Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Mandeep Singh Malhotra , Surgical & Molecular Oncologist | Founder & Chief Mentor – Art of Healing Cancer

क्या सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद प्रेग्नेंसी संभव है? डॉक्टर ने बताई 5 जरूरी बातें

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद महिलाओं को लगता है कि वह अब कभी मां नहीं बन पाएंगी, लेकिन कैंसर के इलाज से पहले अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो इलाज के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना हो सकती है। इस लेख में डॉक्टर ने सर्वाइकल कैंसर का इलाज करा रही महिलाओं को कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देने की सलाह दी है।  

इस पेज पर:-


सर्वाइकल कैंसर महिलाओं को होने वाला सबसे आम कैंसर है, लेकिन इस कैंसर की सबसे अच्छी बात यह है कि अगर इसकी समय पर पहचान हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना काफी हद तक बढ़ सकती है। इलाज के बाद ठीक होने पर महिलाओं को अक्सर इस बात की टेंशन रहती है कि वह भविष्य में मां बन पाएंगी या नहीं, क्योंकि सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होता है, जो यूटरस के बिल्कुल नीचे होता है और वजाइना से जुड़ा होता है। यह कैंसर रिप्रोडेक्टिव सिस्टम से जुड़ा है, इसलिए यह सवाल उठना लाजिमी है। इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने Dr. Mandeep Singh Malhotra, Oncologist, Art of Healing Cancer, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि यह हर महिला के लिए अलग हो सकता है। फर्टिलिटी पर पड़ने वाला असर कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कैंसर किस स्टेज में है, ट्यूमर का आकार कितना है, महिला की उम्र क्या है, इलाज का कौन-सा तरीका अपनाया जा रहा है और इलाज शुरू होने से पहले ओवरीज की कंडीशन कैसी है।

सर्वाइकल कैंसर के इलाज के बाद किन महिलाओं की फर्टिलिटी बचाई जा सकती है?

Cancers में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 40 साल से कम है, उनका कैंसर ठीक करने के साथ-साथ यूटरस और ओवरीज को सुरक्षित रखना संभव हो गया है। इसलिए जिन महिलाओं का कैंसर FIGO स्टेज IA1, IA2, या IB1 है, तो फर्टिलिटी बचाई जा सकती है। इसका मतलब है कि ट्यूमर का आकार 2 सेटीमीटर या इससे छोटा है और कैंसर लिम्फ नोड्स में न फैला हो।

सर्वाइकल कैंसर का इलाज कराने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, “सर्वाइकल कैंसर में फर्टिलिटी सुरक्षित रखना इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि कैंसर किस स्टेज पर है और कौन से प्रकार है। इसलिए जब भी कम उम्र की महिला का सर्वाइकल कैंसर का इलाज होता है, तो परिवार से प्रेग्नेंसी से जुड़ी जानकारी दी जाती है। महिलाओं को इलाज शुरू कराने से पहले इन खास बातों का ध्यान रख सकती है।”

pregnancy after cervical cancer

यह भी पढ़ें- सर्वाइकल कैंसर के 10 शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज, समय पर पहचान बचा सकती है जान

सर्जरी कौन सी की जा रही है?

Dr. Mandeep Singh Malhotra के मुताबिक, “सर्जरी को लेकर मरीज डॉक्टर से जानकारी ले सकते हैं, कि कौन सी सर्जरी की जा रही है। आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर में ये तीन सर्जरी की जा सकती है।”

कोनाइजेशन सर्जरी - अगर कैंसर बहुत ही शुरुआती स्टेज पर होता है और सर्विक्स के छोटे से हिस्से में ही सीमित है, तो इस सर्जरी को किया जाता है। इसमें एनेस्थीसिया देने के बाद सर्विक्स के कोन शेप (cone shape) हिस्से को निकाल दिया जाता है। इसमें कैंसर प्रभावित टिश्यू और उसके आसपास का थोड़ा स्वस्थ टिश्यू शामिल होता है, ताकि कोई कैंसर सेल बाकी न रहे। मरीज आमतौर पर उसी दिन घर जा सकते हैं। इस सर्जरी के बाद आमतौर पर महिला को करीब एक साल बाद प्रेग्नेंसी की सलाह दी जा सकती है।

ट्रैकलेक्टॉमी - Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, "अगर कैंसर के शुरुआती स्टेज में ट्यूमर छोटा है, तो सर्विक्स का एक बड़ा हिस्सा या पूरा सर्विक्स निकाला जा सकता है। इसमें सर्विक्स के साथ-साथ आसपास के टिश्यू, योनि का ऊपरी हिस्सा और पास के लिम्फ नोड्स भी निकाले जाते हैं। इस सर्जरी के करीब एक साल तक गर्भधारण न करने की सलाह दी जाती है। इसमें यूटरस सुरक्षित रहता है, लेकिन सर्विक्स न होने के कारण यह हाई रिस्क प्रेग्नेंसी हो सकती है। इसमें महिलाओं को मिसकैरेज, समय से पहले डिलीवरी का खतरा सामान्य महिलाओं के मुकाबले ज्यादा हो सकता है। इसलिए इस प्रेग्नेंसी में महिलाओं को डॉक्टर से रेगुलर फॉलो-अप लेते रहना चाहिए।”

हिस्टेरेक्टॉमी - अगर कैंसर सर्विक्स के साथ-साथ यूटरस तक फैल गया है, तो गर्भाशय को निकालने की सलाह दी जा सकती है। ऐसी कंडीशन में महिला खुद प्रेग्नेंट नहीं हो सकती, क्योंकि प्रेग्नेंसी के लिए यूटरस होना जरूरी है। हालांकि, कुछ मामलों में ओवरीज सुरक्षित रहते हैं और उनमें अंडे बनते रहते हैं, लेकिन गर्भाशय न होने के कारण प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंसी संभव नहीं होती। अगर इलाज के दौरान ओवरीज भी निकालने पड़ें, तो एग्स नहीं बनते और इस वजह से महिला को समय से पहले मेनोपॉज यानी प्रिमैच्योर मेनोपॉज हो सकता है।

रेडिएशन थेरेपी का फर्टिलिटी पर असर

Cancers के इस जर्नल में बताया गया है कि अगर महिला को रेडिएशन थेरेपी देने की जरूरत पड़ती है, तो इससे ओवरीज खराब हो सकते हैं और महिला कम उम्र में मेनोपॉज की शिकार हो सकती है। इसलिए सर्जरी के जरिए ओवरीज को रेडिएशन वाले हिस्से से दूर पेट के ऊपरी हिस्से में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इससे 60 से 90 फीसदी मामलों में महिलाओं के हार्मोनल फंक्शन और ओवरीज सुरक्षित रहती है। हालांकि, ओवरीज के ट्रांसफर के कारण प्राकृतिक तरीके से प्रेग्नेंसी की संभावना कम होती है, लेकिन IVF के जरिए प्रेग्नेंसी की जा सकती है।

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि रेडिएशन थेरेपी के कारण ओवरीज में मौजूद एग्स की संख्या कम हो सकती है, क्वालिटी कम हो सकती है, समय से पहले ओवरी फेलियर और यूटरस की अंदरूनी परत और ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इन बदलावों के कारण भविष्य में प्रेग्नेंसी की संभावना थोड़ी मुश्किल हो सकती है।

कीमोथेरेपी से फर्टिलिटी पर असर

Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, “कुछ मामलों में कीमोथेरेपी भी ओवरीज पर असर डाल सकती है। हालांकि, सभी दवाओं का असर एक जैसा नहीं होता, इसलिए मरीज को कौन सी दवा दी जा रही है, उसकी डोज कितनी है, इलाज कितने समय तक चलेगा और महिला की उम्र क्या है, इस पर काफी हद तक निर्भर करती है। कम उम्र की महिलाओं में कई बार इलाज के बाद ओवरीज दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगती हैं, जबकि ज्यादा उम्र में यह संभावना कम हो सकती है।”

इलाज से पहले फर्टिलिटी बचाने के तरीकों की जानकारी लेना

Dr. Mandeep Singh Malhotra ने बताया कि अगर कोई महिला कम उम्र की है, तो उन्हें इलाज से पहले डॉक्टर के साथ एग्स फ्रीजिंग से जुड़े मद्दों पर बात करनी चाहिए। इसमें एग फ्रीजिंग, एम्ब्रियो फ्रीजिंग, ओवेरियन टिश्यू फ्रीजिंग और ओवेरियन ट्रांसपोजिशन शामिल है। हालांकि, हर ऑप्शन हर मरीज के लिए सही नहीं होता और साथ ही कैंसर के इलाज में बिना वजह देरी भी नहीं की जा सकती। इसलिए सही फैसला डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लिया जाता है।

इलाज शुरू होने से पहले फर्टिलिटी से जुड़े सवालों की जानकारी लेना

Dr. Mandeep Singh Malhotra कहते हैं, “आमतौर पर कम उम्र में सर्वाइकल कैंसर का जानने के बाद महिलाएं प्रेग्नेंसी से जुड़े मद्दों पर बात ही नहीं करती, लेकिन फर्टिलिटी से जुड़े मद्दों पर चर्चा इलाज पूरा होने के बाद नहीं, बल्कि इलाज शुरू होने से पहले करनी चाहिए। अगर महिला को भविष्य में मां बनना है, तो उन्हें अपने ऑन्कोलॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी विशेषज्ञ से इस बारे में विस्तार से बात करनी चाहिए। इससे बीमारी के अनुसार ऐसा इलाज चुनने में मदद मिल सकती है और फर्टिलिटी को सुरक्षित रखना आसान हो जाता है।”

निष्कर्ष
सर्वाइकल कैंसर का इलाज हर महिला की फर्टिलिटी को एक ही तरह से प्रभावित नहीं करता, क्योंकि इसमें कैंसर की स्टेज, इलाज के प्रकार, महिला की उम्र और ओवरीज की कंडीशन पर निर्भर करता है। अगर सर्वाइकल कैंसर शुरुआती स्टेज में है, तो फर्टिलिटी बचाने के इलाज संभव होते हैं, लेकिन एडवांस स्टेज पर इलाज कराने के बाद प्रेग्नेंसी की संभावना काफी कम हो सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि महिला को इलाज शुरू होने से पहले डॉक्टर से अपनी फर्टिलिटी की बात करनी चाहिए।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या कैंसर के इलाज के बाद जन्मे बच्चों में भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है?

    सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से बाहरी संक्रमण से होता है, न कि जेनेटिक कारणों से। इसलिए मां के इलाज के बाद जन्मे बच्चे में इस कैंसर का कोई जेनेटिक रिस्क ट्रांसफर नहीं होता।
  • सर्वाइकल कैंसर के बाद प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले कौन-से टेस्ट कराना अनिवार्य है?

    प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले PET-CT स्कैन / MRI, पैप स्मीयर / HPV टेस्ट, और ओवेरियन रिजर्व टेस्ट कराना बहुत जरूरी है।

Read Next

शरीर में कोर्टिसोल का लेवल कितना होना चाहिए? डॉक्टर से जानें ज्यादा होने के क्या हैं नुकसान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 24, 2026 20:46 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Mandeep Singh Malhotra

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content