Fri Sep 11, 2026 | 06:50 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

हार्ट अटैक और हार्ट फेल में क्या अंतर होता है? खुद डॉक्टर से समझें

Difference Between Heart Attack and Heart Failure: हार्ट अटैक और हार्ट फेल में काफी अंतर है लेकिन दोनों को लोग एक जैसा समझते हैं। आइए, जानते हैं हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में क्या अंतर है और इनके लक्षणों को कैसे समझें।

Difference Between Heart Attack and Heart Failure: दिल हमारे शरीर के कुछ सबसे जरूरी हिस्सों में से एक है। इसका हेल्दी होना हमारे पूरे शरीर को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है और इससे जुड़ी कोई भी गड़बड़ी हुई तो आप बीमार पड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में जरूरी ये है कि आप अपने दिल की सेहत पर खास ध्यान दें और समय रहते इनके लक्षणों की पहचान करें और इससे अपना बचाव करें। इसलिए आज हम जानेंगे हार्ट अटैक और हार्ट फेल में अंतर के बारे में। एक जैसी महसूस होने वाली दिल की इस बीमारी की आप कैसे पहचान कर सकते हैं जानते हैं इस बारे में Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से।

हार्ट अटैक और हार्ट फेल में क्या अंतर होता है?

Dr. Deebanshu Gupta बताते हैं कि हार्ट अटैक और हार्ट फेल में काफी अंतर होता है जैसे हार्ट अटैक धमनियों में खून का थक्का जमने या प्लाक जमा होने की वजह से होता है। हार्ट अटैक में दिल की मांसपेशियों के किसी हिस्से में खून का बहाव अचानक रुक जाता है। ये एक अचानक होने वाली गंभीर घटना है।

हार्ट अटैक और इसके लक्षण क्या हैं?

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि इसमें सीने में दर्द या बेचैनी हार्ट अटैक का मुख्य लक्षण है। यह आमतौर पर सीने के बीच में या बाईं ओर महसूस होता है, जैसे कि कोई चीज जोर से दबा रही हो और य भारीपन बढ़ता जाता है। यह सीने में जलन या अपच की तरह महसूस हो सकता है। सीने की यह बेचैनी कुछ मिनटों या 20 मिनट से ज्यादा समय तक रह सकती है और आ-जा सकती है। हार्ट अटैक में शरीर के ऊपरी हिस्से की समस्याएं बढ़ती जाती हैं और इन्हीं से जुड़े लक्षण आपको महसूस हो सकते हैं जैसे

  • बाजू में दर्द 
  • पीठ के ऊपरी हिस्से में प्रेशर महसूस करना
  • जबड़े में दर्द
  • गर्दन और कंधे में दर्द
  • ठंडा पसीना आना
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • नींद से जुड़ी समस्याएं
  • 15 दिन या हफ्तों से महसूस होने वाली थकान जिससे कई बार गंभीर रूप से बेचैनी महसूस होने लगे।

हालांकि, कुछ हार्ट अटैक साइलेंट हार्ट अटैक होते हैं। महिलाओं में हार्ट अटैक के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जैसे धमनियों का सिकुड़ना जिसे कोरोनरी स्पास्म कहते हैं या धमनियों का फटना जिसे कोरोनरी डिसेक्शन कहते हैं।

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हार्ट फेल और इसके लक्षण क्या हैं?

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि हार्ट फेलियर, एक बेहद गंभीर मेडिकल स्थिति है जिसमें दिल की मांसपेशियां इतनी कमजोर या सख्त हो जाती हैं कि वे शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त खून पंप नहीं कर पातीं। यह एक लंबे समय तक चलने वाली और धीरे-धीरे बिगड़ने वाली स्थिति है जो महीनों या सालों में विकसित होती है। हार्ट फेल में भी अंतर होता है जैसे

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सिस्टोलिक हार्ट फेलियर

सिस्टोलिक हार्ट फेलियर, कम इजेक्शन फ्रैक्शन वाला हार्ट फेलियर होता है जो कि दिल कि कमजोर मांसपेशियों की वजह से होता है। सामान्य तौर पर इसमें इजेक्शन फ्रैक्शन 55% से 70% होता है। इसमें मुख्य पंपिंग चैंबर (बायां वेंट्रिकल) अक्सर बड़ा हो जाता है और उसकी दीवारें पतली हो जाती हैं। ये पहले आए हार्ट अटैक, हाई बीपी, हार्ट वॉल्व की बीमारी, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी वाले लोगों में हो सकता है। इसमें व्यक्ति शरीर में कई लक्षण महसूस करता है। जैसे

  • काम करते समय या सीधे लेटने पर सांस फूलना
  • बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी
  • पैरों, टखनों और पेट में सूजन

डायस्टोलिक हार्ट फेलियर

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि डायस्टोलिक हार्ट फेलियर में हार्मोन और नर्वस सिस्टम शरीर में खून की कमी को पूरा करने की कोशिश करते हैं और में हार्ट मसल्स में अकड़न आ जाती है। शरीर ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है, जिससे दिल तेजी से धड़कता है और शरीर में नमक और पानी जमा होने लगता है। अगर यह जमा हुआ फ्लूइड बढ़ जाता है, तो इस स्थिति को डायस्टोलिक हार्ट फेलियर कहते हैं। इसके शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिख सकते हैं और आमतौर पर लोगों को

  •  ये सूखी खांसी के रूप में महसूस होती है जो कि सोने पर बढ़ जाती है।
  • चक्कर आना, बेहोश होना, थकान या कमजोरी
  • शरीर में सूजन
  • रात में बार-बार पेशाब आना
  • बेचैनी, घबराहट और दम घुटने जैसा महसूस होना
  • सांस नली में घरघराहट और ऐंठन, जैसे अस्थमा में होता है

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निष्कर्ष:

डॉ. गुप्ता बताते हैं कि हल किसी को इन दोनों ही स्थितियों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। हार्ट डिजीज कई बार शरीर की दूसरी समस्याओं की वजह से भी होता है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज। इसके अलावा मोटापा और नशीली चीजों का सेवन भी हार्ट डिजीज के बड़े रिस्क फैक्टर हैं इसलिए अच्छी डाइट लें, लो फैट फूड का सेवन करें और एक्टिव लाइफस्टाइल फॉलो करें। रेगुलर एक्सरसाइज करें कोलेस्ट्रॉल जांच करवाते रहें। साथ ही हाई बीपी की समस्या है तो इसे मैनेज करना सीखें और स्ट्रेस फ्री रहें।

FAQ

  • हार्ट की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    हार्ट की बीमारी के शुरुआती लक्षणों में सीने में दर्द, भारीपन और बेचैनी है जो कि रह-रहकर आ जा सकती है।
  • साइलेंट हार्ट अटैक के क्या लक्षण हैं?

    साइलेंट हार्ट अटैक आने से पहले गैस जैसे लक्षण महसूस हो सकती है लेकिन आने पर अचानक से छाती में तेज के साथ कमजोरी महसूस हो सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Pallavi Kumari

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चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 31, 2026 20:07 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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