Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

सोरायसिस में धूप फायदेमंद है या नुकसानदायक? डॉक्टर से जानें

सोरायसिस के मरीजों के लिए धूप फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों हो सकती है। ऐसा किन कंडीशंस में होता है और सोरायसिस के मरीजों के लिए कितनी मात्रा में धूप फायदेमंद होती है? जानें इस लेख में।

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सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो कि घुटनों, कोहनियों और स्कैल्प की त्वचा को प्रभावित करती है। इस बीमारी में त्वचा खुजलीदार और पपड़ीदार हो जाती है। यह लंबे समय तक चलने वाली क्रोनिक बीमारी है, जिसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। इसे डॉक्टर की सलाह पर सही तरह से मैनेज किया जा सकता है। अगर इसे मैनेज करने में जरा भी लापरवाही की जाए, तो इसकी वजह से रोजमर्रा के कामकाज भी प्रभावित हो सकते हैं। सोरायसिस के मरीजों के मन में कई बार यह सवाल भी उठता है कि सूरज की धूप उनकी त्वचा के लिए फायेदमंद है या नुकसानदायक? कहीं इसका उनकी त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ता है? यह लेख इन सवालों का जवाब जानने में आपकी मदद करेगा। इस लेख में मौजूद तथ्यों की पुष्टि राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा ने की है।

सोरायसिस क्या है?

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NHS के अनुसार सोरायसिस स्किन डिजीज है, जिसमें त्वचा सामान्य गति की तुलना में बहुत तेजी से ग्रो करती है। इसमें त्वचा पर लाल, सूखी और पपड़ीदार और परतें मोटी हो जाती हैं। सोरायसिस की वजह से त्वचा इतनी ज्यादा फट जाती है कि उसमें जलन और खुजली तक होने लगती है। यह एक ऑटोइम्यून (Autoimmune) प्रॉब्लम है, जिसका मतलब है कि त्वचा की कोशिकाएं गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला कर बैठती है।

सोरायसिस में धूप फायदेमंद है या नुकसानदायक

American College of Rheumatology के मुताबिक सोरायसिस में धूप फायदेमंद मानी जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज अल्ट्रावायलेट रेज निकालता है, जिन्हें यूवीए और यूवीबी कहा जाता है। यूवीबी रेज में एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं, जो कोशिकाओं को बदलने की दर को कम करने में मदद करता है। वहीं, यूवीए की बात करें, तो यह स्किन को गहराई तक प्रभावित करती है। इसकी वजह से स्किन टैन हो जाती है और बढ़ती उम्र के लक्षण भी कम उम्र में नजर आने लगते हैं। कुल मिलाकर कहने की बात ये है कि सोरायसिस के मरीज धूप के संपर्क में आ सकते हैं। हालांकि, उन्हें एक्सपर्ट की सलाह के बिना ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार लंबे समय तक धूप में रहने की वजह से सोरायसिस की कंडीशन बिगड़ जाती है।

सोरायसिस के मरीज कितनी मात्रा में धूप लें

निश्चित रूप से सोरायसिस के मरीजों के लिए धूप में बैठना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही धूप में बैठना चाहिए। प्रोफेशनल मरीज की कंडीशन का पता लगाते हैं और उसे कितनी देर धूप में रहना चाहिए, इसकी सटीक जानकारी देते हैं। बहरहाल, EPA के अनुसार सूरज की किरणें आमतौर पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच सबसे तेज होती हैं। इतनी तेज धूप सोरायसिस के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। आमतौर पर सोरायसिस के मरीज 5 से 10 मिनट के लिए धूप में बैठ सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है क्योंकि कई मामलों में दी गई दवा या स्थिति के अनुसार धूप की सुरक्षित मात्रा अलग हो सकती है। अगर कोई मरीज ज्यादा देर तक धूप में बैठना चाहता है, तो इसकी अवधि में धीरे-धीरे इजाफा करना चाहिए। सोरायसिस के मरीजों के लिए सुबह 8 से 10 बजे के बीच सप्ताह में दो से तीन बार धूप में बैठने के लिए सबसे सही होता है।

सोरायसिस में धूप के संपर्क में रहने के फायदे

सोरायसिस के मरीजों को धूप में रहने पर कई तरह के फायदे मिल सकते हैं, जैसे-

त्वचा कोशिकाओं की वृद्धि में कमी

सामान्य लोगों में स्किन सेल्स ग्रो करने में करीब 28 से 42 दिन का समय लेते हैं, जबकि सोरायसिस में स्किन सेल्स कुछ ही दिनों में तीव्र गति से ग्रो करते हैं। ऐसी स्थिति में सोरायसिस के मरीजों के लिए धूप में रहना फायदेमंद हो सकता है। धूप में मौजूद यूवीबी रेज स्किन सेल्स के असामान्य वृद्धि को धीमा कर देती है। इससे त्वचा पर मोटी पपड़ी नहीं जमती है।

सूजन में कमी

सोरायसिस में त्वचा में सूजन भी आ जाती है। सूरज की किरणों के संपर्क में आने से सूजन में कमी देखी जा सकती है। इससे रेडनेस, जलन और खुजली जैसी परेशानियों में भी कमी आती है।

विटामिन डी का बनना

धूप के संपर्क में आने पर शरीर विटामिन-डी बनाने लगता है। विटामिन-डी इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने और बेहतर बनाने में योगदान निभाता है। इसका मतलब है कि जब सोरायसिस के मरीज धूप के संपर्क में बैठते हैं, तो इससे उन्हें विटामिन डी मिलता है, जिससे सोरायसिस के लक्षणों में सुधार हो सकता है।

टी सेल्स का नियंत्रण

सोरायसिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जहां प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से हेल्दी स्किन सेल्स को अटैक करने लगती हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि टी सेल्स एक प्रकार की व्हाईट ब्लड सेल्स (White Blood Cells) हैं। इनका मुख्य काम शरीर को बाहरी खतरों जैसे कि वायरस, बैक्टीरिया और कैंसर कोशिकाओं से बचाना है। जब भी कोई हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश करता है, तो ये कोशिकाएं उन्हें पहचानकर नष्ट कर देती हैं। बहरहाल, धूप में जाने से अल्ट्रावॉयलेट रेज इन एक्टिव टी सेल्स को शांत करने में मदद करती है, जिससे सोरायसिस के लक्षणां में कमी आती है।

सोरायसिस में अत्यधिक धूप के संपर्क में रहने के नुकसान

जहां एक ओर सोरायसिस में सीमित मात्रा में धूप के संपर्क में रहना फायदेमंद है, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक धूप के संपर्क में रहने से नुकसान भी हो सकता है, जैसे-

सनबर्न की समस्या

वैसे तो धूप के संपर्क में किसी को भी अतिरिक्त नहीं रहना चाहिए। इससे सनबर्न की समस्या हो सकती है। सोरायसिस के मरीजों में ऐसा होने का जोखिम अधिक होता है और जब सोरायसिस के मरीजों को सनबर्न की समस्या होती है, तो उनकी त्वचा को भारी नुकसान हो सकता है। इसकी वजह से उनकी त्वचा पर नए पैच उभर सकते हैं। इस स्थिति को मेडिकली ’कोएबनेर घटना’ (Koebner Phenomenon) कहा जाता है।

स्किन कैंसर का जोखिम

आपने अक्सर एक्सपर्ट को यह सलाह देते हुए सुना होगा कि धूप में कभी भी ज्यादा समय नहीं बिताना चाहिए। यूवी रेज के संपर्क में ज्यादा देरी तक रहने से स्किन सेल्स डैमेज हो जाती हैं, जिससे स्किन कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। सोरायसिस के मरीजों में यह खतरा और ज्यादा होता है। खासकर, जो लोग फोटोथेरेपी ले रहे हैं, उनके लिए भी जोखिम बढ़ जाता है।

बढ़ती उम्र के लक्षण

सोरायसिस एक मेडिकल कंडीश्न है और इस तरह की स्थिति में स्किन की बहुत ज्यादा केयर करने की जरूरत होती है। अगर कोई व्यक्ति सोरायसिस से पीड़ित होने के बावजूद अधिक समय धूप में बिताता है, तो इससे कोलेजन नष्ट होने लगती है। कोलेजन शरीर में सबसे ज्यादा मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है, जो कि स्किन के टिश्यूज और स्ट्रक्चर (Connective Tissue) को सपोर्ट करता है, इलास्टिसिटी को मेंटेन करता है और स्किन को हाइड्रेट रखता है। इसकी कमी से स्किन डल, बेजान नजर आने लगती है। साथ ही, त्वचा में बढ़ती उम्र के लक्षण जैसे झुर्रियां, फाइन लाइंस, डार्क स्पॉट्स आदि।

फोटोसेंसिटिविटी बढ़ना

सोरायसिस में कई तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जो त्वचा को धूप के प्रति अधिक सेंसिटिव बना देती है। ऐसी स्थिति में मरीज को कम समय के लिए धूप में जाना चाहिए वरना स्किन में जलन, रेडनेस और छाले पड़ सकते हैं।

स्किन डिहाइड्रेट होना

सोरायसिस के मरीजों को लंबे समय के लिए धूप में नहीं जाना चाहिए। इसे उनकी स्किन डिहाइड्रेट हो सकती है। दरअसल, धूप में लंबे समय तक बैठने की वजह से त्वचा अपनी नेचुरल नमी को खो देती है। इससे स्किन ड्राई हो जाती है, जिससे त्वचा में खुजली और जलन और अधिक बढ़ जाती है। इससे सोरायसिस के मरीजों की तकलीफ और बढ़ जाती है।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

चूंकि यह स्पष्ट हो चुका है कि सोरायसिस के मरीजों को लंबे समय के लिए धूप में नहीं बैठना चाहिए। इसकी वजह से स्किन को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए, यह जान लेना जरूरी है कि धूप की वजह से सोरायसिस की कंडीशन बिगड़ने पर कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए? इस संबंध में डॉ. करुणा मल्होत्रा खुद बताती हैं, ‘अगर मरीज की स्किन पर छाले, जलन और इचिंग बहुत ज्यादा हो रही है, स्किन की परत निकल रही है, दर्द बढ़ रहा है और नए पैचेज भी उभर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।’

निष्कर्ष

सोरायसिस त्वचा से संबंधित गंभीर समस्या है। कई मरीजों को डॉक्टर खुद धूप में थोड़ा समय बिताने की सलाह देते हैं। हालांकि, कितनी देर तक धूप में बैठना है और सोरायसिस के किन मरीजों को धूप से पूरी तरह परहेज करना है, इसकी सटीक जानकारी एक्सपर्ट से लेना जरूरी है। जरा भी लापरवाही मरीज की कंडीशन को बिगाड़ सकती है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • सोरायसिस को जड़ से खत्म करने के लिए क्या उपचार हैं?

    सोरायसिस को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। यह ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसे हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से मैनेज किया जा सकता है।
  • किस विटामिन की कमी से सोरायसिस होता है?

    सोरायसिस एक आनुवंशिक (Genetic) और इम्यून सिस्टम की बीमारी है। विटामिन डी की कमी इसके लक्षणों को बढ़ा सकती है, जैसे त्वचा की कोशिकाओं तीव्र गति से बढ़ सकती हैं और सूजन को बढ़ा सकती है, जिससे त्वचा में दर्दनाक और पपड़ीदार पैचेज उभरने लगते हैं।
  • सोरायसिस में कौन से भोजन से परहेज करें?

    सोरायसिस में क्या खाना है और क्या नहीं, इस संबंध में एक्सपर्ट की सलाह लेना आवश्यक होता है। वैसे सोरायसिस में एंटी-इंफ्लेमेटरी वाले आहार जैसे हरी सब्जियां, फल, ओमेगा-3 जैसी चीजें खानी चाहिए और शराब, मैदा, प्रोसेस्ड फूड, रेडी मीट से दूर रहना चाहिए।
  • त्वचा रोग में क्या नहीं खाना चाहिए?

    सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि आपको किस तरह की स्किन प्रॉब्लम है? एक्जिमा, दाद खुजली जैसी स्किन डिजीज होने पर मसालेदार, तली-भुनी, डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
  • क्या नीम सोरायसिस को ठीक कर सकता है?

    सोरायसिस ऑटोइम्यून डिजीज है। नीम के उपयोग के बावजूद यह समस्या पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती है। हालांकि, नीम में सूजन-रोधी गुण होते हैं। इसका उपयोग करने से सोरायसिस के लक्षणों में कमी आ सकती है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    May 06, 2026 09:28 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • May 06, 2026 09:28 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra

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