कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को पूरी तरह से खत्म किया जाता है, ताकि कैंसर की बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना कम हो सके। हालांकि, यह थेरेपी मरीजों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन कुछ मरीजों को रेडिएशन थेरेपी के साइड इफैक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं। इसमें रेडिएशन फाइब्रोसिस शामिल है। इस बारे में हमने Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें रेडिएशन दिए गए हिस्से के टिश्यू में जरूरत से ज्यादा स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। इसके कारण वह हिस्सा धीरे-धीरे सख्त होने लगता है और इससे शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
रेडिएशन फाइब्रोसिस का किन मरीजों पर असर होता है?
Dr. Mandeep Singh कहते हैं, “जब किसी हिस्से पर रेडिएशन दिया जाता है, तो उसका असर कैंसर कोशिकाओं पर तो पड़ता ही है, साथ ही आसपास की कुछ स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती है। जब इलाज पूरा हो जाता है, तो आमतौर पर ज्यादातर टिश्यू सामान्य होने लगते हैं, लेिकनि कुछ मरीजों में टिश्यू ठीक होने के प्रोसेस में जरूरत से ज्यादा सख्त हो जाते हैं। अगर टिश्यू पर स्कार बनने लगे, तो इसे रेडिएशन फाइब्रोसिस कहा जाता है। हालांकि, इसका असर इलाज कराने के तुरंत बाद नहीं दिखता, लेकिन कुछ महीनों बाद इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। हालांकि, रेडिएशन फाइब्रोसिस सभी मरीजों को नहीं होता, इसका असर रेडिएशन की कुल डोज, इलाज का समय, शरीर के किस हिस्से में रेडिएशन दिया जा रहा है और मरीज की मेडिकल कंडीशन पर भी निर्भर करता है। जिन मरीजों को हाई डोज रेडिएशन या कीमोथेरेपी के साथ रेडिएशन ट्रीटमेंट होता है, उन मरीजों में रिस्क थोड़ा ज्यादा हो सकता है।”

रेडिएशन फाइब्रोसिस के लक्षण
Dr. Mandeep Singh मरीजों को सलाह देते हैं कि इस बीमारी में प्रभावित हिस्से में जकड़न महसूस हो सकती है। लोगों को लगाातार भारीपन, मांसपेशियों में अकड़न, हाथ-पैर की मूवमेंट कम होना या सामान्य एक्टिविटीज करने में परेशानी होने जैसे लक्षणों की पहचान करनी चाहिए।
गर्दन और जबड़े में रेडिएशन फाइब्रोसिस का असर
Dr. Mandeep Singh ने बताया कि जिन मरीजों को रेडिएशन सिर, गर्दन या मुंह के आसपास दिया गया हो, तो फाइब्रोसिस के कारण मरीज को मुंह पूरी तरह खोलने में दिक्कत होना, गर्दन घुमाने में परेशानी होना और खाना खाने में मुश्किल हो सकती है।
फेफड़ों या छाती पर असर
Dr. Mandeep Singh के अनुसार, “जिन मरीजों को रेडिएशन छाती या फेफड़ों के आसपास दिया जाता है, उन्हें सांस फूलने, लगातार खांसी होने, हल्की मेहनत में भी थकान होने और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। ऐसे लक्षणों को कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों पर असर
Dr. Mandeep Singh ने कहा, “जिन मरीजों की ब्रेस्ट कैंसर में रेडिएशन थेरेपी हुई है, उन्हें बाद में ब्रेस्ट या बगल के हिस्से में सख्ती महसूस हो सकती है। इसके साथ हाथ ऊपर उठाने में परेशानी, कंधे की मूवमेंट कम होना, दर्द या खिंचाव और हाथ में भारीपन जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।”
रेडिएशन फाइब्रोसिस का इलाज
Dr. Mandeep Singh कहते हैं, “रेडिएशन फाइब्रोसिस की पहचान के लिए सीटी स्कैन, एमआरआई और अन्य टेस्ट किए जाते हैं, ताकि यह चेक किया जा सके कि टिश्यू में कितना बदलाव आया है और इलाज की कितनी जरूरत है। हालांकि, रेडिएशन फाइब्रोसिस का पूरी तरह इलाज हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही समय पर इलाज शुरू करने से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इलाज में फिजियोथेरेपी, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, दर्द कम करने वाली दवाएं और रिहैबिलिटेशन की सलाह दी जा सकती है।”
निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh कहते हैं कि रेडिएशन थेरेपी को कैंसर के इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, लेकिन कुछ मरीजों पर इसका असर भी पड़ सकता है। अगर किसी मरीज को लगातार जकड़न, टिश्यू में सख्ती, सांस लेने में परेशानी, हाथ-पैर की मूवमेंट कम होना और खाना निगलने या मुंह खोलने में मुश्किल हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, ताकि समय पर इसका इलाज हो सके।
FAQ
त्वचा और मांसपेशियों पर इसके क्या मुख्य संकेत दिखते हैं?
सिकाई वाले हिस्से की त्वचा बहुत ज्यादा कड़क, कसी हुई और मोटी महसूस होने लगती है, जैसे कि वहां कोई सख्त गांठ या स्कार बन गया हो। मांसपेशियों में भयंकर अकड़न आ जाती है, जिससे उस अंग को हिलाने-डुलाने या मोड़ने में तेज दर्द और कठिनाई होती है।क्या रेडिएशन फाइब्रोसिस नसों को भी नुकसान पहुंचा सकता है?
इसे 'रेडिएशन प्लेक्सोपैथी' कहते हैं। जब सख्त हुए टिश्यूज आसपास की मुख्य नसों को दबाने लगते हैं, तो प्रभावित हिस्से (जैसे हाथ या पैर) में लगातार झुनझुनी होना, सुन्न पड़ जाना, करंट जैसा तेज दर्द होना या उस अंग में कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण दिखते हैं।
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Jul 02, 2026 20:15 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 02, 2026 20:15 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 02, 2026 20:15 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra