सोरायसिस स्किन से जुड़ी ऑटोइम्यून समस्या है। इसकी वजह से त्वचा में खुजली, रैशेज और रेडनेस हो जाती है। इस समस्या का कोई स्थायी इलाज नहीं है। इसे केवल नियंत्रित (मैनेज) किया जा सकता है। इसी तरह, जेनिटल सोरायसिस गुप्तांग में होने वाली ऑटोइम्यून समस्या है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकती है। हालांकि, यह समस्या संक्रामक नहीं है, लेकिन इसे इग्नोर नहीं किया जा सकता है। इस लेख में हम जेनिटल सोरायसिस के बारे में विस्तार से जानेंगे। यहां बताए गए सभी वैज्ञानिक तथ्यों और साक्ष्यों की पुष्टि खुद राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा ने की है।
जेनिटल सोरायसिस क्या है?
Cleveland Clinic के अनुसार जेनिटल सोरायसिस जननांग और उसके आसपास की त्वचा को प्रभावित करने वाली स्थिति है। इस कंडीशन में त्वचा पर दर्दनाक, चिकने या पपड़ीदार, बदरंग और खुजलीदार धब्बे पड़ जाते हैं। आमतौर पर यह दिखने में सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन की तरह लगता है, लेकिन यह संक्रामक रोग नहीं है। सोरायसिस की ही तरह जेनिटल सोरायसिस का भी कोई स्थायी इलाज नहीं है। इस स्थिति को सिर्फ मैनेज किया जा सकता है।
किन्हें जेनिटल सोरायसिस का रिस्क अधिक होता है?
2024 में Australasian Journal of Dermatologists में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार जेनिटल सोरायसिस से पीड़ित 63 फीसदी रोगियों में इसके प्रभाव शरीर के अन्य हिस्सों में देखने को मिलते हैं। बहरहाल, जेनिटल सोरायसिस होने का रिस्क उन लोगों को अधिक होता है, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। जैसे स्किन प्रॉब्लम, मोटापा, अन्य ऑटोइम्यून कंडीशन और जेनेटिक्स यानी परिवार में जेनिटल सोरायसिस का इतिहास होना भी इस बीमारी के कारण बनते हैं।
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जेनिटल सोरायसिस के लक्षण
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डॉ. करुणा मल्होत्रा जेनिटल सोरायसिस के लक्षणों के बारे में विस्तार से समझाती हैं-
- त्वचा का पतला होनाः जेनिटल सोरायसिस होने पर प्रभावित हिस्से की त्वचा बहुत ज्यादा पतली और सेंसिटिव हो जाती है।
- त्वचा का रंग बदलनाः सोरायसिस वाले हिस्से का रंग त्वचा के अन्य हिस्सों के रंग से अलग नजर आने लगता है। यह आमतौर पर गुलाबी, गहरा लाल जैसा दिखाई दे सकता है।
- चिकना और चमकदार पैचः सोरायसिस के बारे में सोचते ही दिमाग में पपड़ीदार त्वचा की छवि नजर आती है, जबकि जेनिटल सोरायसिस होने पर ऐसा कुछ नहीं होता है। इसके बजाय, जननांगों पर सोरायसिस अक्सर उभरे हुए या खुरदरे होने के बजाय चिकने और चमकदार नजर आते हैं।
- त्वचा का फटनाः जेनिटल सोरायसिस होने पर प्रभावित हिस्से की स्किन पर दरारें पड़ सकती हैं, जिससे दर्द या खून आने की समस्या हो सकती है। त्वचा के फटने की वजह से उसमें तेज खुजली हो सकती है, जिससे असहजता भी बढ़ जाती है।
डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "सोरायसिस का एक मुख्य लक्षण त्वचा का पपड़ीदार होना है, जो कि डेड स्किन सेल्स के जमा होने के कारण होता है। जेनिटल सोरायसिस में हर मामले में ऐसा नहीं होता है। इसके बजाय त्वचा पर एक चिकनी सतह नजर आती है।"
पुरुषों और महिलाओं में जननांग सोरायसिस के बीच अंतर
| लक्षण/कारक | पुरुषों में | महिलाओं में |
| मुख्य क्षेत्र | लिंग (Penis), अंडकोश (Scrotum), और गुदा के आसपास। | Vulva, योनि के बाहरी हिस्से (Labia majora) और गुदा के आसपास। |
| दिखावट | आमतौर पर चमकदार लाल चकत्ते। लिंग की त्वचा पर पपड़ी नहीं दिखते, लेकिन अन्य हिस्सों पर हो सकते हैं। | चमकदार लाल पैच। यहां की त्वचा पतली होने के कारण पपड़ी या पपड़ी कम ही बनते हैं। |
| खुजली और जलन | खुजली हो सकती है, विशेष रूप से अंडकोश के पास। | गंभीर खुजली और जलन की संभावना अधिक होती है, जो कभी-कभी संक्रमण जैसा महसूस होती है। |
| यौन प्रभाव | इरेक्शन के दौरान त्वचा में खिंचाव के कारण दर्द या असहजता हो सकती है। | संभोग के दौरान घर्षण से त्वचा छिल सकती है और तेज जलन हो सकती है। |
| अन्य जटिलताएं | खुजली, दर्द और त्वचा फटने जैसी दिक्कत हो सकती है। | पसीने और नमी के कारण यीस्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। |
जेनिटल सोरायसिस होने के कारण
अमूमन पुरुष और महिला दोनों में जेनिटल सोरायसिस के कारण एक जैसे होते हैं, जैसे-
- ऑटोइम्यून रेस्पॉन्सः जैसा कि आप जानते ही हैं कि सोरायसिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है। इसका मतलब है कि जब इम्यून सिस्टम गलती से हेल्दी स्किन सेल्स पर अटैक करता है, जिससे कोशिकाएं बहुत तेजी से बनने लगती हैं। ऐसे में प्रभावित हिस्से में सूजन आ जाती है और रेडनेस बढ़ने लगती है।
- आनुवंशिकः अगर परिवार में किसी को जेनिटल सोरायसिस है, तो भावी पीढ़ी को यह समस्या होने का खतरा अधिक होता है।
- संक्रमणः यीस्ट इंफेक्शन या शरीर में कोई अन्य इंफेक्शन भी जेनिटल सोरायसिस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है।
- जीवनशैली से जुड़े कारकः धूम्रपान, शराब का सेवन आदि भी जेनिटल सोरायसिस का सामान्य कारक बन सकते हैं।
जेनिटल सोरायसिस की जलन से कैसे बचें?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी की मानें, तो जेनिटल सोरायसिस में जलन को कम करने के लिए आप कुछ विशेष तरीके अपना सकते है, जैसे-
- जेनिटल सोरायसिस के लिए जो भी ट्रीटमेंट चल रहा है, उसके प्रति लापरवाही न करें। नियमित रूप से दवा को लगाएं, ताकि उसे फैलने से भी रोका जा सके।
- जेनिटल सोरायसिस पर जो दवा लगा रहे हैं, उसे अन्य हिस्सों के संपर्क में आने से रोकें। यहवह स्वस्थ त्वचा को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
- अगर जेनिटल सोरायसिस में ट्रीटमेंट के बावजूद लगातार जलन, खुजली जैसी समस्या हो, तो जल्द से जल्दी डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
- जेनिटल सोरायसिस में इंटीमेट हाइजीन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। 2018 में Dermatology and Therapy में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार महिला हो या पुरुष, दोनों ही अपने गुप्तांग की सफाई माइल्ड क्लींजर या नॉन सोप क्लींजर यूज करें। नहाते समय भी खुशबू वाले प्रोडक्ट का यूज करने से बचें। एंटी-बैक्टीरियल साबुन और बॉडी वॉश का उपयोग न करें। इस तरह की चीजें त्वचा में जलन पैदा कर सकती हैं।
- मॉइस्चराइज लगाना न भूलें। The National Psoriasis Foundation के अनुसार, “नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाने से सोरायसिस (psoriasis) जैसी संवेदनशील त्वचा पर स्किन मैनेजमेंट का बड़ा अंतर देखने को मिलता है।” जेनिटल सोरायसिस से लक्षणों को हल्का करने के लिए यह बहुत जरूरी है। मॉइस्चराइजर लगाने से जलन और इचिंग में कमी आती है।
- जेनिटल सोरायसिस होने पर कभी भी गंदे वॉशरूम का यूज न करें। इससे जेनिटल सोरायसिस के लक्षण बिगड़ सकते हैं।
जेनिटल सोरायसिस की जांच कैसे होती है?
आमतौर पर सोरायसिस में स्किन पपड़ीदार हो जाती है, जिसमें पैच स्पष्ट नजर आते हैं, वहीं जेनिटल सोरायसिस इससे अलग है। इसमें प्रभावित हिस्सा पपड़ीदार होने के बजाय चमकदार और लाल हो जाता है। डॉक्टर जांच के दौरान सबसे पहले यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या पैच में खुजली और जलन हो रही है? आमतौर पर जेनिटल सोरायसिस की तुलना जॉक इच यानी फंगल इंफेक्शन या एक्जिमा जैसी बीमारियों से की जाती है, ताकि समस्या की सही पहचान की जा सके। इसकी जांच के लिए डॉक्टर आपके लक्षणों और जेनिटल सोरायसिस के निशानों पर गौर करते हैं। National Psoriasis Foundation की मानें, तो ज्यादातर मामलों में डॉक्टर केवल देखकर ही इसकी पहचान कर लेते हैं। अगर किसी वजह से जेनिटल सोरायसिस स्पष्ट न हो, तो इसके लिए स्किन बायोप्सी (त्वचा का छोटा सा नमूना लेना) भी की जा सकती है।
जेनिटल सोरायसिस का इलाज
American Academy of Dermatology के अनुसार जेनिटल सोरायसिस के इलाज के लिए अलग अलग किस्म के स्टेरॉयड का यूज किया जाता है। डॉक्टर हमेशा मरीज की कंडीशन को देखते हुए सही मेडिसिन की सलाह देते हैं और उन्हें कितनी मात्रा में तथा दिन में कितनी बार यूज करना है, यह भी बताते हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अगर ट्रीटमेंट जेनिटल सोरायसिस पर सही तरह से काम न करे, तो इस संबंध में मरीज को फिर से डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवाना चाहिए।
जेनिटल एरिया की स्किन आमतौर पर सेंसिटिव होती है और टॉपिकल स्टेरॉइड क्रीम्स से यहां स्किन के पतले होने का खतरा हो सकता है। इसलिए जेनिटल एरिया में आमतौर पर डॉक्टर की सलाह लेकर कम पोटेंसी वाले स्टेरॉइड्स को ही यूज करना चाहिए। ध्यान रखें डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी क्रीम इस्तेमाल करना सही नहीं।
क्या जेनिटल सोरायसिस संक्रामक है?
डॉ. करुणा मल्होत्रा बताती हैं, "जेनिटल सोरायसिस संक्रामक नहीं है। यह ऑटोइम्यून कंडीशन है, न कि बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला कोई संक्रमण। इसलिए यह संक्रमित व्यक्ति को छूने से या यौन गतिविधियों अथवा पर्सनल चीजों को शेयर करने के जरिए संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ व्यक्ति में नहीं फैल सकता है।"
क्या जेनिटल सोरायसिस में यौन संबंध बनाना सुरक्षित है?
डॉ. करुणा मल्होत्रा स्पष्ट बताती हैं, "जेनिटल सोरायसिस की स्थिति बहुत ज्यादा खराब है, तो यौन संबंध बनाने से बचें। हां, अगर आपकी कंडीशन बेहतर हो रही है, तो आप यौन संबंध बना सकते हैं। हालांकि, जेनिटल सोरायसिस होने के कारण गुप्तांग में जलन और इचिंग बनी रहती है। इसलिए, व्यक्ति को जलन तथा इचिंग कम करने के उपाय अपनाने चाहिए।"
जेनिटल सोरायसिस में यौन संबंध बनाने से पहले बरतें सावधानी
- अगर जेनिटल सोरायसिस के कारण जननांगों के आसपास की त्वचा छिल गई है, तो बेहतर है कुछ समय के लिए यौन संबंध बनाने से परहेज करें।
- जेनिटल सोरायसिस में यौन संबंध बनाने से पहले गुप्तांग को अच्छी तरह साफ कर लें, ताकि प्रभावित हिस्से में लगी दवा पार्टनर को न लग जाए।
- जेनिटल सोरायसिस में लुब्रिकेटेड कंडोम का उपयोग करना सुरक्षित होता है। इससे घर्षण कम होता है और सूजन वाले हिस्से में जलन में कमी आती है।
- यौन संबंध के बाद भी गुप्तांग की सफाई करना न भूलें। इसके बाद प्रभावित हिस्से पर डॉक्टर की दी हुई दवा लगाएं।
जेनिटल सोरायसिस के लिए कब जाएं डॉक्टर के पास?
अगर जेनिटल सोरायसिस के लक्षण नजर आएं यानी जेनिटल एरिया में जलन, खुजली और त्वचा असामान्य महसूस हो, तो इसकी अनदेखी न करें। हालांकि, कई बार गुप्तांग या इसके आसपास खुजली का कारण अत्यधिक पसीना आना या फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है। इसके बावजूद, ध्यान रखिए कि जेनिटल सोरायसिस से मिलते-जुलते कोई भी लक्षण नजर आएं, तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर के पास जाएं।
निष्कर्ष
जेनिटल सोरायसिस एक गंभीर समस्या है और इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। जैसे ही इसके लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाएं। वैसे तो यह बीमारी संक्रमित नहीं है यानी एक से दूसरे व्यक्ति को नहीं होती है, इसके बावजूद यौन संबंध बनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह और सावधानियां बरतना जरूरी हो जाता है।
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FAQ
क्या जेनिटल सोरायसिस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है?
नहीं, जेनिटल सोरायसिस एक से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती है। असल में यह ऑटोइम्यून कंडीशन है, जो छूने या सामान शेयर करने से नहीं फैल सकती है।क्या जेनिटल सोरायसिस और सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन एक हैं?
ये दोनों बीमारियां एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। एसटीआई बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से फैलता है, जबकि जेनिटल सोरायसिस एक ऑटोइम्यून कंडीशन है। यह समस्या असुरक्षित यौन संबंध बनाने से नहीं होती है।क्या पुरुषों और महिलाओं में जेनिटल सोरायसिस के लक्षण अलग-अलग होते हैं?
शारीरिक संरचना के कारण पुरुष और महिलाओं में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। पुरुषों में यह अक्सर लिंग पर चमकदार लाल पैच के रूप में नजर आता है, जबकि महिलाओं में वल्वा के बाहरी हिस्से पर लाल गहरे पैच दिखते हैं।क्या जेनिटल एरिया पर सामान्य सोरायसिस क्रीम लगाई जा सकती है?
डॉ. करुणा मल्होत्रा की मानें, तो जेनिटल सोरायसिस में सामान्य सोरायसिस की क्रीम नहीं लगाई जानी चाहिए। ध्यान रखें, घुटने, हाथ या अन्य हिस्सों में लगाने वाली सोरायसिस की क्रीम जेनिटल सोरायसिस की क्रीम से अलग होती है। वैसे भी जेनिटल या इसके आसपास के हिस्से काफी संवेदनशील होते हैं। यहां पर सोरायसिस की क्रीम लगाने से त्वचा को नुकसान हो सकता है।क्या जेनिटल सोरायसिस का कोई स्थायी इलाज है?
मौजूदा समय में यह नहीं कहा जा सकता है कि जेनिटल सोरायसिस का स्थायी इलाज है। डॉ. करुणा मल्होत्रा बताती हैं कि इसे दवाओं और सही जीवनशैली की मदद से मैनेज किया जा सकता है और ट्रिगर फैक्टर्स से भी बचा जा सकता है।
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Current Version
May 02, 2026 13:57 IST
Modified By : Meera Tagore May 02, 2026 13:57 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra