Mon Oct 19, 2026 | 03:09 PM IST

Medically Reviewed by Dr Srikanth Madikattu , Consultant – Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon Manipal Hospitals, Pune

क्या हड्डियां कमजोर होने पर दांतों पर पड़ सकता है असर? डॉक्टर से समझें ऑस्टियोपोरोसिस और दांतों का कनेक्शन

हड्डियां कमजोर होने को लोग सिर्फ जोड़ों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हड्डियों में बदलाव आने का असर दांतों पर भी पड़ सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने ऑस्टियोपोरोसिस और दांतों के कनेक्शन को विस्तार से समझाया है।
क्या हड्डियां कमजोर होने पर दांतों पर पड़ सकता है असर? डॉक्टर से समझें ऑस्टियोपोरोसिस और दांतों का कनेक्शनक्या हड्डियां कमजोर होने पर दांतों पर पड़ सकता है असर? डॉक्टर से समझें ऑस्टियोपोरोसिस और दांतों का कनेक्शन

हड्डियों के दर्द का समय पर इलाज न हो, तो यह बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस में बदल सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस में लोग अक्सर अपने घुटनों के दर्द या जोड़ों के दर्द के लिए ही डॉक्टर की सलाह लेते हैं, लेकिन उन्हें जानकारी ही नहीं होती कि हड्डियां कमजोर होने पर जबड़े की हड्डियां भी कमजोर हो सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस का असर दांतों को जोड़े रखने वाली हड्डियों पर भी पड़ सकता है। इस बारे में हमने Dr. Srikanth Madikattu, Consultant, Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon, Manipal Hospital, Baner, Pune से बात की। उन्होंने बताया कि दांतों की समस्या को हड्डियों की सेहत से जोड़कर कम ही देखा जाता है, जबकि दांतों को मजबूत बनाए रखने में जबड़े की हड्डियां बहुत महत्वपूर्ण होती है। खासतौर पर जब बढ़ती उम्र में हड्डियों की डेंसिटी कम होने लगे, तो दांतों और मसूड़ों की सेहत पर भी ध्यान देना जरूरी है।

क्या ऑस्टियोपोरोसिस का असर दांतों पर भी पड़ सकता है?

Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं, “ऑस्टियोपोरोसिस की स्थिति में हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है और हड्डियों का अंदरूनी स्ट्रक्चर कमजोर होने लगता है। इससे हड्डियां नाजुक हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। अगर दांतों की बात करें, तो जबड़े की हड्डी को दांत सहारा देकर रखते हैं, ताकि ये अपनी जगह पर टिके रहें। अगर जबड़े की हड्डी को नुकसान पहुंचने लगता है या मसूड़ों की बीमारी के कारण दांतों के आसपास की हड्डी कमजोर होने लगे, तो दांतों को मिलने वाले इस सहारे पर असर पड़ सकता है। ऐसी कंडीशन में व्यक्ति के दांतों के हिलने या गिरने का रिस्क बढ़ सकता है।”

रिसर्च क्या कहती है?

New York State के Health Department ने ऑस्टियोपोरोसिस और दांतों के बीच के कनेक्शन के बारे में बताया है।
उम्रदराज लोगों में हड्डियों की कमजोरी और दांत गिरने की समस्या चिंता का विषय है। 65 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 3 में से 1 वयस्क दांत गिरने की समस्या से प्रभावित होते हैं।

  • अगर किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या है, तो दांत गिरने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। जब जबड़े की हड्डी की डेंसिटी कम हो जाती है, तो दांत गिर सकते हैं।
  • ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित महिलाओं में दांत गिरने की समस्या ज्यादा देखी गई है।

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क्या मेनोपॉज के बाद महिलाओं को दांतों की समस्या हो सकती है?

Dr. Srikanth Madikattu ने कहा, "महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर कम होने से मुंह और दांतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में महिलाओं को मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या भी गंभीर हो सकती है।"

Journal of Mid-life Health ने मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में दांतों और ऑस्टियोपोरोसिस पर रिसर्च की। उसमें 50 साल से ज्यादा उम्र की करीब 150 महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें महिलाओं के बोन मिनरल डेंसिटी की जांच की गई थी। जांच के बाद कुल महिलाओं में से 39% में ऑस्टियोपोरोसिस और 23% में ऑस्टियोपेनिया की समस्या देखी गई।

  • आधे से ज्यादा महिलाओं के दांत खराब थे।
  • कैविटी और दांत गिरने की समस्या सबसे ज्यादा पाई गई।
  • दांत खोने वाली 112 महिलाओं में औसतन प्रति महिला लगभग 4.8 दांत कम पाए गए।

ऑस्टियोपोरोसिस के अलावा दांतों की समस्या के क्या कारण हो सकते हैं?

Dr. Srikanth Madikattu ने बताया कि हर बार दांतों की समस्या का कारण ऑस्टियोपोरोसिस नहीं होता है। कई बार मसूड़ों में संक्रमण, दांतों के आसपास की हड्डी को नुकसान और मुंह की ठीक से सफाई न करना भी इसके कारण हो सकते हैं। अगर ब्रश करते समय मसूड़ों से बार-बार खून आता है, दांत हिलने लगे हैं या खाना चबाने में परेशानी हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे में डेंटिस्ट से जांच कराना जरूरी है, ताकि समस्या की सही वजह पता चल सके।

हड्डियों और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

Pune के Sahyadri Super Speciality Hospital के Orthopaedics Consultant Dr. Amol Tapadia ने कहा कि हड्डियों और दांतों की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • डाइट में कैल्शियम, विटामिन D और प्रोटीन से भरपूर फूड्स शामिल करें।
  • अपनी उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार रेगुलर फिजिकल एक्टिविटीज जरूर करें।
  • दांतों की सफाई के लिए रोजाना दो बार ब्रश करें, ताकि प्लाक जमा न हो और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं का रिस्क कम हो सके।
  • अगर दांतों या मसूड़ों में बार-बार परेशानी हो रही है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
  • अगर किसी को बार-बार फ्रैक्चर, लगातार पीठ दर्द या लंबाई में कमी जैसे बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • स्मोकिंग और शराब से परहेज करें।
  • अपने वजन को कंट्रोल में रखें।

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निष्कर्ष
अगर किसी को हड्डियों से जुड़ी समस्या है और साथ में दांतों की परेशानी हो रही है, तो दांतों की समस्या का कारण ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, कुछ मामलों में इसका कारण दांतों में इंफेक्शन भी हो सकता है। अगर दांतों के आस-पास की हड्डी को नुकसान हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। डॉक्टर मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, फ्रैक्चर के रिस्क और अन्य लक्षणों को ध्यान में रखकर बोन डेंसिटी टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

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FAQ

  • क्या पायरिया और ऑस्टियोपोरोसिस मिलकर दांतों को ज्यादा तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं?

    पायरिया और ऑस्टियोपोरोसिस, दोनों मिलकर स्थिति को और गंभीर बना देते हैं! पायरिया मसूड़ों का इंफेक्शन है, जो मसूड़ों और हड्डी को गलाता है। अगर मरीज को ऑस्टियोपोरोसिस भी हो, तो जबड़े की हड्डी बहुत तेजी से घुलने लगती है और दांत बहुत कम समय में ढीले होकर गिर जाते हैं।
  •  क्या डेंटिस्ट केवल 'ओरल एक्स-रे' देखकर ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती अंदेशा लगा सकते हैं?

    रूटीन डेंटल एक्स-रे में जबड़े की हड्डी की डेंसिटी और पैटर्न देखकर डेंटिस्ट यह पहचान सकते हैं कि मरीज में हड्डियों का घनत्व घट रहा है। वे मरीज को हड्डियों की जांच के लिए DEXA स्कैन कराने की सलाह दे सकते हैं।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 19, 2026 12:27 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Srikanth Madikattu