आमतौर पर लोग डिप्रेशन को सिर्फ मानसिक बीमारी समझते हैं, लेकिन यह डिप्रेशन की यह बीमारी सिर्फ मेंटल हेल्थ से ही जुड़ी नहीं होती, बल्कि इससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं भी हो सकती है। अगर डिप्रेशन लंबे समय तक रहे, तो इसका असर हार्ट पर भी पड़ सकता है। डिप्रेशन के कारण लोगों में हार्ट की बीमारियां क्यों हो रही हैं? इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology at VNA Hospital, Delhi की। उन्होंने बताया कि पुरुषों में डिप्रेशन के कारण कई ऐसे बदलाव होते हैं, जो लंबे समय तक रहने पर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकते हैं।
पुरुषों में डिप्रेशन से हार्ट डिजीज होने की वजह
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “डिप्रेशन के कारण शरीर में सूजन आ सकती है और लाइफस्टाइल में बदलाव होने के कारण फिजिकल एक्टिविटीज कम हो सकती है। इसका सीधा असर हार्ट पर पड़ता है। इसके अलावा, हार्मोनल बदलाव भी हार्ट की बीमारियां होने का कारण बन सकते हैं।”
स्ट्रेस हार्मोन का बढ़ना
Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “डिप्रेशन के दौरान शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर लंबे समय तक ज्यादा बना रह सकता है। इन हार्मोनल बदलावों के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और इससे हार्ट को पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। इससे धीरे-धीरे धमनियों को भी नुकसान पहुंचने लगता है। अगर लंबे समय तक यही कंडीशन रहती है, तो हार्ट की बीमारियों का कारण बन सकती है।”

शरीर में सूजन रहना
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि डिप्रेशन के कारण शरीर में क्रोनिक इंफ्लेमेशन भी हो सकती है। यह सूजन धमनियों में प्लाक बनने के प्रोसेस को तेज कर सकती है। जब धमनियां संकरी होने लगती हैं, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
डिप्रेशन के कारण लाइफस्टाइल में बदलाव
Dr. Vineet Malhotra के अनुसार, “डिप्रेशन से जूझ रहे कई पुरुष धीरे-धीरे फिजिकल एक्टिविटी बंद कर देते हैं, सिगरेट और शराब पीने लगते हैं और असंतुलित डाइट के कारण तेजी से वजन बढ़ने लगता है। इससे हार्ट की बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है।”
नींद पूरी न होना
Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “डिप्रेशन का असर नींद पर भी पड़ता है। कुछ लोगों को अनिद्रा की समस्या होने लगती है, जबकि कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं। दोनों ही स्थितियां शरीर के लिए ठीक नहीं मानी जातीं। खराब नींद के कारण हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हार्ट की बीमारियां हो सकती है।”
ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम पर असर
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि शरीर में ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है। डिप्रेशन इस सिस्टम के फंक्शन पर असर डालने लगता है। इससे हार्ट बीट अनियमित हो सकती है और हार्ट की बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि अगर किसी पुरुष को लगातार उदासी या खालीपन महसूस होता, किसी काम को करने का मन नहीं करता, हर समय थकान, नींद या भूख बहुत ज्यादा लगना या बिल्कुल न लगना और गुस्सा बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें, क्योंकि लंबे समय तक ऐसे लक्षण हार्ट की बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकते हैं। समय पर इलाज कराने से कई तरह की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
FAQ
क्या डिप्रेशन खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को तेज करता है?
डिप्रेशन के कारण खून में मौजूद प्लेटलेट्स जरूरत से ज्यादा चिपचिपे हो जाते हैं। खून गाढ़ा होने के कारण हृदय की धमनियों के अंदर रुकावट या क्लॉट (थक्का) बनने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जो आगे चलकर अचानक हार्ट अटैक का कारण बनती है।क्या कम उम्र के पुरुषों को भी डिप्रेशन के कारण हार्ट अटैक आ सकता है?
आजकल युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे डिप्रेशन और वर्क-स्ट्रेस एक बहुत बड़ा कारण है। कम उम्र के पुरुष अक्सर अपनी मानसिक स्थिति को नजरअंदाज करते हैं और भारी मात्रा में धूम्रपान या कैफीन का सहारा लेते हैं, जिससे युवावस्था में ही धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं।
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Jun 29, 2026 20:35 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jun 29, 2026 20:35 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra