किडनी और हार्ट को शरीर के दो अलग-अलग अंग है, लेकिन यह आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दरअसल, किडनी शरीर में पानी और नमक को बैलेंस रखने के लिए में मदद करती है और इसके साथ ब्लड प्रेशर और ब्लड फ्लो को भी कंट्रोल करती है। अगर हार्ट की बात करें, तो यह पूरे शरीर को ब्लड पहुंचाने का काम करता है। अगर किडनी से जुड़ी कोई बीमारी हो, तो इसका असर हार्ट पर भी पड़ सकता है। यह जानने के लिए हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की।
किडनी की बीमारी होने पर हार्ट पर असर होने के 5 कारण
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “अगर किडनी लंबे समय तक ठीक से काम नहीं करती, तो उसका असर सिर्फ पेशाब या शरीर में सूजन तक नहीं रहता, बल्कि इसका असर कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट फेल्योर, अनियमित धड़कन और अचानक कार्डियक डेथ का रिस्क बढ़ सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं।”
1. शरीर में पानी और नमक जमा होना
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “किडनी शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी पेशाब के जरिए बाहर निकालती है, लेकिन अगर किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तो शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। इससे शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हार्ट को पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। कुछ मरीजों को पैरों और टखनों में सूजन और सांस फूलने की समस्या भी देखने को मिल सकती हैं। अगर किडनी की समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर हार्ट पर दिख सकता है।”
2. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के मुताबिक, जब ब्लड प्रेशर हाई होता है, तो ब्लड वेसल्स को संकुचित और पतला कर सकता है, जो किडनी समेत शरीर की सभी ब्लड वेसल्स को कमजोर और क्षतिग्रस्त कर सकता है। इससे किडनी तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है। ब्लड वेसल्स में अतिरिक्त तरल पदार्थ ब्लड प्रेशर को और ज्यादा बढ़ा देता है। कई मामलों में इससे किडनी को काफी नुकसान पहुंच सकता है और किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।
3. शरीर में वेस्ट प्रोडक्ट्स बढ़ना
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “किडनी का एक बड़ा काम खून से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करके बाहर निकालना है। जब किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होती है, तो यूरिया और दूसरे अपशिष्ट पदार्थ शरीर में जमा हो सकते हैं। क्रोनिक किडनी डिजीज में शरीर के अंदर होने वाले कई बदलाव ब्लड वेसल्स और हार्ट के फंक्शन को प्रभावित कर सकते हैं।”
kidney and heart connection
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4. किडनी की बीमारी में एनीमिया होना
NIDDK के अनुसार, किडनी का काम एरिथ्रोपोएटिन हार्मोन (EPO) बनाना का है, जो बोन मैरो को रेड ब्लड सेल्स बनाने का संकेत देता है। जब किडनी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो पर्याप्त मात्रा में EPO नहीं बना पाते, जिस वजह से रेड ब्लड सेल्स की संख्या कम हो सकती है। इस वजह से एनीमिया की शिकायत हो सकती है।
5. कैल्शियम और फॉस्फोरस का संतुलन बिगड़ना
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “किडनी शरीर में कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन D से जुड़े संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिन लोगों को क्रोनिक किडनी डिजीज होती है, तो उनमें इसका बैलेंस बिगड़ सकता है। किडनी की बीमारी में ब्लड वेसल्स में कैल्सिफिकेशन यानी कैल्शियम जमा होने जैसी समस्या हो सकती है। इससे ब्लड वेसेल्स सख्त हो जाती है और हार्ट से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती है।”
किन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है?
Dr. Vineet Malhotra ने कहा कि कुछ लोगों में किडनी और हार्ट दोनों से जुड़ी समस्याओं का खतरा ज्यादा हो सकता है। इससे कुछ लोगों को ज्यादा इनमें शामिल हैं:
- डायबिटीज से पीड़ित मरीज
- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
- ज्यादा वजन या मोटापे से जूझ रहे लोग
- स्मोकिंग करने वाले लोग
- उम्र बढ़ने के साथ क्रोनिक किडनी डिजीज का ज्यादा रिस्क वाले लोग
- परिवार में किडनी या हार्ट की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री वाले लोग
किडनी और हार्ट को सेहतमंद रखने के लिए क्या करें?
Dr. Vineet Malhotra ने कहा कि किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अपनी डाइट और दवाओं का खास ध्यान रखना चाहिए।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।
- नमक का इस्तेमाल सीमित करें।
- स्मोकिंग बिल्कुल न करें।
- हेल्दी वजन रखें।
- रेगुलर एक्सरसाइज जरूर करें।
- लंबे समय तक दर्द की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
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निष्कर्ष
Dr. Vineet Malhotra लोगों को सलाह देते हैं कि अगर किसी को चेहरे या पैरों पर सूजन, थकान, सांस फूलना या पेशाब की मात्रा कम या ज्यादा हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। यह समझना भी जरूरी है कि हर मरीज में किडनी की वजह से हार्ट की बीमारी हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों को रेगुलर चेकअप कराते रहना चाहिए।
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FAQ
कमजोर किडनी के कारण हाई ब्लड प्रेशर दिल पर क्या असर डालता है?
किडनियां ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाला रेनिन हार्मोन बनाती हैं। किडनी खराब होने पर यह संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे अनियंत्रित हाई बीपी रहता है। यह बढ़ा हुआ दबाव हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक और एरिदमिया का कारण बनता है।किडनी मरीजों में पोटेशियम और इलेक्ट्रोलाइट का असंतुलन दिल के लिए कितना खतरनाक है?
कमजोर किडनियां अतिरिक्त पोटेशियम को शरीर से बाहर नहीं निकाल पातीं। खून में पोटेशियम बढ़ने से दिल की धड़कन अचानक रुक सकती है, जो एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।
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Current Version
Aug 21, 2026 19:24 IST
Modified By : Aneesh Rawat Aug 21, 2026 19:24 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra
