डिप्रेशन की समस्या होने पर लोग मानते हैं कि उन्हें अकेलापन, रोना या मन उदास रहेगा, लेकिन डिप्रेशन इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति का मन लंबे समय तक बहुत उदास रहता है या फिर जिन कामों में उसकी रुचि थी, उसमें भी दिलचस्पी खत्म हो जाती है। WHO के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 4.6% पुरुष और 6.9% महिलाएं डिप्रेशन से प्रभावित हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या महिलाओं और पुरुषों में लक्षण समान होते हैं और महिलाओं में डिप्रेशन के मामले ज्यादा क्यों होते हैं? इस बारे में हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology at VNA Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि हालांकि, डिप्रेशन को एक तरह से परिभाषित किया जाता है, लेकिन सच तो यह है कि डिप्रेशन हर व्यक्ति में एक जैसा नजर नहीं आता। खासकर पुरुषों और महिलाओं में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।
महिलाओं में डिप्रेशन के क्या लक्षण हैं?
WHO के अनुसार, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में डिप्रेशन होने की संभावना 1.5 गुना ज्यादा होती है। इस बारे में Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “आमतौर पर महिलाओं में डिप्रेशन का कारण हार्मोनल बदलाव भी हो सकता है। इसमें पीरियड्स से पहले होने वाले बदलाव, प्रेग्नेंसी, पोस्टपार्टम डिप्रेशन और मेनोपॉज शामिल हैं। इसके अलावा, महिलाएं अपने इमोशन्स को खुलकर बता देती हैं, इसलिए कई बार उनके लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं। महिलाओं को इन लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए।”
- लगातार उदासी या खालीपन महसूस होना
- बिना वजह रोने का मन करना
- हर समय चिंता या घबराहट रहना
- खुद को दोष देना या अपराधबोध महसूस करना
- पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि खत्म होना
- हर समय थकान महसूस होना
- लोगों से मिलना-जुलना कम कर देना

पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण
Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “पुरुषों में डिप्रेशन कई बार अलग तरीके से दिखता है। कई पुरुषों को उदासी के बजाय व्यवहार में बदलाव दिखता है। इसलिए पुरुषों को अपने बिहेवियर पर ध्यान देने की जरूरत है।”
- छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना
- हर समय चिड़चिड़ापन रहना
- हिंसक होना
- खुद को जरूरत से ज्यादा काम में बिजी रखना
- बहुत ज्यादा स्मोकिंग, शराब या अन्य नशे का सहारा लेना
- परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना
- अपने इमोशन्स को दूसरों के साथ शेयर न करना
महिलाओं और पुरुषों में डिप्रेशन में क्या फर्क है?
Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, “कई पुरुष अपने उदासी को गुस्से में दिखाते हैं और उनके व्यवहार में बदलाव आने लगता है। यही कारण है कि परिवार के लोग भी कई बार समझ नहीं पाते कि वे डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। इसके अलावा, पुरुषों को बचपन से मजबूत और इमोशन्स अपने तक रखने की सीख दी जाती है। इसलिए पुरुषों का डिप्रेशन जल्दी पता नहीं चलता और कई बार इसका नतीजा आत्महत्या तक पहुंच जाता है। वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स खुलकर बता देती हैं, इसलिए उनके डिप्रेशन के लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं और वे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने में भी नहीं हिचकती।”
निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra सलाह देते हैं कि डिप्रेशन कोई ऐसी बीमारी नहीं है, जिसका इलाज न हो सके। बस समय पर इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है। डिप्रेशन का इलाज एक्सपर्ट की देखरेख में ही किया जा सकता है और वह मरीज की काउंसलिंग, लाइफस्टाइल में बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाओं के जरिए काफी हद तक कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।
FAQ
पुरुषों में डिप्रेशन महिलाओं से अलग कैसे प्रकट होता है?
पुरुष अक्सर उदासी दिखाने के बजाय बहुत ज्यादा गुस्सा, चिड़चिड़ापन और आक्रामकता दिखाते हैं। समाज में पुरुषों को मजबूत दिखने की सीख दी जाती है, इसलिए वे रोने या उदास होने के बजाय अपने भीतर के तनाव को गुस्से या दूसरों पर चिल्लाकर बाहर निकालते हैं।खान-पान और वजन पर डिप्रेशन का क्या असर पड़ता है?
डिप्रेशन के दौरान महिलाओं में इमोशनल ईटिंग की आदत देखी जाती है, जिससे उनका वजन तेजी से बढ़ता है। इसके विपरीत, पुरुष अक्सर डिप्रेशन में अपनी भूख पूरी तरह खो देते हैं, जिससे उनका वजन अचानक कम होने लगता है।
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Jun 30, 2026 17:31 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jun 30, 2026 17:31 IST
Modified By : Aneesh RawatJun 30, 2026 17:31 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra