सर्वाइकल कैंसर किसी भी महिला के लिए मुश्किल समय हो सकता है और खासतौर पर जो महिलाएं भविष्य में मां बनना चाहती हैं। सर्वाइकल कैंसर के इलाज में महिलाओं को सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन से गुजरना पड़ता है, इससे फर्टिलिटी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में महिलाओं के दिमाग में एक ही सवाल उठता है कि क्या कैंसर का इलाज फर्टिलिटी की क्षमता पर असर डाल सकता है? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से बात की।
उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का इलाज प्रजनन क्षमता पर कितना असर डालेगा, यह कैंसर की स्टेज, ट्यूमर के आकार और जगह, महिला की उम्र, अंडाशयों की स्थिति और किस तरह का इलाज किया जा रहा है, इन सभी बातों पर निर्भर करता है।
सर्वाइकल कैंसर की सर्जरी का फर्टिलिटी पर असर
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि हर सर्वाइकल कैंसर में गर्भाशय निकालना जरूरी नहीं होता। बीमारी की शुरुआती स्टेज में कुछ महिलाओं की सर्जरी के समय गर्भाशय को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है। इसमें कोनाइजेशन में सर्विक्स के प्रभावित हिस्से को हटाया जाता है, लेकिन गर्भाशय को बचाकर रखा जाता है।
National Cancer Institute के अनुसार, शुरुआती स्टेज के कुछ मामलों में फर्टिलिटी को बचाने के लिए सर्वाइकल कोनाइजेशन या रेडिकल ट्रेकेलेक्टोमी थेरेपी के बारे में सोचा जा सकता है। इससे प्रेग्नेंसी की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, कुछ मामलों में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के रिस्क भी बढ़ सकते हैं।
अगर गर्भाशय निकालना पड़े, तो फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ सकता है?
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने कहा, “अगर सर्वाइकल कैंसर के इलाज के दौरान हिस्टेरेक्टॉमी यानी गर्भाशय को निकालना जरूरी हो, तो महिला खुद गर्भधारण नहीं कर सकती। ऐसे मामले में भले ही ओवरीज सुरक्षित हो, लेकिन गर्भाशय न होने के कारण प्रेग्नेंसी नहीं हो सकती। कुछ मामलों में ओवरीज को भी निकाल दिया जाता है, तो महिला को समय से पहले मेनोपॉज का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में इलाज से पहले महिला को डॉक्टर से अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर बात करनी चाहिए।”
cervical cancer and fertility connection
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रेडिएशन थेरेपी में फर्टिलिटी पर असर
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के इलाज में कुछ महिलाओं को पेल्विक रेडिएशन थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। रेडिएशन अंडाशयों में मौजूद एग्ज को नुकसान पहुंचा सकता है। इसका असर ओवेरियन रिजर्व पर पड़ सकता है। रेडिएशन का असर सिर्फ ओवरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गर्भाशय के टिश्यू और ब्लड सप्लाई को भी प्रभावित कर सकता है। इससे भविष्य में प्रेग्नेंसी पर असर पड़ सकता है।
American Society for Reproductive Medicine के मुताबिक, पेल्विक रेडिएशन थेरेपी के कारण गर्भाशय के फंक्शन पर असर डाल सकता है। इसकी वजह से महिलाओं को बांझपन की समस्या भी आ सकती है। अगर महिलाओं को पेल्विक रेडिएशन की जरूरत होती है, तो उनका ओवेरियन ट्रांसपोजिशन किया जा सकता है। इसमें सर्जरी से अंडाशयों को रेडिएशन के प्रभाव से दूर रखा जाता है। हालांकि, इस सर्जरी के बाद महिलाओं को IVF प्रक्रिया के दौरान मुश्किलें आ सकती है।
कीमोथेरेपी का फर्टिलिटी पर असर
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने कहा कि कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं अंडाशयों में मौजूद एग्ज को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी दवा दी जा रही है, उसकी डोज कितनी है, कितने समय तक इलाज चलेगा और महिला की उम्र कितनी है। कुछ महिलाओं में इलाज के बाद पीरियड्स दोबारा शुरू हो सकते हैं, जबकि कुछ में ओवेरियन फंक्शन काफी कम हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह
Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, “कुछ महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले एग फ्रीजिंग के बारे में डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। कुछ कंडीशन्स में ओवेरियन टिश्यू क्राइयोप्रिजर्वेशन की भी सलाह दी जा सकती है। इसमें ओवरी के टिश्यू निकालकर सुरक्षित तरीके से फ्रीज किए जाते हैं। इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि फर्टिलिटी बचाने के लिए कैंसर के इलाज में देरी नहीं की जा सकती।”
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निष्कर्ष
Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि अगर महिला को सर्वाइकल कैंसर युवा अवस्था में हुआ है और वह भविष्य में प्रेग्नेंसी चाहती है, तो कैंसर का इलाज शुरू करने से पहले फर्टिलिटी को बचाने पर बात करनी चाहिए, लेकिन सबसे जरूरी होता है कि कैंसर का प्रभावी तरीके से इलाज किया जा सके, ताकि भविष्य में कैंसर के रिस्क को कम से कम किया जा सके।
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FAQ
सर्वाइकल कैंसर के इलाज के कितने समय बाद गर्भधारण की योजना बनाई जा सकती है?
कैंसर का सफल इलाज पूरा होने के बाद डॉक्टर कम से कम 6 महीने से लेकर एक साल तक इंतजार करने की सलाह देते हैं। इससे शरीर को पूरी तरह रिकवर होने और कैंसर के दोबारा लौटने के खतरे को जांचने का समय मिलता है।अगर कोई महिला कैंसर के इलाज से पहले एग फ्रीज न करा पाए तो क्या कोई अन्य विकल्प बचता है?
अगर इलाज शुरू होने से पहले फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन नहीं हो पाता और रेडिएशन या कीमोथेरेपी से ओवरीज डैमेज हो जाती हैं, तो मरीज के पास भविष्य में डोनर एग की मदद से सरोगसी या गोद लेने का विकल्प मौजूद रहता है।
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Aug 25, 2026 18:34 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra
