Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajeev Chowdry , General Physician & Internal Medicine Specialist, Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad | 23 Years of Clinical Experience

क्‍या आपको भी सोते समय झटके लगते हैं? डॉक्‍टर से समझें कारण

कई बार सोने के बाद ऐसा एहसास होता है जैसे व्‍यक्‍त‍ि ग‍िर रहा है और लगता है जैसे बॉडी कंट्रोल में नहीं है। फ‍िर  अचानक नींद खुल जाती है। जानें सोने के बाद झटके लगने के कारण।

कई बार सोते समय झटका लगता है और ऐसा लगता है जैसे हम ग‍िर रहे हैं। कुछ लोग अनुभव करते हैं जैसे वह क‍िसी गहरी खाई में ग‍िर रहे हैं। फ‍िर अचानक नींद खुलती है और सब कुछ सामान्‍य लगता है। वैसे, तो समस्‍या 8 से 10 साल के बच्‍चों में ज्‍यादा होता है, लेक‍िन यह वयस्‍कों में भी हो सकता है। जो लोग बहुत अध‍िक स्‍ट्रेस या एंग्‍जाइटी में होते हैं उन्‍हें सोते समय झटके लग सकते हैं। शाम के वक्‍त ज्‍यादा एक्‍सरसाइज करने से भी ऐसा हो सकता है। तंबाकू या अल्‍कोहल का सेवन ज्‍यादा करने से भी यह समस्‍या हो सकती है। मैग्नीशियम की कमी होने पर भी झटके आ सकते हैं। जो लोग ड‍िप्रेशन की दवाएं लेते हैं या हार्ट की दवा लेते हैं, तो भी झटके आ सकते हैं। ल‍िवर या हार्ट की समस्‍या होने पर भी यह समस्‍या हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें अन्‍य कारण और बचाव के उपाय। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Rajeev Chowdry, Internal Medicine Specialist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

साल 2015 में Sleep Medicine Clinics में प्रकाश‍ित एक र‍िव्‍यू आर्टि‍कल के मुताब‍िक, हाइपनिक जर्क (Hypnic Jerk) नींद आने के समय होने वाली एक सामान्य शारीरिक घटना है। इसमें नींद आते ही मांसपेशियों में अचानक झटका या शरीर के किसी हिस्से में हलचल महसूस होती है। जीवन में कभी न कभी लगभग 70% वयस्कों को इसका अनुभव हो सकता है। तनाव, ज्यादा थकान और नींद पूरी न होने से ये झटके बढ़ सकते हैं।

सोते समय झटके लगने के लक्षण

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सोते समय झटके लगने पर ये लक्षण नजर आ सकते हैं-

  • अचानक हाथ, पैर या पूरे शरीर में झटका लगना।
  • ऊंचाई या खाई से गिरने का एहसास होना।
  • झटके से नींद खुल जाना या चौंक जाना।
  • कुछ लोगों में एक ही झटका आता है, जबकि कभी-कभी लगातार कई झटके महसूस हो सकते हैं।

मायोक्लोनस

मायोक्लोनस (Myoclonus) में शरीर की मांसपेश‍ियों में अचानक और बहुत तेज झटका लग सकता है। ये झटके स्वस्थ लोगों में भी हो सकते हैं और आमतौर पर गंभीर नहीं होते। Mayo Clinic के मुताब‍िक, मायोक्लोनस के कुछ प्रकार नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों, जैसे मिर्गी (Epilepsy), के कारण हो सकते हैं। इसके अलावा शरीर में मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ी या किसी दवा के कारण भी मांसपेशियों में अचानक झटके आ सकते हैं।

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मायोक्लोनिक सीजर में झटके लग सकते हैं

मायोक्लोनिक सीजर (Myoclonic Seizure) यानी दौरा आने की समस्‍या है ज‍िसमें मांसपेश‍ियों में अचानक झटका लगता है। द‍िमाग में असामान्य इलेक्‍ट्र‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी के कारण ऐसा होता है। ज‍िन लोगों को यह समस्‍या होती है उन्‍हें सोते समय झटके लग सकते हैं। जबक‍ि हाइपनिक जर्क में दौरे नहीं पड़ते इसल‍िए यह गंभीर स्‍थि‍ति‍ मानी जाती है।

किडनी और ल‍िवर की बीमारी

क‍िडनी में रासायनिक पदार्थों का संतुलन बिगड़ने से मांसपेशियों के झटके लग सकते हैं। साथ ही, गंभीर लिवर संबंधी समस्याएं शरीर में विषैले पदार्थों के बढ़ने से मांसपेशियों में बदलाव के कारण झटके लग सकते हैं।

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सोते समय झटके लगने से कैसे बचें?

  • अगर कभी-कभार सोते समय झटका लगता है और कोई अन्य समस्या नहीं है, तो आमतौर पर यह च‍िंता की बात नहीं मानी जाती है।
  • रोज एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • शाम और रात में कैफीन कम करें।
  • सोने से पहले स्‍ट्रेस कम करने के लिए डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, मेड‍िटेशन और हल्‍की स्‍ट्रेच‍िंग करें।
  • सोने से पहले तेज एक्‍सरसाइज न करें।
  • निकोटीन और अल्‍कोहल से बचें।
  • अगर किसी दवा के बाद झटके बढ़े हैं, तो डॉक्टर से बात करें। दवा खुद से बंद न करें।

डॉक्‍टर से कब संपर्क करें?

अगर झटके बहुत बार होने लगें। झटके लगातार बढ़ रहे हों, नींद बार-बार टूटती हो, झटके के साथ बेहोशी हो, तो डॉक्‍टर से जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्‍टर ब्‍लड टेस्‍ट, स्‍लीप स्‍टडी, एमआरआई, सीटी स्‍कैन जैसी जांच करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर नसों, मांसपेशियों और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षणों की जांच की जाती है।

न‍िष्‍कर्ष:

सोते समय अचानक झटका लगना या ग‍िरने जैसा एहसास होने के पीछे स्‍ट्रेस, एंग्‍जाइटी, शाम को अध‍िक एक्‍सरसाइज करना, तंबाकू या अल्‍कोहल का सेवन, मैग्नीशियम की कमी, ड‍िप्रेशन या हार्ट की दवा लेना, ल‍िवर या क‍िडनी की बीमारी, मायोक्लोनस, मायोक्लोनिक सीजर जैसे कारण हो सकते हैं। इससे बचने के ल‍िए नींद पूरी करें, स्‍ट्रेस कम करें, कैफीन का सेवन कम करें, डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, मेड‍िटेशन और हल्‍की स्‍ट्रेच‍िंग करें। बार-बार झटके लगें या नींद बार-बार टूटे, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या सोते समय झटका लगना सामान्य है?

    कभी-कभार नींद आते समय हाथ-पैर या पूरे शरीर में झटका लगना सामान्य हो सकता है। बार-बार यह समस्‍या हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िए।
  • क्या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम से नींद में झटके लगते हैं?

    रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम में आराम के समय पैरों को हिलाने की तेज इच्छा होती है। यह सामान्य हाइपनिक जर्क से अलग समस्या है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Aug 31, 2026 19:55 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajeev Chowdry

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