Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vishnu Hari , Oncologist & Haematologist

कैंसर के इलाज के दौरान मरीज को क्यों होने लगती है भूलने की समस्या? डॉक्टर से जानें कीमो ब्रेन के बारे में

कैंसर के इलाज के दौरान अक्सर मरीजों को भूलने की बीमारी हो जाती है। इलाज के दौरान कीमो ब्रेन होने की वजह, लक्षणों और इलाज के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए इस लेख को जरूर पढ़ें। इस लेख में डॉक्टर ने कीमो ब्रेन के बारे विस्तार से बताया है।

कैंसर के इलाज के दौरान मरीज का सिर्फ फिजिकल ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है। कई बार कैंसर के मरीजों को इलाज के दौरान लगता है कि उन्हें बातें याद नहीं रहती या फिर फोकस करने में दिक्कत होने लगती है। कई बार कैंसर के मरीज किसी भी फैसले को लेने में काफी समय लगा देते हैं। इस कंडीशन को कीमो ब्रेन कहा जाता है। इस बारे में हमने Dr. Vishnu Hari, Associate Director & Head- Medical Oncology, Haematology & BMT, Sarvodaya Hospital, Sector-8, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि इसका नाम चाहे कीमो ब्रेन है, लेकिन यह कंडीशन सिर्फ कीमोथेरेपी की वजह से नहीं होती। कैंसर के इलाज के दौरान मरीज को कई तरह की मानसिक समस्याएं हो सकती हैं, जिस वजह से कीमो ब्रेन होने का रिस्क बढ़ सकता है।

कीमो ब्रेन के लक्षण

Dr. Vishnu Hari कहते हैं, “कीमो ब्रेन में मरीज की सोचने, समझने, याद रखने और जानकारी को प्रोसेस करने की क्षमता इलाज के दौरान प्रभावित हो जाती है। हालांकि, कुछ लोगों में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन कुछ लोगों में गंभीर लक्षणों के कारण मरीज के रोजाना के कामों पर असर पड़ने लगता है।”

  1. हाल ही में हुई कुछ बातों को भूल जाना
  2. नाम, तारीख या अपॉइंटमेंट याद रखने में मुश्किल होना
  3. फोकस करने में परेशानी होना
  4. एक समय में कई काम करने में मुश्किल
  5. बातचीत के दौरान सही शब्द याद न आना
  6. फैसले लेते समय ज्यादा समय लेना

chemo brain

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कैंसर के मरीजों को कीमो ब्रेन क्यों होता है?

Dr. Vishnu Hari के मुताबिक, “कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं दिमाग की कोशिकाओं पर असर डालती है। इसके अलावा, कुछ मामलों में कैंसर की वजह से शरीर में सूजन आने लगती है, जो मरीजों के दिमाग के फंक्शन को प्रभावित कर सकती है। कई बार मरीज कैंसर की बीमारी की वजह से टेंशन और स्ट्रेस होने लगता है और इसका असर मरीज की याददाश्त और फोकस करने पर पड़ सकता है। कीमोथेरेपी के कारण कुछ मरीजों को नींद की समस्या हो सकती है। नींद की कमी के कारण मरीजों को थकान होने लगती है, जिस वजह दिमाग भी थकने लगता है, जो मरीजों में भूलने का कारण बन सकती है।”

ब्रेन कीमो का इलाज कैसे करें?

Dr. Vishnu Hari ने कैंसर के मरीजों को ब्रेन कीमो से बचाव के लिए कुछ खास सुझाव दिए हैं।

  1. जरूरी बातों को लिखने से मरीजों को याद रहता है।
  2. मोबाइल रिमाइंडर और कैलेंडर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. मरीजों को नींद पूरी करनी चाहिए।
  4. रेगुलर फिजिकल एक्सरसाइज या वॉक जरूर करनी चाहिए।
  5. कैंसर के मरीज इलाज के दौरान किताबें पढ़ सकते हैं, पहेलियां हल करके अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर बना सकते हैं।
  6. बैलेंस्ड डाइट और पर्याप्त पानी पिएं।

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निष्कर्ष
Dr. Vishnu Hari के अनुसार, आमतौर पर कैंसर के इलाज के दौरान ही मरीजों को कीमो ब्रेन महसूस हो सकता है। इलाज पूरा होने के बाद कई लोगों में कुछ महीनों के भीतर धीरे-धीरे सुधार दिखाई देने लगता है। मरीजों को इलाज के दौरान अपनी डाइट और मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ब्रेन कीमो को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।

FAQ

  • क्या यह समस्या सिर्फ कीमोथेरेपी दवाओं के कारण ही होती है?

    नहीं। मुख्य कारण कीमोथेरेपी की दवाएं ही हैं, लेकिन कैंसर के कारण होने वाला अत्यधिक मानसिक तनाव, एंग्जायटी, नींद की कमी, खून की कमी और अन्य दवाएं भी कीमो ब्रेन की स्थिति को बढ़ा देती हैं।
  • क्या कीमो ब्रेन का पता लगाने के लिए कोई स्कैन या टेस्ट होता है?

    इसका पता लगाने के लिए कोई सटीक ब्लड टेस्ट या एमआरआई स्कैन नहीं है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों को सुनकर और कुछ आसान न्यूरोलॉजिकल व मेमोरी टेस्ट के जरिए ही इस स्थिति की पुष्टि करते हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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