कैंसर दुनियाभर में एक गंभीर बीमारी के रूप में उभर रहा है। यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक और इमोशनल हेल्थ पर भी गहरा असर डालता है। कैंसर से पीड़ित कई मरीजों में डिप्रेशन होना मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में देखा जाता है। डिप्रेशन सिर्फ उदासी महसूस करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक डिसऑर्डर है, जिसमें लगातार उदासी, निराशा, आत्मविश्वास की कमी, रोजाना के काम करने में रुचि कम होना, थकान और फोकस में कमी जैसे लक्षण नजर आते हैं। कैंसर और डिप्रेशन का कनेक्शन द्विदिश है, यानी कैंसर डिप्रेशन को बढ़ा सकता है और डिप्रेशन कैंसर के ट्रीटमेंट और मरीजों की लाइफ क्वालिटी को भी प्रभावित कर सकता है। आइए नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट डॉ. नीतू पांडे (Dr. Neetu Pandey, Consultant, Radiation Oncology, Fortis Hospital, Noida) से कैंसर और डिप्रेशन में कनेक्शन के बारे में जानते हैं?
कैंसर और डिप्रेशन में कनेक्शन
डॉ. नीतू पांडे का कहना है कि जब किसी व्यक्ति को कैंसर होने का पता चलता है तो वह मानसिक रूप से खुद को बहुत कमजोर महसूस करने लगता है। मरने का डर, भविष्य में क्या होने वाला है उसका पता न होना, इलाज लंबा चलना, पैसों को लेकर परेशानी, परिवार की चिंता और सोशल लाइफ में आने वाले बदलाव मरीज में मानसिक तनाव को काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं। यह तनाव धीरे-धीरे डिप्रेशन का रूप लेने लगता है। इसके अलावा, कैंसर के कारण होने वाला लगातार दर्द, ज्यादा थकान, भूख में कमी, नींद की समस्या और शारीरिक कमजोरी भी मरीज के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इतना ही नहीं, कई बार कैंसर के इलाज, जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी और हार्मोन थेरेपी के साइड इफेक्ट भी मरीजों में उदासी और डिप्रेशन को बढ़ा सकते हैं।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2015 में Oncology Letters Spandidos Publications में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, कैंसर के मरीजों में होने वाला डिप्रेशन सिर्फ मन की उदासी नहीं, बल्कि इसके पीछे शरीर में होने वाले बायोलॉजिकल बदलाव भी मुख्य कारण होते हैं। कैंसर के कारण शरीर के अंदर बड़े लेवल पर सूजन पैदा होती है। यह सूजन शरीर के उन रास्तों को प्रभावित करती है, जो दिमाग के कामकाज से जुड़े होते हैं, जिससे कैंसर मरीज में डिप्रेशन की स्थिति बढ़ सकती है। इसके साथ ही कैंसर शरीर के हार्मोन सिस्टम में गड़बड़ी पैदा करता है। ये हार्मोनल बदलाव भी डिप्रेशन का कारण बनते हैं।
इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि हेल्दी व्यक्तियों में होने वाले नॉर्मल डिप्रेशन की तुलना में कैंसर से जुड़ा डिप्रेशन काफी अलग होता है। यह शरीर की बायोलॉजिकल प्रक्रियाओं में इतनी गहरी होती है कि भविष्य में इसके इलाज के लिए नॉर्मल डिप्रेशन की दवाओं के स्थान पर सूजन कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

कैंसर के इलाज पर डिप्रेशन का असर
डॉ. नीतू पांडे के अनुसार, कैंसर सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि यह कैंसर के ट्रीटमेंट को भी प्रभावित करता है। डिप्रेशन से पीड़ित मरीज अक्सर दवाओं का नियमित सेवन नहीं कर पाते हैं, समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते और मेडिकल गाइडलाइन्स को सही तरह से फॉलो नहीं करते हैं। इससे ट्रीटमेंट का असर कम हो सकता है। डिप्रेशन के कारण मरीजों की सोशल लाइफ भी प्रभावित होती है। ट्रीटमेंट के दौरान वे लोगों के सवालों से बचने के लिए अक्सर परिवार और दोस्तों से दूरी बनाने लगते हैं और अकेलापन महसूस करने लगते हैं। Cancer Research UK के अनुसार, कैंसर होने पर मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियां कभी भी शुरू हो सकती हैं। ऐसा बीमारी का पता चलने के बाद, इलाज के दौरान या इलाज खत्म होने के बाद हो सकता है। हर मरीज के अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं और यह आपकी स्थिति और कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है।
कैंसर मरीजों में डिप्रेशन के लक्षण
डॉ. नीतू पांडे के अनुसार कैंसर और उसके ट्रीटमेंट के कारण नजर आने वाले शारीरिक लक्षण शरीर में पहले से नजर आते हैं। इसलिए, डिप्रेशन की पहचान करना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। फिर भी आप इन लक्षणों की मदद से डिप्रेशन के बारे में पता लगा सकते हैं-
- लगातार उदासी या निराशा महसूस होना
- पहले अच्छी लगने वाली चीजें, खाना या काम में अब रुचि खत्म होना
- खुद को होने वाली चीजों के लिए दोषी महसूस करना
- फोकस और फैसले लेने में मुश्किल होना
- नींद कम या ज्यादा आना
- भूख कम या ज्यादा लगना
- बहुत ज्यादा थकान और एनर्जी की कमीू होना
- परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना
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निष्कर्ष
डॉ. नीतू पांडे का कहना है कि कैंसर और डिप्रेशन के बीच गहरा कनेक्शन होता है। कैंसर का पता चलना, उसका इलाज और उससे जुड़ी शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां मरीज को डिप्रेशन की ओर ले जा सकती हैं। दूसरी ओर, डिप्रेशन कैंसर के ट्रीटमेंट, मरीज की लाइफ क्वालिटी और हेल्थ को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए, कैंसर के ट्रीटमेंट के साथ-साथ मरीज के मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
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FAQ
डिप्रेशन के लक्षण कब दिखाई देते हैं?
डिप्रेशन के लक्षण तब साफ होने लगते हैं, जब व्यक्ति लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन और किसी काम में मन न लगने की समस्या लगातार बढ़ने लगती है।क्या कैंसर के बाद डिप्रेशन हो सकता है?
हां, कैंसर के बाद डिप्रेशन होना एक आम बात है। कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद शारीरिक और मानसिक बदलाव, बीमारी के दोबारा लौटने का डर और लाइफस्टाइल में आए बदलावों के कारण मरीज डिप्रेशन में जा सकते हैं।
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Jul 12, 2026 15:34 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Nitu Pandey