हरी घास पर नंगे पैर चलना सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। घास पर चलने से तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिलती है। हालांकि, घास पर नंगे पै चलना हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता है। कुछ खास स्थितियों और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को हरी घास पर नंगे पैर चलने से बचना चाहिए। आइए, Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से जानते हैं कि किन लोगों को और किन स्थितियों में घास पर नंगे पैर चलने से परहेज करना चाहिए, ताकि आपकी स्थिति ज्यादा गंभीर न हो जाए।
किन लोगों के लिए घास पर नंगे पैर चलना हो सकता है खतरनाक
Dr. Akshay Chugh का कहना है कि घास पर चलना भले ही अच्छी आदत है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता है। कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और बीमारियों से जूझ रहे लोगों को हरी घास पर नंगे पैर चलने से बचना चाहिए। इन लोगों में शामिल हैं-
1. डायबिटीज के मरीज
डायबिटीज के मरीजों के लिए नंगे पैर चलना किसी खतरे से कम नहीं होता है। लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने पर पैरों की नसें सुन्न होने लगती हैं, जिसे डायबिटीज न्यूरोपैथी के रूप में जाना जाता है। ऐसे मरीजों को पैरों में चुभने वाली चीजें जैसे- कांच के टुकड़े, कील, कांटे या जहरीले कीड़े-मकोड़े से बचकर रहना जरूरी है।
इसे भी पढ़ें: क्या घास पर नंगे पैर चलने से सच में हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है? जानें डॉक्टर से
घास में छोटे-छोटे कंकड़ या कीड़े के काटने से अगर पैरों में मामूली खरोंच भी लग जाए तो डायबिटीज के कारण वह घाव जल्दी भरता नहीं है। आगे चलकर यह डायबेटिक फुट अल्सर या गैंग्रीन का रूप ले सकता है, जिसे पैर काटने तक की नौबत आ सकती है।
साल 2007 में Rural Remote Health में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों के लिए नंगे पैर चलना पैर की बीमारियों और अल्सर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
2. कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
वे लोग जिनका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर है, जैसे कीमोथेरपी ले रहे कैंसर के मरीज, HIV पीड़ित या वे लोग जो लंबी बीमारी के बाद बहुत कमजोर हैं। गीली घास और मिट्टी में अनगिनत फंगस, बैक्टीरिया और परजीवी पाए जाते हैं। अगर पैर की स्किन में कोई माइक्रो-क्रैक या कट है तो ये फंगस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर में जा सकते हैं। कमजोर इम्युनिटी के कारण इन लोगों को गंभीर स्किन इंफेक्शन या फंगल बीमारियां होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
3. हाल ही में सर्जरी या पैर के घाव से पीड़ित लोग
अगर आपके पैरों, एंकल या तलवों पर कोई खुला घाव, अल्सर, हाल ही में टांके लगे हों या कोई सर्जिकल चीरा हो, उन्हें भी घास पर चलने से बचना चाहिए। घास और ओस के संपर्क में आने से खुले घाव में सीधे नमी और बैक्टीरिया पहुंच जाते हैं। इससे घाव में पस पड़ सकता है। साथ ही, इंफेक्शन फैलने का खतरा कम हो सकता है और हीलिंग प्रोसेस धीमा हो जाता है।
4. गंभीर गठिया या जोड़ों के दर्द के मरीज
रोजाना हल्की वॉक करना जोड़ों के लिए अच्छा होता है, लेकिन जिन लोगों को गंभीर अर्थराइटिस या जोड़ों में सूजन की समस्या है, उन्हें घास पर चलने से बचना चाहिए। सुबह के समय घास पर बहुत ज्यादा ओस होती है, जिसके कारण तापमान कम और नमी ज्यादा होती है। ज्यादा ठंडक और नमी सीधे पैरों के तलवों और नसों के जरिए जोड़ों तक पहुंचती है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन, जकड़न और जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है।
5. गंभीर एलर्जी या स्किन एलर्जी
जिन लोगों को घास-फूस, परागकण या मिट्टी से किसी तरह की एलर्जी है, उन्हें भी घास पर नंगे पैर नहीं चलना चाहिए। घास में मौजूद कण, फफूंद के बीजाणु या वहां घूमने वाले कीड़े-मकोड़े सेंसिटिव स्किन पर रिएक्शन कर सकते हैं। इससे पैरों में तेज खुजली, लाल चकत्ते, सूजन और फफोले की समस्या हो सकती है।
इसे भी पढ़ें: क्या घास पर चलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है? आयुर्वेद एक्सपर्ट से जानें
Risk-of-walking-barefoot-on-grass
घास पर चलने से पहले किन बातों का रखें खास ध्यान
- सुबह के समय ओस से भीगी हुई घास पर चलना सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर ठंड बहुत ज्यादा हो या घास पर केमिकल छिड़के गए हों तो उस पर चलने से बचें।
- हमेशा किसी पार्क, साफ-सुथरे लॉन या बगीचे की घास पर ही चलें। ऐसी जगहों पर चलने से बचें, जहां कांच के टुकड़े, नुकीले पत्थर, कांटे या कचरा होने का खतरा हो।
- अगर आपको घास या कीड़ों से एलर्जी है तो नंगे पैर चलने से पहले सावधानी बरतें। कीड़ों से बचाव के लिए हल्के नेचुरल तेल या स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- अगर आप पहली बार नंगे पैर चल रहे हैं तो शुरुआत 5 से 10 मिनट से करें। जब पैर और तलवे घास के आदि हो जाएं तो घास पर चलने का समय बढ़ा सकते हैं।
- घास पर वॉर करने के तुरंत बाद घर आकर अपने पैरों को गुनगुने पानी और साबुन से अच्छी तरह धोकर साफ तोलिए से पैर साफ कर लें, ताकि कोई धूल, कीचड़ या कीड़ा न चिपका रहे।
निष्कर्ष
डायबिटीज के मरीज, कमजोर इम्यूनिटी, पैर में घाव या चोट होने या घास से एलर्जी जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों को नंगे पैर घास पर चलने से बचना चाहिए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आप घास पर बिल्कुल नहीं चल सकते हैं। अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेकर और ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए घास पर नंगे पैर चल सकते हैं।
Image Credit: Freepik
FAQ
सुबह-सुबह हरी घास पर चलने से क्या होता है?
सुबह-सुबह हरी घास पर नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी तेज होती है और तनाव कम होता है। इसके अलावा, शरीर की नसें शांत होती हैं और पैरों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दबने से ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है।क्या हरी घास पर चलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?
आमतौर पर हरी घास पर चलना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, लेकिन सुबह ज्यादा ठंड या ओस होने पर सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ सकता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Oct 25, 2026 07:07 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Akshay Chugh
