Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

मोतियाबिंद फटने पर क्या होता है? डॉक्टर से जानें किन संकेतों को न करें नजरअंदाज

मोतियाबिंद का इलाज समय पर कराना जरूरी होता है और अगर समय पर इसका इलाज न हो, तो मोतियाबिंद फट भी सकता है। मोतियाबिंद फटने पर आंखों की रोशनी तक जा सकती है।  इस लेख में डॉक्टर ने मोतियाबिंद फटने और इसके कारणों को विस्तार से बताया है। 

आमतौर पर माना जाता है कि मोतियाबिंद बढ़ती उम्र के साथ होने वाली सबसे आंखों की समस्या है। इस बीमारी में आंख का नेचुरल लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है और मरीज को साफ दिखाई देना बंद हो जाता है। मोतियाबिंद का इलाज सर्जरी है, जो अक्सर सफल रहती है, लेकिन अगर समय पर मोतियाबिंद का इलाज न कराया जाए या इसे टाल दिया जाए, तो मोतियाबिंद फट भी सकता है। इस बारे में हमने Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में मोतियाबिंद इतना ज्यादा पक जाता है कि उसकी बाहरी परत कमजोर पड़ने लगती है और लेंस के अंदर मौजूद पदार्थ बाहर निकल सकते हैं।

मोतियाबिंद कैसे फट सकता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “मोतियाबिंद बढ़ने के साथ आंख के लेंस में मौजूद प्रोटीन और अन्य तत्वों की संरचना बदलने लगती है। समय के साथ लेंस की बाहरी परत कमजोर हो सकती है। अगर यह परत टूट जाए और अंदर का पदार्थ आंख के भीतर फैलने लगे, तो आंख में तेज सूजन और गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। अगर मरीज लंबे समय तक मोतियाबिंद का इलाज नहीं कराता, तो इसकी संभावना बढ़ सकती है।”

मोतियाबिंद फटने पर क्या समस्याएं हो सकती हैं?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा कि जब लेंस का तरल पदार्थ आंख के अंदर फैल जाता है, तो आंखों में तेज जलन, आंख लाल होना, अचानक धुंधला दिखाई देना, रोशनी कम महसूस होना, आंख में भारीपन या दबाव महसूस होना और आंख के अंदर सूजन बढ़ सकती है। अगर मोतिबिंद फटने के बाद लेंस का पदार्थ आंख के अंदर मौजूद तरल के फ्लो में रुकावट पैदा कर दे, तो आंखों में दबाव बढ़ने लगता है और ग्लूकोमा की कंडीशन हो सकती है।

cataract rapture

यह भी पढ़ें- मोतियाबिंद को बदतर होने से रोकने के लिए अपनाएं डॉक्टर के बताए ये 5 टिप्स, दिखेगा असर

मोतियाबिंद का रिस्क किन लोगों को ज्यादा होता है?

Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, कई सालों से मोतियाबिंद का इलाज न कराने से यह फट सकता है। जिन लोगों को आंख में चोट लगी है, पहले से आंखों की बीमारी हो और समय पर आंखों का चेकअप न कराने से मोतियाबिंद फटने की संभावना बढ़ सकती है।

मोतिबिंद का इलाज कैसे हो सकता है?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “मोतियाबिंद फटने की स्थिति में डॉक्टर सबसे पहले आंख की सूजन और बढ़े हुए दबाव को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद मोतियाबिंद की सर्जरी की जाती है और समय पर इलाज मिलने से आंख की रोशनी बचाने और आगे होने वाली जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।”

यह भी पढ़ें- बिना डॉक्टर की सलाह स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स लेना क्यों है खतरनाक? जानें इसके नुकसान

निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं कि मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याओं से बचने के लिए आंखों का रेगुलर चेकअप कराना चाहिए। अगर डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी है, तो उसे समय पर करा लेना चाहिए। आंख को चोट लगने से बचाना चाहिए और अगर धुंधला दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराएं। मोतियाबिंद के इलाज को लंबे समय तक टालने से बचें, क्योंकि मोतियाबिंद फटने से आंखों की रोशनी तक जा सकती है।

FAQ

  • इसके फटने से काला मोतिया होने का क्या खतरा है?

    यह सबसे खतरनाक जटिलता है, जिसे 'फैकोलिटिक ग्लूकोमा' कहते हैं। लीक हुआ प्रोटीन आंख के पानी को बाहर निकालने वाले प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। रास्ता बंद होने से आंख का प्रेशर अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है, जो आंखों की रोशनी को स्थाई रूप से खत्म कर सकता है।
  • क्या मोतियाबिंद फटने के बाद ऑपरेशन से रोशनी वापस आ सकती है?

    यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज अस्पताल कितनी जल्दी पहुंचता है। यदि फटने के तुरंत बाद (कुछ घंटों के भीतर) सर्जरी करके लीक हुए प्रोटीन को साफ कर दिया जाए और नया लेंस डाल दिया जाए, तो रोशनी काफी हद तक बचाई जा सकती है। लेकिन यदि देरी की गई, तो बढ़ा हुआ प्रेशर आंख की मुख्य नस (ऑप्टिक नर्व) को हमेशा के लिए सुखा देता है, जिसके बाद रोशनी वापस लाना नामुमकिन हो जाता है।

Read Next

PCOS वाली महिलाओं में खराब नींद कैसे बनती है वजन बढ़ने का कारण? डॉक्टर से समझें विज्ञान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jun 26, 2026 20:39 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jun 26, 2026 20:39 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jun 26, 2026 20:39 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jun 26, 2026 20:39 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content