हड्डी टूटना यानी फ्रैक्चर एक ऐसी चोट है जो न सिर्फ दर्द देती है बल्कि कई तरह की चिंता का कारण भी बनती है। जैसे ही किसी की हड्डी टूटती है, शुरुआती दिनों में तेज दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी होना आम बात है लेकिन जैसे-जैसे इलाज शुरू होता है और हड्डी जुड़ने लगती है, मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ठीक होने के दौरान भी दर्द रहना सामान्य है या यह किसी समस्या का संकेत है। कई लोग यह सोचकर घबरा जाते हैं कि अगर कुछ हफ्तों बाद भी हल्का दर्द या खिंचाव महसूस हो रहा है, तो शायद हड्डी सही से नहीं जुड़ रही है लेकिन कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. आकाश सिंघल के अनुसार, यह स्थिति ज्यादातर मामलों में सामान्य होती है।
क्या टूटी हड्डियां जुड़ने के दौरान भी दर्द होता है?
डॉ. आकाश सिंघल के अनुसार, फ्रैक्चर के शुरुआती दिनों में दर्द ज्यादा तेज होता है क्योंकि उस समय चोट के कारण सूजन और आसपास के टिश्यू में सूजन यानी इंफ्लेमेशन काफी ज्यादा होती है। यह शरीर का नेचुरल रिएक्शन होता है, जो चोट को ठीक करने की प्रोसेस को शुरू करती है। जैसे-जैसे समय बीतता है और हड्डी धीरे-धीरे जुड़ने लगती है, तेज दर्द कम हो जाता है। हालांकि, पूरी तरह ठीक होने तक हल्का दर्द या बेचैनी महसूस होना सामान्य माना जाता है।
- जब हड्डी टूटती है, तो शरीर उस हिस्से को फिर से जोड़ने के लिए नई हड्डी बनाना शुरू करता है। इस प्रक्रिया में आसपास की मांसपेशियां, लिगामेंट्स और टिशू भी प्रभावित होते हैं और धीरे-धीरे ठीक होते हैं।
- अगर मरीज ज्यादा एक्टिविटी कर लेता है या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है, तो हल्की असहजता या दर्द महसूस हो सकता है।
- यह जरूरी नहीं कि किसी समस्या का संकेत हो, बल्कि यह शरीर की सामान्य रिकवरी प्रक्रिया का हिस्सा है। कई मरीजों को यह दर्द हफ्तों या कभी-कभी महीनों तक भी हल्के रूप में महसूस हो सकता है।
साल 2018 में Current Osteoporosis Reports में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, हड्डियों का जुड़ना (fracture healing) एक बेहद गंभीर लेकिन नेचुरल प्रोसेस है। इसमें मुख्य रूप से चार स्टेज होती हैं, हेमेटोमा (खून का थक्का) बनना, ग्रेन्युलेशन टिशू का बनना, कैलस यानी कच्ची हड्डी बनना और अंत में बोन रीमॉडलिंग यानी हड्डी का पुराना आकार लेना। ये सभी स्टेज एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इस पूरी प्रोसेस में 'मेसेनकाइमल स्टेम सेल्स' (MSCs) सबसे अहम भूमिका निभाती हैं, जो मुख्य रूप से पेरिओस्टियम और एंडोस्टियम से मिलती हैं। इसके साथ ही इंफ्लेमेटरी सेल्स, फाइब्रोब्लास्ट, ऑस्टियोब्लास्ट और ऑस्टियोक्लास्ट जैसी सेल्स मिलकर टूटी हुई हड्डी को फिर से मजबूत और पहले जैसा बनाने का काम करती हैं।

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डॉक्टर की सलाह
डॉ. आकाश सिंघल बताते हैं कि हड्डी टूटने के बाद जुड़ने में हल्का दर्द सामान्य है, लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द समय के साथ कम होने की बजाय बढ़ने लगे, सूजन बढ़ जाए, घाव से पानी आने लगे, बुखार हो, सुन्नपन महसूस हो या प्रभावित अंग का उपयोग अचानक मुश्किल हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये संकेत किसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और समय पर जांच जरूरी होती है।
निष्कर्ष
टूटी हुई हड्डी के ठीक होने के दौरान हल्का दर्द या खिंचाव महसूस होना सामान्य और नेचुरल प्रोसेस का हिस्सा है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर खुद को ठीक करने में लगा हुआ है। आमतौर पर समय के साथ दर्द धीरे-धीरे कम होता जाता है, भले ही कभी-कभी हल्का दर्द फिर से महसूस हो सकता है लेकिन अगर दर्द बढ़ता जाए या अन्य असामान्य लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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FAQ
फ्रैक्चर के बाद दर्द कितने समय तक रहता है?
फ्रैक्चर के बाद हल्का दर्द या असहजता कई हफ्तों से लेकर कुछ मामलों में महीनों तक रह सकता है।हड्डी टूटने के बाद कितने दिन में चल सकते हैं?
हड्डी टूटने के बाद कितने दिन में चल सकते हैं ये बात इस पर निर्भर करती है कि व्यक्ति की कौन सी हड्डी टूटी है और इलाज कैसा हो रहा है।हड्डी टूटने के बाद ठीक होने के क्या लक्षण हैं?
हड्डी टूटने के बाद ठीक होने के दौरान धीरे-धीरे दर्द और सूजन कम होने लगती है और उस हिस्से पर हल्का दबाव डालने पर भी दिक्कत होनी कम हो जाती है।
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Jul 26, 2026 21:13 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Akash Singhal