Sat Sep 19, 2026 | 10:45 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Pooja Pillai , Internal Medicine

छुट्टी वाले दिन ज्यादा सोने के बाद भी फ्रेश क्यों नहीं लगता? डॉक्टर से जानें

छुट्टी के दिन ज्यादा सोने के बाद भी थकान महसूस होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे नींद की खराब क्वालिटी, अनियमितता या कुछ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं। अच्छी नींद के लिए नींद की ड्यूरेशन के साथ उसकी क्वालिटी, समय और नियमितता भी जरूरी है, जिसके लिए एक बेहतर रूटीन अपनाना चाहिए।
छुट्टी वाले दिन ज्यादा सोने के बाद भी फ्रेश क्यों नहीं लगता? डॉक्टर से जानेंछुट्टी वाले दिन ज्यादा सोने के बाद भी फ्रेश क्यों नहीं लगता? डॉक्टर से जानें

ज्यादातर लोग पूरे हफ्ते काम की भागदौड़ में लगे रहते हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग सोचते हैं कि वीकेंड पर पूरा दिन आराम करेंगे, लेकिन छुट्टी के दिन ज्यादा सोने के बाद भी कई लोगों को फ्रेश महसूस नहीं होता है और थकान बनी रहती है। इसको लेकर बहुत से लोग परेशान रहते हैं कि आराम करने बाद भी फ्रेश महसूस क्यों नहीं होता है? ऐसे में आइए इस बारे में Dr. Pooja Pillai, Consultant - Internal Medicine, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।

पूरे दिन सोने के बाद भी थकान के कारण

डॉ. पूजा के अनुसार, छुट्टी के दिन ज्यादा देर तक सोने से हमेशा फ्रेश महसूस नहीं होता है, क्योंकि अच्छी नींद के लिए सिर्फ नींद की ड्यूरेशन ही काफी नहीं है। नींद की क्वालिटी, समय और नियमितता भी मायने रखती है। इसके अलावा, मानसिक समस्याओं, मेडिकल कंडीशन्स, अल्कोहल और कुछ दवाइयों के कारण भी लोगों को सोकर उठने के बाद थकान की समस्या हो सकती है।

1. नींद की नियमितता के कारण

अगर किसी ने हफ्ते भर नींद पूरी नहीं की है (स्लीप डेट - Sleep Debt), नींद का शेड्यूल अनियमित है या वीकेंड पर नॉर्मल से बहुत देर से सोता है, तो समय में बदलाव शरीर की इंटरनल क्लॉक को बिगाड़ सकता है और जागने पर व्यक्ति को सुस्ती या भारीपन महसूस हो सकता है। साथ ही, बहुत देर तक सोने से कभी-कभी यह टेंपरेरी सुस्ती और ज्यादा महसूस हो सकती है।

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2. नींद क्वालिटी खराब होने के कारण

पर्याप्त घंटे सोने के बावजूद थकान महसूस होना नींद की खराब क्वालिटी का संकेत भी हो सकता है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी स्थितियों के कारण नींद के दौरान बार-बार थोड़ी देर के लिए नींद खुल सकती है, जो व्यक्ति को याद भी नहीं रहती है।

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3. मानसिक समस्याओं के कारण

स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के कारण भी लोगों को अच्छी नींद न आने और थकान बनी रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

4. मेडिकल कंडीशन्स के कारण

एनीमिया, थायरायड की समस्या, डायबिटीज और अन्य मेडिकल स्थितियों के कारण भी लगातार थकान हो सकती है, इसलिए सिर्फ ज्यादा देर तक सोने से असल समस्या हल नहीं हो सकती है।

5. अल्कोहल का सेवन

अल्कोहल का सेवन करने से नींद की क्वालिटी पर बुरा असर होता है। ऐसे में सोकर उठने के बाद भी व्यक्ति को थकान बनी रहने की समस्या हो सकती है।

6. कुछ दवाइयों के कारण

कई बार कुछ दवाइयों के कारण व्यक्ति की नींद में बाधा आती है और वह पर्याप्त नींद नहीं ले पाता है। इसके कारण उठने पर भी थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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7. सोने का माहौल और रूटीन

कई बार सोने के लिए आरामदायक माहौल न होने और सोने के अनियमित रूटीन के कारण भी अच्छी नींद में बाधा आ सकती है।

क्या कहती है स्टडी?

Cleveland Clinic के अनुसार, स्लीप डिसऑर्डर, आस-पास का माहौल, खान-पान, ड्रिंक्स, स्ट्रेस जैसी मानसिक समस्याएं, खून की कमी, थायराइड, विटामिन्स की कमी, हार्मोनल असंतुलन और अन्य क्रॉनिक मेडिकल कंडीशन्स के कारण सुबह उठने पर लोगों को थकान महसूस होती है।

फ्रेश रहने के लिए क्या करें?

डॉ. पूजा का कहना है, नियमित रूप से फ्रेश महसूस करने और थकान जैसी समस्याओं से बचने के लिए एक बेहतर तरीका यह है कि पूरे हफ्ते सोने और जागने का समय लगभग एक जैसा रखा जाए। इसके अलावा, कुछ अन्य बातों पर भी ध्यान दें। जैसे-

  • पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
  • दिन के समय धूप में बैठें।
  • फिजिकल एक्टिविटी करें।
  • दिन में देर से कैफीन का सेवन सीमित करें।
  • सोने से पहले ज्यादा अल्कोहल पीने से बचें।
  • सोने का समय फिक्स करें।
  • खर्राटे लेने या रात में बार-बार नींद खुलने जैसी बातों पर भी ध्यान दें।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. पूजा आगे कहती हैं, अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद के बावजूद नियमित रूप से बिना फ्रेश महसूस किए जागता है। खासकर

  • अगर जोरदार खर्राटे लेना।
  • सोते समय सांस लेने में परेशानी (गैस्पिंग)।
  • सुबह के समय सिरदर्द।
  • दिन में बहुत ज्यादा नींद आना।
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं हों।

इन स्थितियों में व्यक्ति को डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उसे स्लीप डिसऑर्डर या किसी अन्य मेडिकल स्थिति के लिए जांच की ज़रूरत हो।

निष्कर्ष

नींद की खराब क्वालिटी, सोने का समय फिक्स न होने, नियमितता न होने, मानसिक समस्याओं, अल्कोहल का सेवन, कुछ दवाइयों, सोने के रूटीन जैसे कारणों से लोगों को सोकर उठने के बाद भी फ्रेश फील नहीं होता है, लेकिन ध्यान रहे, अगर खराब नींद के साथ खर्राटे, सोते समय सांस लेने में परेशानी, सुबह के समय सिरदर्द, दिन में बहुत ज्यादा नींद आने और फोकस करने में परेशानी होती है, खासकर हेल्दी रूटीन के बाद भी, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

अच्छी नींद और उठने के बाद फ्रेश महसूस करने के लिए पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें, धूप में बैठें, सोने का समय फिक्स करें, फिजिकल एक्टिविटीज करें और कैफीन का सेवन सीमित करें, खासकर शाम के समय।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • ज्यादा नींद आने का क्या कारण है?

    शरीर की ज्यादा थकान, नींद की कमी, नींद की खराब क्वालिटी, हार्मोन्स के असंतुलित होने, तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्या, दवाइयों के कारण, पोषक तत्वों की कमी और मानसिक समस्याओं के कारण लोगों को ज्यादा नींद आने की समस्या हो सकती है।
  • शरीर में थकान और कमजोरी के क्या कारण है?

    नींद की खराब क्वालिटी, पोषक तत्वों की कमी, स्ट्रेस, पानी की कमी, कैफीन का अधिक सेवन करने और सही खान-पान न होने के कारण व्यक्ति को थकान और कमजोरी की समस्या बनी रहती है। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Priyanka Sharma

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Sub Editor

प्रियंका शर्मा हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की है। फिलहाल प्रियंका जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रही हैं। प्रियंका को स्वास्थ्य, पोषण, स्किन केयर और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म की है। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 19, 2026 21:34 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr. Pooja Pillai

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