जब भी व्यक्ति को बेचैनी या सीने में दर्द होने लगता है, तो आसपास के लोग हार्ट की पंपिंग बढ़ाने के लिए तुरंत बिना सोचे-समझे CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर देते हैं। CPR से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल होती है कि हार्ट अटैक या बेहोश होने पर मरीज को तुरंत CPR देकर जान बचाई जा सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में हार्ट अटैक आने पर CPR दी जा सकती है? इस बारे में हमने Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की। उन्होंने कहा कि हर किसी को CPR देना सही नहीं है। अगर मरीज की धड़कन चल रही होती है, तो उसे CPR फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान दे सकती है।
क्या हार्ट अटैक में CPR देना जरूरी है?
Dr. Deebanshu Gupta कहते हैं, “असल में हर हार्ट अटैक में CPR की जरूरत नहीं होती। अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि ये दोनों कंडीशन्स अलग-अलग होती हैं। हार्ट अटैक में हार्ट तक खून पहुंचाने वाली किसी धमनी में ब्लॉकेज हो सकता है। इस वजह से हार्ट की मांसपेशियों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। वहीं कार्डियक अरेस्ट में हार्ट अचानक ही धड़कना बंद कर देता है। मरीज कुछ ही सेकेंड में बेहोश हो जाता है और उसकी सांस रुक जाती है। ऐसे में मरीज के दिल को वापस फंक्शन करने के लिए CPR दी जा सकती है, जबकि हार्ट अटैक में धड़कन चल रही होती है, ऐसे में सीने पर लगातार दबाव डालने से पसलियों में चोट, दर्द या अन्य शारीरिक नुकसान हो सकता है।”
American Heart Association के अनुसार, हर हार्ट अटैक कई बार कार्डियक अरेस्ट में बदल सकता है, लेकिन हर बार ऐसा हो, ये जरूरी नहीं है। इसलिए हार्ट अटैक आने पर सबसे जरूरी है कि मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाए, ताकि मरीज की बंद धमनियों को समय रहते खोला जा सके।

यह भी पढ़ें- क्या स्टेंट लगने के बाद (एंजियोप्लास्टी) हार्ट अटैक आ सकता है? क्या कहती है रिसर्च और डॉक्टर की राय
हार्ट अटैक के मरीज को गलती से CPR दे दिया जाए तो क्या होगा?
Resuscitation Plus में प्रकाशित 2024 के सिस्टेमैटिक रिव्यू में बताया गया है कि लोग इस बात से डर जाते हैं कि CPR देने से डरते हैं कि कहीं इस वजह से चोट न लग जाए। इस स्टडी में दुनिया भर के पांच अलग-अलग अध्ययनों को शामिल किया गया है, जिसमें करीब 1031 मरीजों के डेटा की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि CPR देने से किसी की मौत नहीं हुई, हालांकि, 61 मरीजों की मौत अस्पताल में उनकी पहले से मौजूद गंभीर बीमारियों के कारण हुई थी। CPR देने के कारण सिर्फ एक प्रतिशत मरीजों की पसलियां टूटने, हंसली की हड्डी टूटने या मामूली अंदरूनी ब्लीडिंग हुई थी। इससे स्टडी से पता चलता छाती को तेजी से दबाने के कारण 30 से 45% मामलों में पसलियां टूटती हैं, लेकिन ऐसे में जान बचाना पहली प्राथमिकता होती है।
क्या कफ CPR से फायदा होता है?
Dr. Deebanshu Gupta का कहना है, “मेरे पास कई मरीज आते हैं, जो बताते हैं कि हार्ट अटैक आने पर जोर-जोर से खांसने लगे थे। इसे आमतौर पर कफ CPR कहा जाता है, लेकिन यह तरीका बहुत सफल नहीं होता, क्योंकि कुछ खास कंडीशन में जब अस्पताल की कार्डियक कैथ लैब में जब मरीज लगातार मॉनिटरिंग में होता है और अचानक दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है, तब डॉक्टर कुछ सेकेंड के लिए मरीज को खांसने के लिए कह सकते हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ अस्पताल में मेडिकल टीम की निगरानी में किया जा सकता है। घर, ऑफिस या सड़क पर हार्ट अटैक होने पर खांसते रहने से न तो हार्ट दोबारा सामान्य हो जाता है और न ही इलाज की जरूरत खत्म होती है।”
यह भी पढ़ें- क्या फिट लोगों को भी हार्ट अटैक आ सकता है? डॉक्टर से जानें इसके कारण
CPR कब देना चाहिए?
Dr. Deebanshu Gupta के मुताबिक, “CPR तब देना चाहिए, जब व्यक्ति बेहोश हो जाए, सांस बिल्कुल बंद हो जाए या सिर्फ हांफने जैसी सांस आ रही हो। इसके अलावा, अगर मरीज की नाड़ी या दिल की धड़कन महसूस न हो, तो इस कंडीशन में CPR देने के साथ तुरंत मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए, ताकि उसका समय पर इलाज हो सके।”
निष्कर्ष
Dr. Deebanshu Gupta सलाह देते हैं कि अगर किसी को सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो, दर्द कंधे, हाथ, जबड़े या पीठ तक फैल रहा हो, सांस लेने में दिक्कत हो, ठंडा पसीना आ रहा हो या मतली महसूस हो रही हो, तो इसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर मरीज होश में है, सांस ले रहा है और सिर्फ हार्ट अटैक के लक्षण हैं, तो CPR देने के बजाय उसे बिना देर किए अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
FAQ
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में सीपीआर देने में एक-एक मिनट की देरी क्यों भारी पड़ती है?
जैसे ही दिल धड़कना बंद करता है, दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, दिल बंद होने के बाद शुरुआती तीन से चार मिनट के भीतर अगर सीपीआर न मिले, तो दिमाग की कोशिकाएं हमेशा के लिए मर जाती हैं और मरीज को बचाना नामुमकिन हो जाता है।अस्पताल के बाहर सीपीआर देते समय AED मशीन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?
अगर एयरपोर्ट, मॉल या मेट्रो स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) मशीन उपलब्ध हो, तो उसे तुरंत मंगाएं। यह एक पोर्टेबल मशीन है जो मरीज की छाती पर पैड लगाते ही खुद बताती है कि मरीज को बिजली का झटका देना है या नहीं। यह मशीन सीपीआर के साथ मिलकर मरीज के बचने की संभावना को 80% तक बढ़ा देती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 02, 2026 17:41 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 02, 2026 17:41 IST
Modified By : Aneesh RawatJul 02, 2026 17:41 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta