Sun Oct 25, 2026 | 11:03 AM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Vaish , Orthopaedician

कमजोर हड्डियों की पहचान कैसे करें? बिना चोट के फ्रैक्चर होना हो सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत

Symptoms Of Osteoporosis: ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियों के फ्रैक्चर होने का रिस्क ही नहीं बढ़ता है, बल्कि जबड़े की हड्डी पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इस लेख में ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ संकेतों और लक्षणों के बारे में विस्तार से जानें-समझें।
कमजोर हड्डियों की पहचान कैसे करें? बिना चोट के फ्रैक्चर होना हो सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का संकेतकमजोर हड्डियों की पहचान कैसे करें? बिना चोट के फ्रैक्चर होना हो सकता है ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत

कई तरह के पोषक तत्वों की कमी के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कई बार ऐसा ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से होता है। यही कारण है कि सबको ऑस्टियोपोरोसिस के संकेतों और इसके लक्षणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। आमतौर पर लोगों को लगता है कि ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियां आसानी से फ्रैक्चर हो जाती हैं। हालांकि, ऑस्टियोपोरोसिस का यह एकमात्र संकेत नहीं होता है। इसके कई अन्य संकेत भी हो सकते हैं।

इस बारे में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल और हिलिंग टच क्लीनिक के ऑर्थोपेडिक सर्जन और स्पोर्ट्स इंजरी स्पेशलिस्ट डॉ. अभिषेक वैश कहते हैं, "हड्डियों में दर्द, पीठ में दर्द और पोस्चर में बदलाव भी ऑस्टियोपोरोसिस का संकेत हो सकते हैं। इन संकेतों और लक्षणों की अनदेखी करना सही नहीं है।"

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है और यह हड्डियों को कैसे प्रभावित करता है?

Signs And Symptoms Of OsteoporosisSigns And Symptoms Of Osteoporosis

ऑस्टियोपोरोसिस का मतलब होता है, हड्डियों का अंदर से खोखला या छलनी जैसा हो जाना। यह हड्डियों से जुड़ी एक पुरानी और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी तब होती है जब शरीर में हड्डियों का घनत्व यानी बोन मास बहुत तेजी से कम होने लगता है या नई हड्डियां बहुत धीमी गति से बनती हैं। कभी-कभी दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं।

जहां तक सवाल इस बात का है कि आखिर ऑस्टियोपोरोसिस हमारी हड्डियों को कैसे प्रभावित करता है, इस पर डॉ. अभिषेक वैश बताते हैं-

  • हमारी हड्डियां लिविंग टिश्यू होती हैं। जीवनभर शरीर पुरानी हड्डियों को तोड़ता रहता है और उनकी जगह नई हड्डियां बनाता रहता है। खासकर, 35 साल की उम्र के बाद बोन लॉस (Bone Resorption) की दर नई हड्डी बनने (Bone Formation) से तेज हो जाती है।
  • लेकिन, ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियों का क्षरण (नुकसान) बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे हड्डियां पतली, कमजोर और अंदर से इतनी नाजुक हो जाती हैं कि आसानी से टूट सकती हैं।

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बिना चोट के फ्रैक्चर होनाः ऑस्टियोपोरोसिस का सबसे बड़ा चेतावनी संकेत

इसमें कोई दो राय नहीं है कि ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां आसानी से फ्रैक्चर हो जाती हैं। इसलिए, इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है। सवाल है ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे भी कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे-

  • हड्डियों में कमजोरीः National Institute of Arthritis and Musculoskeletal and Skin Diseases के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस एक साइलेंट डिसीज है। इसकी वजह से हड्डियां अंदर से कमजोर और खोखली हो जाती हैं और इसके शुरुआती दौर में अक्सर कोई लक्षण महसूस नहीं होते हैं।
  • फ्रैक्चर का जोखिमः ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां इतनी नाजुक हो जाती हैं कि मामूली झटके, गिरने या यहां तक कि झुकने और खांसने से भी कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियां आसानी से टूट सकती हैं।

कमजोर हड्डियों की पहचान करने के लिए जरूरी मेडिकल टेस्ट

Cleveland Clinic के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस की पहचान करने के लिए डॉक्टर बोन डेंसिटी टेस्ट (हड्डी घनत्व परीक्षण) करने की सलाह देते हैं। डॉक्टर कभी-कभी इस टेस्ट को DEXA स्कैन, DXA स्कैन या Bone Density स्कैन भी कहते हैं। ये सभी एक ही जांच के अलग-अलग नाम हैं।

बोन डेंसिटी टेस्ट में एक्स-रे किरणों का उपयोग करके यह मापा जाता है कि हड्डियों में कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा कितनी है। यह प्रक्रिया सामान्य एक्स-रे की तरह ही होता है।

हड्डियों के घनत्व में होने वाले बदलावों की जांच कराना ऑस्टियोपोरोसिस को फ्रैक्चर से पहले पकड़ने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है। कुछ लोगों को डाॅक्टर इस जांच को कराने की सलाह बार-बार दे सकते हैं, जैसे-

  • परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास होने पर।
  • 50 वर्ष से अधिक उम्र होने पर।
  • ऑस्टियोपेनिया (हड्डियों का घनत्व सामान्य से कम) की समस्या होने पर।
  • मेनोपॉज के दौर से गुजर चुकी महिलाओं को।

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हड्डियों के घनत्व में कमी के शुरुआती शारीरिक लक्षण

  1. मसूड़ों का खिसकनाः आपको जानकर हैरानी होगी कि ऑस्टियोपोरोसिस होने पर मसूड़ों की हड्डियां पीछे की ओर खिसकने लगती हैं। दरअसल, जबड़े की हड्डी दांतों को सहारा देती है। जब जबड़े की हड्डी की डेंसिटी कम होने लगे, तो मसूड़े पीछे हटने लगते हैं।
  2. नाखून में कमजोरीः ऑस्टियोपोरोसिस में नाखून कमजोर और नाजुक हो जाते हैं। दरअसल, कोलेजन या कैल्शियम की कमी, हड्डियों को प्रभावित करती है, नाखूनों को भी कमजोर कर सकती है, जिससे वे आसानी से चटकने, फटने या टूटने लगते हैं।
  3. हाथों की पकड़ कमजोर होनाः अगर आप महसूस करें कि आपकी ग्रिप कमजोर हो गई है, जैसे आसानी से किसी सामान को नहीं पकड़ पाते हैं या किसी जार का ढक्कन खोलने में परेशानी हो रही है, तो इसे मांसपेशियों व हड्डियों की घटती मजबूती का संकेत समझें।
  4. पोस्चर में बदलावः अगर आप महसूस करें कि आपकी पीठ में हल्का सा आगे की ओर झुकाव दिखने लगा है, तो यह रीढ़ की हड्डियों के शुरुआती दबाव या दबने का संकेत हो सकता है।
  5. फ्रैक्चर का रिस्कः अगर मांसपेशियों व हड्डियों में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, रोजमर्रा के कामकाज करने के दौरान हड्डियों पर हल्का स्ट्रेस पड़ने से हड्डी फ्रैक्चर हो रही है, तो समझ जाएं कि हड्डियों की आंतरिक बनावट कमजोर हो रही है।

ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव

NHS के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने के लिए आप अपनी जीवनशैली में जरूरी बदलाव कर सकते हैं, जैसे-

  1. एक्सरसाइज करेंः 19 से 64 साल की उम्र के एक वयस्क व्यक्ति को रोजाना एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसमें साइक्लिंग, वाॅकिंग आदि शामिल हैं। क्षमता के अनुसार 30 से लेकर 2 घंटे तक का वर्कआउट किया जा सकता है।
  2. विटामिन डी सप्लीमेंट लेंः हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन डी सप्लीमेंट बहुत जरूरी है। हालांकि, किसी भी तरह के सप्लीमेंट लेने से पहले डाॅक्टर की सलाह जरूर लें। इसके साथ-साथ कैल्शियम का सेवन करना भी आवश्यक होता है।
  3. स्मोकिंग न करेंः खासकर, जिन लोगों के परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास है, उन्हें स्मोकिंग या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों से दूर रहना चाहिए। विशेषकर, शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
  4. धूप में रहेंः विटामिन डी के प्रोडक्शन के लिए सूरज की रोशनी बहुत मददगार होती है। इसलिए, रोजाना कुछ मिनट सूरज की रोशनी के सामने बैठें। इससे दांत और हड्डियां भी मजबूत होती हैं।

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निष्कर्ष

हड्डियों का कमजोर होना, बोन डेंसिटी में कमी आना सही नहीं है। ये सभी ऑस्टियोपोरोसिस के संकेत हैं। अगर आपको इसकी सटीक जानकारी नहीं मिलती है, तो बेहतर होगा कि समय पर डाॅक्टर के पास जाएं और इसकी जांच करवाएं। आप समय रहते जीवनशैली से जुड़ी अच्छी आदतों को अपनाकर इस समस्या के जोखिम को कम कर सकते हैं। अगर किसी को ऑस्टियोपोरोसिस हो गया है, तो उन्हें निरंतर डाॅक्टर से अपनी जांच करवाते रहना चाहिए।

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FAQ

  • क्या ऑस्टियोपोरोसिस के कारण किसी व्यक्ति की लंबाई धीरे-धीरे कम हो सकती है?

    हां, ऐसा हो सकता है। दरअसल, रीढ़ की हड्डियों में बिना दर्द के होने वाले सूक्ष्म फ्रैक्चर (Vertebral Compression Fractures) के कारण व्यक्ति की लंबाई 1 से 2 इंच तक घट सकती है।
  • क्या लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है?

    जब कोई लगातार 3 महीने से अधिक समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करता है, तो इससे शरीर में कैल्शियम अवशोषण रुक जाता है, जिससे हड्डियां तेजी से खोखली होने लगती हैं।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 25, 2026 09:55 IST

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