Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

रेटिना डिटैचमेंट क्या है? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के उपाय

आंखों का रेटिना देखने का काम करता है, लेकिन अगर इसमें कुछ भी समस्या हो जाए, तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसलिए रेटिना डिटैचमेंट के लक्षणों, बचाव और इलाज के तरीकों को जानना बहुत जरूरी है। लेख में डॉक्टर ने इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताया है।   

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आंखें कैमरे की तरह तस्वीरें रिकॉर्ड करती है और इस रिकॉर्डिंग के लिए एक सेंसर भी होता है। इसे रेटिना कहा जाता है, जो एक बहुत ही पतली और सेंसटिव परत होती है। जब भी हम कुछ देखते हैं, तो उसकी तस्वीर पहले रेटिना पर बनती है और फिर इसकी जानकारी ऑप्टिक नर्व के जरिए दिमाग तक पहुंचती है। इसलिए साफ और स्पष्ट देखने में रेटिना का सही होना बहुत जरूरी है। अगर किसी वजह से यह परत अपनी जगह से हटने लगे या फिर पूरी तरह से हट जाए, तो इस कंडीशन को रेटिना डिटैचमेंट (Retina Detachment) कहा जाता है। हालांकि, यह समस्या मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन अगर शुरूआती लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है। रेटिना डिटैचमेंट के बारे में पूरी जानकारी के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Founder & Director and Dr. Priyamvada Bhasin, Medical Director, Specialist Comprehensive Ophthalmology,Squint & Vitreo-Retinal Specialist, Ratan Jyoti Netralay, MP से बात की।

रेटिना डिटैचमेंट क्या होता है?

Dr. Priyamvada Bhasin का कहना, “रेटिना डिटैचमेंट की समस्या तब होती है, जब आंख के पिछले हिस्से में मौजूद टिश्यू की पतली परत अपनी नॉर्मल जगह से अलग हो जाता है। इसे आम भाषा में लोग आंख का पर्दा भी कहते हैं और मेडिकल भाषा में यह रेटिना होता है। दरअसल, रेटिना सीधे तौर पर ब्लड वेसल्स से जुड़ा होता है, जो इसे ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन देने का काम करती हैं। अगर रेटिना के टिश्यू ब्लड वेसल्स की परत से पूरी तरह से अलग हो जाते है, तो न्यूट्रिशन और ऑक्सीजन मिलना बंद हो सकता है। अगर यह कंडीशन लंबे समय तक बीना रहे, तो रेटिना के टिश्यू क्षतिग्रस्त होने लगते है।"
Mayo Clinic के अनुसार, रेटिना डिटैचमेंट एक मेडिकल इमरजेंसी है और इसका इलाज जितना देरी में होता है, उतना ही आंखों की रोशनी जाने का खतरा बढ़ सकता है।

रेटिना डिटैचमेंट की समस्या कितनी आम है?

NCBI में प्रकाशित जर्नल के मुताबिक, अलग-अलग स्टडीज में रेटिना डिटैचमेंट होने की दर अलग-अलग पाई गई है। कुछ रिसर्च के अनुसार, हर साल करीब 6.3 से 17.9 प्रति एक लाख लोगों में रेटिना डिटैचमेंट के मामले सामने आते हैं। वहीं एक अन्य अध्ययन के मुताबिक लगभग 10,000 लोगों में 1 व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित हो सकता है। रिसर्च में यह सामने आया है कि पुरुषों में इसका रिस्क महिलाओं के मुकाबले थोड़ा ज्यादा हो सकता है। जिन लोगों की नजर का माइनस नंबर ज्यादा होता है, उनमें भी रेटिना डिटैचमेंट का खतरा बढ़ जाता है।

इसी जर्नल में बताया गया है कि दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों जैसे भारत और आसपास के देशों के लोगों में इसका खतरा ज्यादा पाया गया है। इसका कारण एशियाई लोगों में मायोपिया यानी माइनस नंबर का चश्मा होना है। इस वजह से लोगों की आंखों की पुतली की लंबाई बड़ी होती है। पुतली बड़ी होने से आंख का पर्दा खिंचकर पतला हो जाता है और उसके फटने का रिस्क बढ़ जाता है।

retina detachment

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रेटिना डिटैचमेंट का रिस्क किन लोगों को ज्यादा होता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “उम्र बढ़ने के साथ आंख के अंदर मौजूद विट्रियस जेल सिकुड़ने लगता है और इसेस कई बार रेटिना पर खिंचाव पैदा हो सकता है। अगर यह खिंचाव ज्यादा हो जाए, तो रेटिना में छोटा छेद या दरार बन सकती है। इसके बाद आंख के अंदर मौजूद तरल पदार्थ उस छेद के जरिए रेटिना के नीचे पहुंच जाता है। इससे रेटिना अपनी जगह से अलग होने लगता है। उम्र बढ़ने के अलावा, आंख में गंभीर चोट लगना, कुछ बीमारियों या पहले हुई आंखों की सर्जरी के बाद भी इसका खतरा बढ़ सकता है। जिन लोगों की आंख का नंबर माइनस में होता है, मोतियाबिंद, डायबिटीज या फैमिली हिस्ट्री वाले लोगों को रेटिना डिटैचमेंट का रिस्क ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों को रेगुलर आई चेकअप कराते रहना चाहिए।”

रेटिना डिटैचमेंट के लक्षण क्या हैं?

Dr. Purendra Bhasin ने लोगों को रेटिना डिटैचमेंट से जुड़े लक्षणों को पहचान करके इलाज कराने की सलाह दी है। इस बीमारी में शुरुआत में दर्द न होने के कारण लोग इसे नॉर्मल आंख की परेशानी समझकर इग्नोर कर देते हैं। इसलिए अगर किसी को ये लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  1. अचानक फ्लोटर्स दिखना - अगर आंखों के सामने अचानक काले धब्बे, छोटे-छोटे धागे या मकड़ी के जाले जैसी चीजें दिखने लगे, तो यह रेटिना की दिक्कत हो सकती है।
  2. रोशनी की चमक महसूस होना - बिना किसी बाहरी रोशनी के आंखों में बार-बार बिजली चमकने जैसी फ्लैश दिखाई देना भी रेटिना डिटैचमेंट का लक्षण है।
  3. नजर के सामने पर्दा आना - अगर किसी को आंख के किसी हिस्से में काला पर्दा या छाया महसूस होने लगे, तो रेटिना में दिक्कत हो सकती है।
  4. अचानक नजर कम होना - अगर अचानक धुंधला दिखाई देने लगे या देखने की क्षमता कम होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  5. साइड विजन कम होना - इस बीमारी में कुछ लोगों को सिर्फ आंख की साइड से देखने की क्षमता प्रभावित होती है।

रेटिना डिटैचमेंट को चेक कैसे किया जाता है?

Dr. Priyamvada Bhasin ने बताया कि डॉक्टर सबसे पहले आंखों की पुतलियों को खास आई ड्रॉप के जरिए बड़ा करते हैं, ताकि रेटिना को अच्छी तरह देखा जा सके। इसके अलावा, डाइलेटेड आई एग्जाम, ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT), आंखों का अल्ट्रासाउंड करके रेटिना में छेद या रेटिना के अपनी जगह से अलग होने का पता लगाया जा सकता है।

रेटिना डिटैचमेंट का इलाज कैसे किया जाता है?

Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज की मेडिकल कंडीशन क्या है और उम्र क्या है? आमतौर पर मरीजों को ये इलाज दिए जा सकते हैं।

  1. लेजर - अगर रेटिना में सिर्फ छोटा छेद या दरार है और वह पूरी तरह अलग नहीं हुई है, तो डॉक्टर लेजर थेरेपी से उस हिस्से को सील कर सकते हैं। इससे आगे डिटैचमेंट होने का खतरा कम हो जाता है।
  2. क्रायोथेरेपी - कुछ मामलों में फ्रीजिंग टेक्नीक के जरिए रेटिना को उसकी जगह पर स्थिर रखने की कोशिश ककी जाती है।
  3. सर्जरी - अगर रेटिना बिल्कुल ही अलग हो चुका है, तो सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इस डॉक्टर मरीज की कंडीशन को देखते हुए विट्रेक्टॉमी, न्यूमैटिक रेटिनोपेक्सी और स्क्लेरल बकल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस प्रोसेस में रेटिना को उसकी जगह पर चिपकाया जाता है।

रेटिना डिटैचमेंट सर्जरी के बाद रिस्क फैक्टर

Cleveland Clinic के अनुसार, आमतौर पर रेटिना को दोबारा अपनी जगह पर रखने की सर्जरी सफल ही होती है, लेकिन इसके कुछ साइड इफैक्ट्स भी हो सकते हैं। इसमें आंख के अंदर ब्लीडिंग, इंफेक्शन, आंख पर दबाव बढ़ना, दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ना और सर्जरी के बाद आंख के अंदर झिल्ली बन जाना शामिल है। कुछ मामलों में मरीजों को भविष्य में जल्द ही मोतियाबिंद भी हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज में ये समस्याएं होंगी। इसलिए इलाज से पहले डॉक्टर मरीज को सभी तरह के खतरों की जानकारी देते हैं।

dry eyes and infection

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क्या सर्जरी के बाद आंखों की रोशनी पहले जैसी हो जाती है?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “इस सवाल का जवाब हर मरीज के लिए एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि रेटिना का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ था, इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ और सर्जरी कितनी सफल रही।”

Nature जर्नल में प्रकाशित Scottish Retinal Detachment Study में मरीजों को दस साल तक फॉलो किया गया। इसमें रिसर्चर्स ने पाया कि जिन मरीजों में रेटिना का बीच वाला हिस्सा प्रभावित नहीं हुआ था, उनमें लंबे समय बाद भी देखने की क्षमता काफी अच्छी रही। वहीं जिन मरीजों में मैक्युला प्रभावित हो चुका था, उनकी देखने की क्षमता में भी सुधार हुआ, लेकिन इसके परिणाम कम बेहतर रहे। रिसर्च में यह भी देखने को मिला कि सफल इलाज के बाद ज्यादातर मरीजों की आंखों की रोशनी इतनी रही कि वे अपने रोजाना के काम कर पाते थे, लेकिन जिन मरीजों को दोबारा रेटिना डिटैचमेंट हुआ, उनकी देखने की रोशनी अपेक्षाकृत कम बेहतर रही।

क्या रेटिना डिटैचमेंट से बचाव संभव है?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा कि रेटिना डिटैचमेंट को पूरी तरह से रोकना तो संभव नहीं है, लेकिन लोगों को आंखों से जुड़ी इन आदतों में सुधार जरूर करना चाहिए।

  1. आंखों की चेकअप रेगुलर कराएं।
  2. अगर किसी को चश्मा लगा है, तो उसे डॉक्टर से चेकअप जरूर करना चाहिए।
  3. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना जरूरी है।
  4. खेलते समय सेफ्टी के लिए चश्मा पहनें।
  5. आंख में चोट लगने पर डॉक्टर से जरूर जांच कराएं, भले ही शुरुआत में कोई परेशानी महसूस न हो।
  6. अचानक फ्लोटर्स, चमक या नजर में बदलाव को कभी भी नॉर्मल न समझें।

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

Dr. Priyamvada Bhasin ने कहा कि अगर अचानक धुंधलाॉ, मकड़ी जैसा जाला या चमक महसूस हो, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे मामलों में किसी केमिस्ट से लेकर दवा आंखों में न डालें, क्योंकि गलत इलाज से आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं कि रेटिना डिटैचमेंट आंखों की गंभीर समस्या है, जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। इस बीमारी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें शुरुआत में दर्द नहीं होता, इसलिए लोग लक्षणों को इग्नोर कर देते हैं। अगर समय पर आंखों की चेकअप करा ली जाए, तो रेटिना डिटैचमेंट जैसी समस्या का समय पर इलाज हो सकता है और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है।

FAQ

  • क्या रेटिना डिटैचमेंट एक आंख से दूसरी आंख में भी फैल सकता है?

    नहीं, यह कोई संक्रमण नहीं है जो एक आंख से दूसरी आंख में फैले। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को एक आंख में जेनेटिक कमजोरी, हाई मायोपिया (चश्मे का बहुत ज्यादा नंबर) या किसी बीमारी के कारण रेटिना डिटैचमेंट हुआ है, तो उसकी दूसरी आंख में भी रेटिना फटने या डिटैच होने का रिस्क काफी बढ़ जाता है। इसलिए दोनों आंखों की नियमित जांच जरूरी है।
  • क्या रेटिना डिटैचमेंट की सर्जरी के बाद आंखों की रोशनी 100% वापस आ जाती है?

    रोशनी का वापस आना इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज अस्पताल कितनी जल्दी पहुंचा। यदि रेटिना का सबसे मुख्य और संवेदनशील केंद्र, जिसे मैक्युला कहते हैं, डिटैच होने से बच गया था, तो विजन वापस आने की संभावना बहुत अच्छी होती है। लेकिन अगर मैक्युला भी उखड़ चुका था और सर्जरी में देरी हुई, तो ऑपरेशन के बाद रेटिना अपनी जगह तो आ जाता है, लेकिन आंखों की रोशनी पूरी तरह वापस आने में मुश्किल हो सकती है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 07, 2026 18:20 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jul 07, 2026 18:20 IST

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    Published By : Aneesh Rawat
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