यूरिक एसिड का नाम लेते ही हमारे दिमाग में जोड़ों में दर्द, अर्थराइटिस, गाउट जैसी बीमारियां आने लगती हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि यूरिक एसिड सिर्फ इन्हीं समस्याओं को ट्रिगर नहीं करता है। इसके साथ-साथ कई अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं। यहां तक कि यूरिक एसिड का बुरा असर स्किन पर भी पड़ता है। कुछ लोगों का तो यह भी मानना है कि यूरिक एसिड की वजह से सोरायसिस जैसी गंभीर स्किन प्रॉब्लम भी हो सकती है। इस लेख में हम यूरिक एसिड और सोरायसिस के बीच संबंध और इस स्थिति में क्या करना चाहिए, यह सब राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से समझेंगे।
यूरिक एसिड और सोरायसिस के बीच क्या संबंध है?
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यूरिक एसिड और सोरायसिस के बीच संबंध पाया गया है। कई अध्ययन और स्टडीज से भी इस बात का पता चलता है कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों में हाइपरयूरिसीमिया यानी शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने की संभावना अधिक होती है। इसे सरल शब्दों में विस्तार से समझते हैं।
डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं, "आमतौर पर हमारी त्वचा पुरानी कोशिकाओं को 28-30 दिनों में रिप्लेस करती है, लेकिन सोरायसिस में यह प्रक्रिया महज 3-4 दिन में पूरी हो जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सोरायसिस की वजह से हमारा इम्यून सिस्टम बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है। आपको बता दें कि हर कोशिका में न्यूक्लियस होता है, जिसमें डीएनए होता है।" बहरहाल, जब सोरायसिस के कारण कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती हैं, तो उसके साथ-साथ डीएनए को भी नुकसान होता है और प्यूरीन नाम का तत्व भारी मात्रा में निकलता है। शरीर इस प्यूरीन को मेटाबोलाइज करके यूरिक एसिड में बदल देता है।
डॉ. करुणा मल्होत्रा आगे कहती हैं, "सोरायसिस के कारण शरीर में होने वाली क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (पुरानी सूजन) मेटाबॉलिक प्रक्रिया को बिगाड़ देती है। नतीजतन, किडनी एक्स्ट्रा यूरिक एसिड को बाहर नहीं निकाल पाती है। इससे ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।"
सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण
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सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने पर कुछ खास लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे-
- गाउट पेनः सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने पर अचानक गाउट पेन होने लगता है। Arthritis Foundation की मानें, तो सोरायसिस की वजह से जोड़ों का दर्द, खासकर पैर का अंगूठा, टखने या घुटने में न सिर्फ दर्द होता है, बल्कि रेडनेस और सूजन भी आ जाती है। प्रभावित हिस्सा छूने पर कोमल भी महसूस होता है।
- सोरायसिस कंडीशन का बिगड़नाः क्या आप जानते हैं कि सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने से स्किन कंडीशन और भी खराब हो जाती है? कुछ अध्ययनों में यह संबंध देखा गया है कि यह पूरी तरह सच है। 2011 में Clinical and Experimental Dermatology में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि शरीर में जितना ज्यादा यूरिक एसिड होगा, सोरायसिस के पैच उतने ही गंभीर हो सकते हैं।
- जोड़ों में जकड़नः June 2025 मेंThe American Journal of the Medical Sciences रिव्यू के अनुसार सोरायसिस में ज्वाइंट स्टिफनेस बढ़ जाती है। यहां तक कि व्यक्ति की हिलने-डुलने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। अगर लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहती है, तो जोड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है। खासकर, उन लोगों को जिन्हें सोरायटिक अर्थराइटिस है।
- टोफी का बननाः 2017 में Anais Brasileiros de Dermatologia में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि टोफी यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स का एक सख्त जमाव होता है। जब लंबे समय तक कोई हाई यूरिक एसिड से परेशान रहता है, तो यह खून में घुल नहीं पाता है, जिससे ये क्रिस्टल्स जोड़ों और सॉफ्ट टिश्यू में जमा होने लगते हैं। धीरे-धीरे ये उभार की तरह त्वचा पर नजर आने लगते हैं।
- किडनी से संबंधित समस्याः 2025 में Journal of Nephropharmacology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार हाई यूरिक एसिड होने की वजह से किडनी से जुड़ी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। खासकर, किडनी में स्टोन का रिस्क बढ़ जाता है। किडनी स्टोन के लक्षणों की बात करें, तो इसमें पेशाब के दौरान जलन, पेशाब का धुंधला दिखना या उससे तेज दुर्गंध आना शामिल हैं।
- सिस्टमिक लक्षणः Medicine (Baltimore) के मुताबिक जब सोरायसिस के कारण शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है, तो इसका प्रभाव पूरे शरीर में नजर आने लगता है। जैसे अक्सर थकान होना, बेचैनी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम (जैसे हाई बीपी या मोटापा) के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सोरायसिस में यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के उपाय

डॉ. करुणा मल्होत्रा सोरायसिस में यूरिक एसिड के लिए मेडिकल मैनेजमेंट के कुछ विशेष टिप्स देती हैं।
- सोरायसिस को करें कंट्रोलः चूंकि, यह स्पष्ट हो चुका है कि सोरायसिस जैसी समस्याओं के कारण यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। इसलिए, मरीजों के लिए जरूरी है कि सबसे पहले वे सोरायसिस का सही ट्रीटमेंट करवाएं। इसके लिए एक्सपर्ट की मदद लें और उनकी दी हुई दवा को समय पर लें। दवा की मदद से सोरायसिस के पैच कम होते हैं, जिससे मेटाबॉलिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
- यूरिक एसिड के स्तर पर नजर रखेंः सोरायसिस के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है कि वे यूरिक एसिड के स्तर पर कड़ी नजर रखें। इसके लिए आपको समय-समय पर सीरम यूरिक एसिड टेस्ट करवाना चाहिए। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए आवश्यक है, जिनका वजन ज्यादा है या जिनका सोरायसिस बहुत गंभीर है। डॉक्टरों का लक्ष्य आमतौर पर यूरिक एसिड को 6 एमजी/डीएल से नीचे रखना होता है ताकि गाउट और टोफी बनने का खतरा कम हो सके।
- दवाओं का रिव्यू करेंः हालांकि, एक आम आदमी के लिए यह मुश्किल है कि वे अपनी दवाओं को स्वयं रिव्यू करें। लेकिन आप इस बात की जानकारी जरूर रखें कि कई दवाएं ऐसी होती हैं, जो अनजाने में यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं। उदाहरण के तौर पर समझें। जैसे कोई हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए एक दवा लंबे समय से ले रहा है। ये दवाएं अक्सर यूरिक एसिड को बाहर निकालने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं। जाहिर है, इस स्थिति में शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है।
सोरायसिस में यूरिक एसिड की जांच
सोरायसिस में यूरिक एसिड के डायग्नोसिस के दौरान, रोगियों का सीरम यूरिक एसिड टेस्ट किया जाता है, क्योंकि बढ़ा हुआ यूरिक एसिड न केवल जोड़ों में सूजन पैदा करता है, बल्कि यह सोरियाटिक अर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। ऐसे में बढ़ा हुआ यूरिक एसिड का स्तर शरीर में सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन यानी अंदरूनी सूजन की ओर इशारा करता है। सोरायसिस की गंभीरता जितनी अधिक होगी, यूरिक एसिड बढ़ने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा होती है। यही कारण है कि सोरायसिस के मरीजों के लिए नियमित रूप से ब्लड टेस्ट के जरिए यूरिक एसिड की निगरानी करना जरूरी होता है और उन्हें एक्सपर्ट की सलाह पर एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट भी फॉलो करनी चाहिए।
कब जाएं डॉक्टर के पास
सोरायसिस जैसी कंडीशन होने पर लोग अक्सर अपनी स्किन ट्रीटमेंट पर विशेष जोर देते हैं, जबकि उन्हें अपने यूरिक एसिड के स्तर पर भी नजर रखनी चाहिए। जब भी जरूरत महसूस हो तो डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। डॉ. करुणा मल्होत्रा कहती हैं कि सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने पर शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं, जैसे अचानक जोड़ों में असहनीय दर्द होना, सोरायसिस की स्थिति का बिगड़ना, सोरायटिक अर्थराइटिस और गाउट के लक्षण नजर आना। इस तरह की कोई भी समस्या हो, तो बेहतर है कि आप प्रोफेशनल की मदद लें।
निष्कर्ष
सोरायसिस में यूरिक एसिड जैसी समस्या हो, तो उसे इग्नोर न करें। ऐसा किया जाना सही नहीं है। सोरायसिस में यूरिक एसिड बढ़ने पर मरीज को कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे जोड़ों में दर्द होना, पैर के अंगूठों की तकलीफ बढ़ना, सोरायसिस कंडीशन का बिगड़ना आदि। अगर ऐसा किसी के साथ हो, तो उन्हें तुरंत इस संबंध में प्रोफेशनल की मदद लेनी चाहिए। वैसे आपको बता दें कि जिस तरह सोरायसिस के कारण शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है, उसी तरह बढ़ा हुआ यूरिक एसिड सोरायसिस की स्थिति को खराब कर सकता है।
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FAQ
क्या सोरायसिस होने पर यूरिक एसिड आवश्यक तौर पर बढ़ता है?
ऐसा जरूरी नहीं है कि सोरायसिस होने पर यूरिक एसिड का स्तर बढ़े। हालांकि, जिन्हें सीवियर सोरायसिस है, उनमें हाइपरयूरिसीमिया जैसी समस्या होने का खतरा बना रहता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि सामान्य व्यक्ति की तुलना में सोरायसिस के मरीजों में स्किन सेल्स बहुत तेजी से टूटते हैं।क्या बढ़ा हुआ यूरिक एसिड सोरायसिस को और खराब कर सकता है?
हां, ऐसा हो सकता है। हाई यूरिक एसिड की वजह से शरीर में सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन बढ़ जाता है, जिससे शरीर के कई हिस्सों में सूजन आ जाती है। यह सोरायसिस की कंडीशन को और भी खराब कर देता है।क्या खान-पान में बदलाव से सोरायसिस और यूरिक एसिड दोनों में सुधार हो सकता है?
हां, लो प्यूरिन युक्त डाइट की मदद से सोरायसिस और यूरिक एसिड के स्तर को मैनेज किया जा सकता है। हालांकि, अगर मरीज की कंडीशन ज्यादा खराब है, तो उन्हें ट्रीटमेंट करवाना चाहिए।क्या सोरायसिस की दवाएं यूरिक एसिड के स्तर को प्रभावित करती हैं?
कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें लंबे समय से लेने पर इसका बुरा प्रभाव यूरिक एसिड के स्तर पर पड़ता है। इसलिए, जो मरीज किसी भी प्रकार की दवा ले रहे हैं, उन्हें अपने शरीर में नजर आ रहे लक्षणों पर गौर करना चाहिए और जरूरी हो, तो डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।क्या लहसुन खाने से यूरिक एसिड कम होता है?
लहसुन खाने से यूरिक एसिड के स्तर में कमी आ सकती है। Life (Basel) के मुताबिक लहसुन में एस-एलिल-एल-सिस्टीन (S-allyl-L-cysteine) जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं,जो क्सैंथिन (xanthine) ऑक्सीडेज एंजाइम को रोक सकते हैं। यह एंजाइम यूरिक एसिड बनाने के लिए जिम्मेदार होता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व जोड़ों की सूजन को कम करते हैं और गाउट की समस्या में भी कमी करने में मदद करते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स क्लियर करते हैं कि इस संबंध में और अध्ययन आवश्यक हैं।
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Current Version
Apr 21, 2026 18:01 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 21, 2026 18:01 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Karuna Malhotra