Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

पहले, दूसरे और तीसरे हार्ट अटैक के बाद कितने साल जी सकते हैं? डॉक्टर से जानें

पहली बार हार्ट अटैक आने के बाद मरीज अपनी दवाएं रेगुलर लेते हैं, लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करते हैं। अगर मरीज को दूसरी या तीसरी बार भी हार्ट अटैक आता है, तो मरीज की उम्र कितनी लंबी हो सकती है? इस बारे में डॉक्टर ने विस्तार से लेख में बताया है और साथ ही बचाव के उपाय भी दिए हैं।

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जब हार्ट की मांसपेशियों को ब्लड पहुंचाने वाली कोरोनरी आर्टरीज में रुकावट होती है, तो हार्ट अटैक आ सकता है। दरअसल, LDL कोलेस्ट्रॉल आर्टरीज की अंदरूनी परत में जमा होने लगता है, जिसे प्लाक कहा जाता है। जो लोग एक्सरसाइज कम करते हैं और जंक फूड बहुत ज्यादा खाते हैं, उनमें LDL का लेवल बढ़ने लगता है। लगातार बढ़ते कोलेस्ट्रॉल के कारण खून के थक्के जमने लगते हैं, जिसके कारण आर्टरी अचानक पूरी तरह से ब्लॉक हो जाती है। इस वजह से हार्ट अटैक आ सकता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि हार्ट अटैक आने के बाद उम्र कम हो सकती है और अगर दोबारा आ जाए, तो बचना ही मुश्किल है। हार्ट अटैक के कारण मरीज की जिंदगी कितनी कम हो सकती है? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।

पहले हार्ट अटैक के बाद मरीज के जीवन की संभावना

American Heart Association के अनुसार, पहले हार्ट अटैक के बाद 90 दिनों का समय बहुत नाजुक होता है, क्योंकि इस दौरान दूसरी बार हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ सकती है। आमतौर पर 25% से ज्यादा मरीज अस्पताल से छुट्टी मिलने के 90 दिनों के भीतर दोबारा भर्ती हो जाते हैं। Journal of the American Heart Association के अनुसार, जिन मरीजों की एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी हुई थी, उनमें आठ साल की मृत्यु दर लगभग 46% से 49% के बीच रही। जो मरीज हार्ट अटैक के बाद पहले साल जीवित रहे, उनमें बहुत ज्यादा रिस्क वाले मरीजों में भी अगले आठ साल में मृत्यु की संभावना 59% थी। इस बारे में डॉ. दिबांशु कहते हैं, “हार्ट अटैक आने का सबसे प्रमुख कारण कोरोनरी हार्ट डिजीज है और जब पहली बार हार्ट अटैक आता है, तो हम सबसे पहले कोशिश करते हैं कि दोबारा हार्ट अटैक का जोखिम कम किया जा सके। इसके लिए मरीजों को लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। साथ ही दवाओं के जरिए कोलेस्ट्रॉल को कम करने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा, मरीज को धीरे-धीरे सामान्य एक्टिविटीज फिर से शुरू करने के लिए कहा जाता है।"

life expectancy after heart attack by dr deebanshu

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दूसरी बार हार्ट अटैक किन लोगों को आ सकता है?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “जब मरीज को पहली बार हार्ट अटैक आता है, तो उन्हें खुद का बहुत ध्यान रखना चाहिए। जो मरीज अपनी डाइट और लाइफस्टाइल का ध्यान नहीं रखते, उन्हें हार्ट अटैक आने का रिस्क काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा, कई कारण दोबारा हार्ट अटैक आने के कारण बन सकते हैं।”

  1. जिन लोगों की उम्र 45 साल से ज्यादा है, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो सकता है।
  2. महिलाओं को मेनोपॉज होने के बाद हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है।
  3. जो लोग हार्ट अटैक आने के बाद भी स्मोकिंग नहीं छोड़ते, उन्हें दोबारा हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
  4. अगर मरीज हाई बीपी को कंट्रोल नहीं कर पाता और इसके साथ अगर मोटापा, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल हो, तो हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना तक बढ़ सकता है।
  5. अगर मरीज में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का लेवल बढ़ा है, तो हार्ट के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है।
  6. पहले हार्ट अटैक के बाद अगर मरीज वजन नियंत्रित नहीं कर पाता, तो उसे हाई बीपी, डायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल का रिस्क बना रह सकता है।
  7. हार्ट अटैक के बाद जो लोग नियमित कसरत नहीं करते, उनके हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है।
  8. पहले हार्ट अटैक के बाद अगर मरीज चीनी, एनिमल फैट, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, ट्रांस फैट और ज्यादा नमक खाना नहीं छोड़ते, तो उनमें हार्ट अटैक का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है।
  9. पहले हार्ट अटैक के बाद स्ट्रेस को मैनेज करना जरूरी है। जो लोग लगातार स्ट्रेस में रहते हैं, उन्हें दोबारा हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।

दूसरे हार्ट अटैक के बाद मरीज के जीने की संभावना

Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक, 2006 से लेकर 2017 तक 520 ऐसे लोगों पर स्टडी की गई, जिन्हें पहले एक बार कार्डियोवैस्कुलर इवेंट हो चुका था। इसमें पाया गया कि लगभग 46 फीसदी मरीजों को किसी न किसी प्रकार दोबारा हार्ट अटैक देखा गया। Journal of the American Heart Association ने स्टडी की, जिसमें 2010 से 2017 के बीच क्लीवलैंड क्लिनिक में हार्ट अटैक के कारण भर्ती हुए 6,626 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया है कि जिन लोगों को 90 दिनों के भीतर दूसरा हार्ट अटैक आया, उनमें से करीब 50 फीसदी मरीजों की मृत्यु अगले पांच सालों के अंदर हो गई।

इस बारे में डॉ. दिबांशु कहते हैं, "दोबारा हार्ट अटैक आना मरीज के लिए काफी घातक हो सकता है। दूसरी बार अटैक से हार्ट की मांसपेशियां इतनी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं कि मरीज के लिए लंबे समय तक सर्वाइव करना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण हम दूसरी बार अटैक आने वाले मरीजों को दवाओं और खानपान को लेकर काफी ज्यादा सख्त होते हैं।"

तीसरा हार्ट अटैक किन लोगों को आ सकता है?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “जो कारण पहले हार्ट अटैक आने के होते हैं, वही कारण दूसरे हार्ट अटैक के बाद भी हो सकते हैं। इसमें उम्र बढ़ना, डायबिटीज और मोटापा जैसे कारक तीसरी बार हार्ट अटैक होने का कारण बन सकते हैं। मरीज को मोटापे और हाई बीपी कंट्रोल करने की सख्ती से हिदायत दी जाती है। उनके खानपान से लेकर एक्सरसाइज तक सभी का पालन सख्ती से करने की सलाह दी जाती है।”

तीसरे हार्ट अटैक के बाद बचने की संभावना

डॉ. दिबांशु कहते हैं, “तीसरा हार्ट अटैक आना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो मरीज की जान भी जा सकती है। तीसरी बार हार्ट अटैक आने का मतलब है कि मरीज के हार्ट की मांसपेशियां काफी ज्यादा कमजोर हो गई हैं और उनमें ब्लॉकेज खत्म करना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर मरीज बुजुर्ग है, तो तीसरे हार्ट अटैक में डॉक्टर को काफी मुश्किल हो सकती है।”

उम्र के हिसाब से हार्ट अटैक आने पर जीवन की संभावना

डॉ. दिबांशु ने कहा, “हार्ट अटैक आने के बाद मरीज के जीवन की संभावना उसकी उम्र, मेडिकल कंडीशन, इलाज और रिकवरी पर निर्भर करती है।” American Heart Association 2017 में प्रकाशित स्टडी में 3,22,523 रोगियों पर स्टडी की गई। इसमें MINOCA (Myocardial Infarction with Non-Obstructive Coronary Arteries) और MI-CAD (Myocardial Infarction with Coronary Artery Disease) के रोगियों को शामिल किया गया। जब एंजियोग्राफी में मुख्य आर्टरी में 50 फीसदी से कम रुकावट हो और फिर भी रोगी को हार्ट अटैक आ जाए, तो इसे MINOCA कहा जाता है। MI-CAD में फैट और कोलेस्ट्रॉल जब 50 फीसदी से ज्यादा तंग हो जाता है। इस वजह से ब्लड फ्लो रुक जाता है और हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है। इस स्टडी में 5.9% मामलों में MINOCA पाया गया और यह महिलाओं और युवाओं में ज्यादा था।

साल

MI-CAD

MINOCA

50 साल से कम

17.50%

25.30%

50 - 59 साल

27.10%

24.30%

60 - 69 साल

26.30%

23.00%

70 - 79 साल

17.60%

17.30%

80 साल से ज्यादा 

11.50%

10.10%

50 साल के लोगों में - 50 साल से कम उम्र के मरीजों में MINOCA का 25.3% और MI-CAD 17.5% था। इसका मतलब है कि युवाओं में बिना किसी बड़ी रुकावट के हार्ट अटैक आने की संभावना अधिक होती है।

60 साल के लोगों में - 50 से 60 की उम्र में MI-CAD के मामले 27% से ज्यादा थे और MINOCA के मामले 50 साल की उम्र के लोगों से कम पाए गए थे। करीब 24.3% मामलों में MINOCA पाया गया था।

70 साल के लोगों में - जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, MI-CAD के मामले ज्यादा दिखाई देते हैं। 60 साल की उम्र के बाद MI-CAD मरीजों की संख्या ज्यादा थी।

80 साल के लोगों में - इस उम्र के MI-CAD के मरीजों में 17.6% मामले पाए गए और कुछ इतने ही फीसदी MINOCA के थे।

90 साल के लोगों में - 80 के पार मरीजों में MI-CAD 11.5% और 10.1% में MINOCA के मामले पाए गए थे।

life expectancy after heart attack by dr deebanshu

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रिकवरी के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हार्ट अटैक के बाद रिकवरी में दो हफ्ते से लेकर तीन महीने तक का समय लग सकता है। रिकवरी मरीज के कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें हार्ट अटैक कितना गंभीर था, इलाज कितनी जल्दी मिला, इलाज का क्या तरीका था और मरीज को कौन-कौन सी बीमारियां हैं, जैसे कारक शामिल हैं। इसके अलावा, मरीज को समय पर दवा लेना बहुत जरूरी है और दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के लेना बंद न करें।”
Cleveland Clinic में बताया गया है कि मरीजों को रिकवरी के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि रिकवरी जल्द से जल्द हो सके।

  1. हार्ट अटैक आने के बाद पहले हफ्ते में मरीज हल्के काम जैसे खाना बनाना या घर की डस्टिंग कर सकते हैं। सीढ़ियों पर चढ़ने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  2. पहले हफ्ते किसी भी तरह का भारी सामान नहीं उठाना चाहिए।
  3. इसके बाद मरीज को कसरत पर भी ध्यान देना चाहिए। मेडिकल एक्सपर्ट की निगरानी में एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए ताकि हार्ट की मांसपेशियां मजबूत हों।
  4. रिकवरी के दौरान मरीज को हेल्दी डाइट लेनी चाहिए। इसमें फल, सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज, ऑलिव ऑयल, एवोकैडो, नट्स, मछली और अंडे खाने चाहिए।
  5. रिकवरी के दौरान मरीज को रोजाना हल्की वॉक करनी चाहिए ताकि धीरे-धीरे एक्टिव हो सके।
  6. मरीज को अपनी नींद पर भी खास ध्यान देना चाहिए।

हार्ट अटैक के बाद कब सेक्शुअल लाइफ शुरू की जा सकती है?

Cleveland Clinic के अनुसार, अगर मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी हुई है, तो ब्रेस्ट बोन को ठीक होने में चार से छह हफ्ते लगते हैं। अगर सर्जरी नहीं हुई है, तो दो से चार हफ्ते में यौन संबंध बनाए जा सकते हैं। अगर दवाओं की वजह से कोई भी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

हार्ट अटैक से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Cleveland Clinic के मुताबिक, लोगों को हार्ट अटैक से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव जरूर करने चाहिए।

  1. पेट के आसपास के फैट को कम करने की कोशिश करें, क्योंकि ज्यादा वजन आर्टरी में प्लाक का संकेत हो सकता है।
  2. खाने में सैचुरेटेड फैट, चीनी और सोडियम वाली चीजें कम से कम लें। इसकी बजाय मौसमी फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट जैसे मछली, नट्स और सीड्स लें।
  3. रोजाना एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मॉडरेट कसरत जरूर करें। इससे हार्ट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  4. ब्लड प्रेशर रेगुलर चेक कराएं। 
  5. हार्ट के मरीजों को कोलेस्ट्रॉल का चेकअप डॉक्टर की सलाह के अनुसार कराना चाहिए।
  6. डायबिटीज से हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए 35 साल के बाद डायबिटीज की जांच रेगुलर कराएं।
  7. स्मोकिंग करना तुरंत छोड़ना चाहिए, क्योंकि सिगरेट का धुआं आर्टरी को सख्त कर देता है।
  8. वेपिंग और ई-सिगरेट भी हार्ट के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
  9. शराब का नियमित सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शराब न पीने की सलाह दी जाती है।
  10. स्ट्रेस को मैनेज करना बहुत जरूरी है। इसके लिए योग या मेडिटेशन जरूर करें।
  11. रोजाना कम से कम सात से नौ घंटे की नींद जरूर लें और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें।

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डॉक्टर से कब मिलें?

हार्ट अटैक के बाद रिकवरी के दौरान अगर ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

  1. सीने में भारीपन या बेचैनी महसूस होना
  2. सांस फूलने लगे, खासतौर पर चलते समय या लेटने पर
  3. बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी महसूस होना
  4. हार्ट बीट का अचानक तेज होना
  5. जबड़े, गर्दन, पीठ या बाएं हाथ में दर्द का फैलना

निष्कर्ष

हार्ट अटैक आने के बाद मरीज को रिकवरी पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है ताकि दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सके। इसके लिए समय पर इलाज, दवाओं का रेगुलर सेवन, खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत जरूरी है। अगर मरीज की उम्र 50 साल के पार है, तो उन्हें अपने लाइफस्टाइल में सख्ती से बदलाव करने की जरूरत है। हार्ट अटैक से बचाव के लिए लोगों को स्मोकिंग और शराब से दूर रहना चाहिए। अगर किसी को हार्ट से जुड़े किसी भी तरह के लक्षण महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

FAQ

  • क्या हार्ट अटैक के बाद जिम जा सकते हैं?

    हार्ट अटैक के बाद रिकवरी के दौरान मरीज को मेडिकल एक्सपर्ट की देखभाल में ही एक्सरसाइज करनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर ही जिम जाना चाहिए क्योंकि डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन देखकर ही सलाह दे सकते हैं।
  • हार्ट अटैक में 'गोल्डन ऑवर' क्या है?

    हार्ट अटैक आने के शुरुआती 60 मिनट 'गोल्डन ऑवर' कहलाते हैं। यदि इस दौरान इलाज मिल जाए, तो दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है।
  • क्या हार्ट अटैक के बाद खून पतला करने की दवा जीवनभर लेनी पड़ती है?

    आमतौर पर स्टेंट लगने के बाद या हार्ट अटैक के बाद कम से कम एक साल तक 'डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी' दी जा सकती है। मरीज की रिकवरी और मेडिकल कंडीशन को देखते हुए डॉक्टर दवाओं में बदलाव करते हैं ताकि भविष्य में थक्के न बनें। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा कभी बंद न करें।
  • उम्र बढ़ने के साथ हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

    जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आर्टरी प्राकृतिक रूप से सख्त और संकरी होने लगती हैं, इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। इसके अलावा, उम्र के साथ बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं, जो हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा सकती हैं।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 21, 2026 13:27 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Apr 21, 2026 13:27 IST

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    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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