अक्सर लोग सुबह जल्दी उठने के लिए अलार्म का सहारा लेते हैं। ऐसे में सुबह अलार्म बजते ही लोगों की आंखें खुल जाती हैं, लेकिन कई लोगों को थोड़ी देर और सोने का मन करता है। ऐसे में लोगों के लिए अलार्म बंद करने के बाद बिस्तर से उठना सबसे मुश्किल काम लगता है। मन करता है कि बस कुछ मिनट और सो लिया जाए। कई बार कुछ मिटन की नींद को सोचकर लोग लंबे समय तक सोते रह जाते हैं, जिसके कारण लोगों को उठने पर भारीपन महसूस होता है। कभी-कभी ये परेशानी नॉर्मल लग सकती है, लेकिन अगर ऐसा रोज होता है, तो यह दिनभर के काम, एनर्जी और अन्य कामों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।
सुबह आंख खुलने के बाद भी सोने का मन क्यों करता है?
डॉ. पूजा आगे कहती हैं, सुबह आंख न खुलने के बाद भी सोने का मन करने की आदत स्लीप इनर्शिया, कम नींद लेने, सोने और जागने के समय में बदलाव होने, रात को स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करने, देर शाम कैफीन का सेवन करने, नींद की गुणवत्ता के खराब होने, स्लीप एपनिया जैसी समस्या के कारण हो सकती हैं। ऐसे में इन समस्याओं को नजरअंदाज न करें।
1. स्लीप इनर्शिया की समस्या
अलार्म बंद करने के बाद दोबारा सोने का मन करने की वजह अक्सर स्लीप इनर्शिया (sleep inertia) होती है। यह थोड़े समय की स्थिति है, जब दिमाग नींद से जागने की अवस्था में आ रहा होता है। ऐसा तब ज्यादा होता है जब आप गहरी नींद के दौरान जागते हैं या आपकी नींद पूरी नहीं हुई होती है। इससे जागने के बाद कुछ मिनटों तक आपको भारीपन, उलझन, सुस्ती या बहुत ज्यादा नींद महसूस हो सकती है।
साल 2015 में Nature and Science of Sleep Journal के अनुसार, स्लीप इनर्टिया वह स्थिति है, जिसमें जागने के तुरंत बाद हमारा सुस्ती महसूस करना और काम में मन न लगना शामिल है। इसका असर धीरे-धीरे कम होता है, लेकिन जागने के शुरुआती 30 मिनटों में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है।
स्लीप इनर्टिया नींद की जरूरत (होमियोस्टैटिक) और हमारे शरीर की अंदरूनी क्लॉक यानी सर्कैडियन रिदम के साथ मिलकर जागने के तुरंत बाद हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। रिसर्च से पता चलता है कि अगर नींद की कमी हो, शरीर की सुस्ती के समय (स्राडियन लो) नींद खुले, या गहरी नींद से अचानक जागना पड़े, तो स्लीप इनर्टिया की समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
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2. पर्याप्त नींद न मिलना
अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से अपनी जरूरत से कम घंटे सोते हैं, तो सुबह शरीर का दोबारा सोने का संकेत देना एक आम बात है। देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना लगातार होने पर नींद की कमी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में अलार्म के समय शरीर को लग सकता है कि अभी आराम पूरा नहीं हुआ है। इसलिए अलार्म बंद करने के बाद बिस्तर में पड़े रहने की इच्छा बहुत तेज हो सकती है।
3. सोने और जागने का समय बदलना
हर दिन अलग समय पर सोना और उठना भी सुबह की सुस्ती को बढ़ा सकता है। शरीर के अंदर एक नेचुरल
बायोलॉजिकल क्लॉक होती है, जो सोने और जागने के समय को ऑर्गेनॉइज करने में मदद करती है। अगर कभी बहुत देर रात तक जागना हो और अगले दिन बहुत जल्दी उठना पड़े, तो शरीर को अचानक जागने में परेशानी हो सकती है। लाइफस्टाइल को नियमित रखने से शरीर को एक फिक्स टाइम पर सोने और जागने की आदत बनाने में मदद मिल सकती है।
4. रात में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करना
सोने से पहले लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या दूसरी स्क्रीन देखने की आदत भी नींद को प्रभावित कर सकती है। खासकर अगर स्क्रीन के कारण सोने का समय बढ़ रहा हो, तो सुबह उठने के समय नींद पूरी न होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में सिर्फ अलार्म का समय बदलना पर्याप्त नहीं है। रात में समय पर सोना भी उतना ही जरूरी है।
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5. देर शाम कैफीन लेना
चाय, कॉफी और कैफीन वाली अन्य ड्रिंक्स कुछ लोगों की नींद को प्रभावित कर सकती हैं। अगर कैफीन का सेवन दिन में काफी देर बाद या शाम के समय किया जाए, तो सोने में परेशानी हो सकती है या नींद की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है।
6. नींद की खराब गुणवत्ता या स्लीप एपनिया की समस्या
अगर आपकी नींद अच्छी नहीं होती है या आपको स्लीप एपनिया (sleep apnoea) जैसी कोई समस्या है, जो बिना आपके जाने बार-बार नींद पर बुरा असर डालती है, साथ ही बार-बार स्नूज बटन (snooze button) दबाने से दिमाग बार-बार छोटी नींद में चला जाता है, जिससे जागना और परेशानी हो जाता है।
सुबह आसानी से उठने के लिए क्या करें?
डॉ. पूजा आगे कहती हैं, सुबह की सुस्ती कम करने के लिए कुछ आसान आदतों को अपनाया जा सकता है। जैसे -
- रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।
- अपनी जरूरत के अनुसार पर्याप्त नींद लेने का टाइम फिक्स करें।
- अलार्म को बिस्तर से थोड़ी दूर रखें ताकि उसे बंद करने के लिए उठना पड़े।
- जागने के बाद नेचुरल रोशनी में कुछ समय बिताएं।
- उठने के बाद पानी पी सकते हैं।
- हल्की फिजिकल एक्टिविटी कर सकते हैं।
- अलार्म को बार-बार स्नूज करने की आदत से बचने की कोशिश करें।
- रात में देर तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदत को कम करें।
- देर शाम कैफीन लेने से बचें।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. पूजा बताती हैं, अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से पर्याप्त समय तक सोते हैं और फिर भी दिन में बहुत ज्यादा नींद महसूस करते हैं, सिरदर्द के साथ जागते हैं, जोर से खर्राटे लेते हैं, सोते समय सांस लेने में परेशानी होने या काम करते या ट्रेवल करते समय जागते रहने में परेशानी होती है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
निष्कर्ष
अलार्म बंद करने के बाद दोबारा सोने की तेज इच्छा कई बार स्लीप इनर्शिया, कम नींद लेने या अनियमित नींद, देर रात तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने, देर से कैफीन लेना और बार-बार स्नूज करना भी सुबह की सुस्ती को बढ़ा सकता है। इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले अपनी नींद की ड्यूरेशन पर ध्यान देना फायदेमंद है। अगर पर्याप्त नींद के बाद भी ज्यादा नींद बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। ऐसा करने से इसके कारण के बारे में जानने में मदद मिल सकती है। ध्यान रहे, अच्छी नींद के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें।
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FAQ
ज्यादा नींद आना किसकी कमी है?
शरीर में विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन की कमी और थायराइड की कमी के कारण ज्यादा नींद आने की समस्या हो सकती है।बार-बार नींद क्यों आती है?
शरीर में पोषक तत्वों की कमी, अधिक स्ट्रेस में रहने, थायराइड की समस्या, लो ब्लड प्रेशर, दवाइयों के साइड इफेक्ट, नींद की क्वालिटी खराब होने और स्लीप एपनिया की समस्या के कारण व्यक्ति को बार-बार नींद आने की समस्या हो सकती है।
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Aug 26, 2026 10:18 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Pooja Pillai
