यूरिक एसिड की समस्या से जूझ रहे हैं, लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या वे मांस-मछली का सेवन कर सकते हैं? चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के अनुसार, यूरिक एसिड का बढ़ना मुख्य रूप से शरीर में प्यूरीन (Purine) की अधिक मात्रा के कारण होता है, जो टूटने पर यूरिक एसिड बनाता है। चूंकि मांस और मछली के कई प्रकारों में प्यूरीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, इसलिए डायटिशियन अक्सर इनके सेवन को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि क्या यूरिक एसिड बढ़ने पर मांस-मछली खा सकते हैं या नहीं? अगर हां, तो किस तरह के परहेज और सावधानियां बरतनी चाहिए। अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो इस लेख को जरूर पढ़ें।
यूरिक एसिड में मांस-मछली खाएं या नहीं?

जिन लोगों का यूरिक एसिड बढ़ा हुआ होता है, उन लोगों को मांस-मछली का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए। इस संबंध में नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत बताती हैं कि यूरिक एसिड के मरीजों को मांस-मछली का सेवन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। दरअसल, मांस-मछली में प्यूरिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। प्यूरिन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से गाउट, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। वंदना राजपूत समझाती हैं, "यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर मरीज को ऑर्गन मीट, रेड मीट, सी-फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इनमें प्यूरिन काफी ज्यादा मात्रा में होता है, जो शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है।"
यूरिक एसिड लेवल रेंज चार्ट
| श्रेणी (Category) | पुरुष | महिला | स्थिति और सुझाव |
| सामान्य | 3.4 – 7.0 mg/dL | 2.4 – 6.0 mg/dL | स्तर संतुलित है, स्वस्थ जीवनशैली जारी रखें। |
| बढ़ा हुआ (High/Borderline) | 7.1 – 8.5 mg/dL | 6.1 – 7.5 mg/dL | यह हाइपरयूरिसीमिया की स्थिति हैं। डाइट में प्यूरीन कम करें और ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। |
| खतरनाक (Severe/High Risk) | > 8.5 mg/dL | > 7.5 mg/dL | गाउट (Gout) और किडनी स्टोन का उच्च जोखिम। तुरंत डॉक्टर से मिलें। |
| अत्यधिक कम (Low) | < 2.5 mg/dL | < 2.0 mg/dL | ऐसा रेयर होता है। यह किडनी प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है। |
क्या यूरिक एसिड में सीमित मात्रा में मांस-मछली खा सकते हैं?
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जैसे कि पहले ही स्पष्ट है कि मांस-मछली में प्यूरिन काफी ज्यादा होता है, इसलिए इसका सेवन नहीं किया जाना चाहिए। हां, अगर कोई नॉन-वेज खाना पसंद करता है, तो वे रेड मीट के बजाय चिकन का सेवन कर सकते हैं। Mayo Clinic की मानें, तो अगर किसी को हाई यूरिक एसिड की समस्या है, तो वे चिकन खा सकते हैं। हालांकि चिकन में प्यूरिन की मात्रा मॉडरेट होती है। इसलिए, हाई यूरिक एसिड में इसका सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह बात भी मायने रखती है कि किसी व्यक्ति का यूरिक एसिड कितना बढ़ा हुआ है? The Journal of Nutrition की मानें, तो 100 ग्राम चिकन में 175 मिलीग्राम प्यूरिन होता है। इसलिए, इसे मॉडरेट श्रेणी में रखा जाता है।
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मांसाहार में प्यूरीन की मात्रा और सुझाव
Nutrients के अनुसार मरीजों को मांसाहार में प्यूरीन की मात्रा के हिसाब से इसका सेवन करना चाहिए-
| खाद्य पदार्थ | प्यूरीन का स्तर | सेवन का सुझाव (Recommendation) |
| ऑर्गन मीट (कलेजी, गुर्दा) | अत्यधिक उच्च (Extremely High) | पूरी तरह परहेज करें (सख्त मना है) |
| रेड मीट (मटन, बीफ) | उच्च (High) | बचने की कोशिश करें (Avoid) |
| चिकन ब्रेस्ट / थाई (बिना स्किन के) | मध्यम (Moderate) | सीमित मात्रा में (हफ्ते में 2 बार, 60-90 ग्राम) |
| मछली (टूना, झींगा) | उच्च से मध्यम | बहुत कम मात्रा में या परहेज करें |
| अंडे | बहुत कम (Very Low) | सुरक्षित विकल्प (रोजाना खा सकते हैं) |
हाई यूरिक एसिड में मांस-मछली खाने के नुकसान

गाउट का दर्द बढ़नाः अगर हाई यूरिक एसिड होने के बावजूद कोई अक्सर मांस-मछली का सेवन करता है, तो यह उनकी सेहत के लिए सही नहीं है। इससे जोड़ों में दर्द, सूजन, रेडनेस हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें, तो अधिक मात्रा में मांस-मछली खाने से पैरों के अंगूठे में दर्द काफी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसा यूरिक एसिड क्रिस्टल की वजह से होता है।
- किडनी पर असरः हाई यूरिक एसिड होने पर इसका किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ता है। National Kidney Foundation के अनुसार यूरिक एसिड का उच्च स्तर (हाइपरयूरिसीमिया) रेनल ट्यूबल्स यानी गुर्दों की नलिकाओं में नुकीले क्रिस्टल बनाकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है। इससे किडनी में सूजन, घाव होने लगता है, जिससे किडनी फंक्शन पर भी बुरा असर पड़ता है। विशेषज्ञ इसे क्रोनिक किडनी डिजीज या किडनी स्टोन का कारण बताते हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि हाई यूरिक एसिड और हाई ब्लड प्रेशर के बीच भी संबंध देखा गया है।
- जोड़ों में तकलीफः अगर किसी को लंबे समय से हाई यूरिक एसिड है और वह मांस-मछली का सेवन भी कर रहा है, तो इस स्थिति में न सिर्फ जोड़ों का दर्द बढ़ता है, बल्कि जोड़ों में स्टिफनेस होने लगती है। ऐसे में जोड़ों में क्रोनिक पेन होने लगता है। ऐसे में व्यक्ति के लिए चलना-फिरना, उठना-बैठना भी मुश्किल हो जाता है।
- अन्य परेशानियांः हाई यूरिक एसिड में प्यूरिन युक्त आहार का सेवन अधिक मात्रा में करने से कई अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं, जैसे थकान, कमजोरी, असहजता, हल्का बुखार आना। आपको जानकारी के लिए बता दें कि यूरिक एसिड का स्तर किसका कितना है, उसी के अनुसार शरीर में लक्षण नजर आ सकते हैं। मांस-मछली का प्रभाव भी व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
- त्वचा पर असरः हाई यूरिक एसिड होने का मतलब साफ है कि शरीर यूरिक एसिड का प्रोडक्शन ज्यादा मात्रा में कर रहा है, लेकिन उसे फिल्टर नहीं कर पा रही है। ऐसे में कई नुकीले क्रिस्टल बनने लगते हैं। American Academy of Dermatology के अनुसार इसे टोफी (Tophi) कहा जाता है। ये गांठें सख्त होती हैं। ये ज्यादातर उंगलियों, कोहनी और कानों पर दिखाई देती हैं। इसके अलावा, गाउट की वजह से प्रभावित त्वचा में रेडनेस बढ़ जाती और गर्म हो जाती है, जिससे बाद में खुजली होने लगती है और त्वचा पपड़ी बनकर छिलने लगती है। ऐसे में अगर मांस-मछली का सेवन भी अधिक किया जाए, स्किन से जुड़ी परेशानी भी बढ़ सकती है ।
हाई यूरिक एसिड होने पर कब जाएं डॉक्टर के पास
अगर यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने के बावजूद मांस-मछली का सेवन लगातार किया जा रहा है, तो यह सही नहीं है। इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि डॉक्टर से कब परामर्श लें। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि हाई यूरिक एसिड में मांस-मछली खाने पर हो रहे जोड़ों, अंगूठे, टखनों और घुटनों में दर्द हो, तो इन संकेतों को हल्के में न लें। इसके अलावा, अगर शरीर में किडनी स्टोन के लक्षण नजर आएं, तो जल्द से जल्द ब्लड टेस्ट करवाएं। जिन लोगों को पेशाब करने के दौरान जलन या दर्द का एहसास होता है, उन्हें भी अपने यूरिक एसिड के स्तर की जांच करनी चाहिए। खासकर, जो नियमित रूप से नॉन-वेज खाते हैं, उन्हें इसके प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
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निष्कर्ष
शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होना सही नहीं है। इस दौरान अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खासकर, जो लोग नॉन-वेज खाते हैं, उन्हें अपनी सेहत के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्हें समय-समय पर अपने यूरिक एसिड के स्तर की जांच कराते रहनी चाहिए। साथ ही शरीर में नजर आ रहे हर लक्षण पर गौर करना चाहिए। अगर किसी को जोड़ों में दर्द हो और अर्थराइटिस की परेशानी हो, तो यह चिंताजनक स्थिति होती है। समय पर इलाज करने से स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है। साथ ही जीवनशैली में हेल्दी आदतों को अपनाकर यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है।
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FAQ
यूरिक एसिड कितने दिन में सही होता है?
यूरिक एसिड बढ़ने पर आपको किस तरह की समस्या हो रही है, इसका पता लगाना ज्यादा जरूरी है। अगर यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से गाउट यानी जोड़ों में दर्द की शिकायत हो गई है, तो सही ट्रीटमेंट की वजह से 3-10 दिनों में यह समस्या ठीक हो सकती है। वहीं, इलाज न किया जाए, तो यह समस्या लंबी चल सकती है।क्या यूरिक एसिड के मरीज दालें और फलियां खा सकते हैं?
यूरिक एसिड बढ़ने पर दालों और फलियों का सेवन किया जा सकता है, लेकिन इसकी मात्रा का ध्यान रखा जाना जरूरी है। हालांकि, दालों में मध्यम मात्रा में प्यूरीन होता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।क्या यूरिक एसिड में दही खाना फायदेमंद है?
हाई यूरिक एसिड होने के बावजूद दही खाना पूरी तरह सुरक्षित होता है। असल में दही में फैट कम होता है, जो कि यूरिक एसिड के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है।क्या यूरिक एसिड बढ़ने से किडनी खराब हो सकती है?
हाई यूरिक एसिड (हाइपरयूरिसीमिया) किडनी को डैमेज कर सकते हैं। आपको बता दें कि हाई यूरिक एसिड अपने आप में क्रोनिक किडनी डिजीज का बड़ा कारण हो सकता है।क्या शराब पीने से यूरिक एसिड बढ़ता है?
शराब का सेवन करने से सीरम यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। ऐसे में हाइपरयूरिसीमिया और गाउट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जानकारी के लिए बता दें कि सीरम यूरिक एसिड का मतलब ब्लड में मौजूद यूरिक एसिड की मात्रा होती है। जब डॉक्टर यूरिक एसिड टेस्ट की सलाह देते हैं, तब ब्लड सीरम (रक्त का तरल हिस्सा) की जांच की जाती है।
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Current Version
Apr 20, 2026 16:09 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 20, 2026 16:09 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Vandana Rajput