuna Malhotra ने सोरायसिस मरीजों को अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने के कुछ सुझाव दिए हैं।

  1. मरीजों को वजन कंट्रोल करना जरूरी है।
  2. रोजाना कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करें।
  3. बैलेंस्ड डाइट लें और जंक फूड से परहेज करें।
  4. स्मोकिंग और शराब से परहेज करें।
  5. नींद पूरी करें।
  6. स्ट्रेस को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
  7. समय-समय पर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल चेक कराते रहें।

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निष्कर्ष
सोरायसिस को सिर्फ स्किन की बीमारी समझकर उसका इलाज न करें, बल्कि इससे शरीर में कई तरह की बीमारियां हो सकती है। इसलिए सोरायसिस के मरीजों को मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियां का रेगुलर चेक रखना चाहिए। इसके साथ ही लाइफस्टाइल और डाइट में भी बदलाव जरूर करें। इससे कई तरह की गंभीर तरह की समस्याओं से बचा जा सकता है।

FAQ

  • क्या सोरायसिस मोटापा और पेट की चर्बी को भी बढ़ाता है?

    यह दोनों तरफ से काम करता है। सोरायसिस की सूजन फैट सेल्स के काम करने के तरीके को बदल देती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। दूसरी ओर, फैट सेल्स खुद भी सूजन बढ़ाने वाले केमिकल्स रिलीज करते हैं, जो सोरायसिस के लक्षणों को और ज्यादा गंभीर व दर्दनाक बना देते हैं।
  • इस कनेक्शन के कारण दिल की बीमारियों का खतरा कितना बढ़ता है?

    मेटाबोलिक सिंड्रोम और सोरायसिस का यह मिलाजुला असर धमनियों के अंदर चर्बी जमने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देता है। डॉक्टरों के अनुसार, गंभीर सोरायसिस से पीड़ित युवाओं में भी आम लोगों की तुलना में असमय हार्ट अटैक और स्ट्रोक आने का रिस्क काफी ज्यादा पाया गया है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Aneesh Rawat
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