Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bala Raja Sekhar Chandra , Sr. Consultant - Neuro & Spine Surgeon

रीढ़ की हड्डी को कमजोर कर सकती हैं ये 5 खराब आदतें, आज ही छोड़ें इन्हें

उम्र के साथ स्‍पाइन कमजोर होती है, लेक‍िन जब समय से पहले पीठ दर्द और स्‍पाइनल समस्‍याएं होने लगें, तो समझ जाएं यह गलत आदतों को अपनाने का खाम‍ियाजा है ज‍िसे आपकी स्‍पाइन को भुगतना पड़ता है। जानें ऐसी 5 आदतें जो स्‍पाइन की सेहत को खराब कर सकती हैं। 

रोजमर्रा की कई ऐसी आदतें हैं ज‍िनके कारण स्‍पाइन पर जोर पड़ता है। चलने-फ‍िरने, उठने-बैठने के ल‍ि‍ए स्‍पाइन के सपोर्ट की जरूरत होती है, लेक‍िन स्‍पाइन को हेल्‍दी रखने के बजाय हम सेहत के साथ लापरवाही करते हैं ज‍िसका बुरा स्‍पाइन पर भी होता है और वो कमजोर हो सकती है। जब हम बार-बार खराब आदतें अपनाते हैं, तो स्‍पाइन, ड‍िस्‍क और जोड़ों पर दबाव बनता है ज‍िससे अकड़न, नसों में दर्द, झुनझुनी जैसी समस्‍याएं होने लगती हैं। आगे जानते हैं क‍िन खराब आदतों के कारण स्‍पाइन कमजोर हो सकती है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।

स्‍पाइन को कमजोर कर सकती हैं ये खराब आदतें

bad-habits-that-make-spine-weak

1. ज्‍यादा देर बैठना

अगर आप पूरे द‍िन बैठकर काम करते हैं, तो इस आदत से स्‍पाइन की सेहत खराब हो सकती है। पूरे द‍िन बैठने से मांसपेश‍ियों में अकड़न हो सकती है।

2. एक्‍सरसाइज न करना

साथ ही अगर आप एक्‍सरसाइज नहीं करते हैं, तो कोर कमजोर हो सकता है और बैक मसल्‍स से सपोर्ट नहीं म‍िलता ज‍िससे स्‍पाइन हेल्‍थ खराब हो सकती है।

3. भारी वजन उठाना

भारी सामान उठाने के कारण या ज्‍यादा झुककर काम करने के कारण ड‍िस्‍क इंजरी का खतरा बढ़ जाता है। कंधों पर हैवी बैग रखने के कारण स्‍पाइन कमजोर हो सकती है।

4. झुककर काम करना

डेस्‍क पर झुककर काम करते हैं, तो स्‍पाइन पर जोर पड़ता है और लंबे समय तक यह आदत फॉलो करने के कारण स्‍पाइन हेल्‍थ को नुकसान पहुंचता है।

5. धूम्रपान करना

अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो भी स्‍पाइन को नुकसान पहुंचता है और दर्द बढ़ सकता है। साल 2021 में Surgical Neurology International नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, स्‍मोक‍िंग थ्रोम्‍बोस‍िस को ट्र‍िगर करती है ज‍िससे स्पॉन्डिलाइटिस का खतरा बढ़ता है। साथ ही स्‍टडी में बताया गया है क‍ि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें सर्ज‍िकल फेल‍ियर का खतरा ज्‍यादा होता है यानी अगर स्‍पाइनल समस्‍याओं के ल‍िए सर्जरी की गई, तो स्‍मोकर्स में उसके सफल होने का संभावना कम होती है।

यह भी पढ़ें- लगाकर पीठ में दर्द कहीं स्‍पाइनल अर्थराइट‍िस तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें लक्षण और कारण

स्‍पाइन की सेहत के ल‍िए अपनाएं ये ट‍िप्‍स

बेडरूम

  • बैक पेन या स्‍टि‍फनेस से बचने के ल‍िए सोने के ल‍िए अच्‍छा गद्दा चुनें।
  • स्‍पाइन को सपोर्ट करने के ल‍िए पीठ के बल के सोएं या एक साइड सोएं।

वर्कप्‍लेस

  • लैपटॉप को अपने आई लेवल पर रखें। इससे स्‍पाइन पर जोर नहीं पड़ता।
  • लोअर बैक को सपोर्ट करने के ल‍िए आरामदायक कुर्सी चुनें।
  • बैठते समय पैरों को जमीन पर ट‍िकाकर 90 ड‍िग्री पर रखें इससे स्‍पाइन को सपोर्ट म‍िलेगा।
  • ज्‍यादा झुककर फोन या लैपटॉप चलाने से बचें।

घर के बाहर

  • क‍िसी भी भारी सामान को ज्‍यादा देर कंधे पर टांगकर न घुमें।
  • सामान उठाने के ल‍िए क्रॉसबॉडी बैग का इस्‍तेमाल करें ताक‍ि बोझ दोनों कंधों पर बंट जाएं।

घर के भीतर

  • लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से बचें।
  • लगातार बैठे रहने का काम है, तो बीच-बीच में ब्रेक लेना न भूलें।
  • ब्रेक के दौरान वॉक और स्‍ट्रेच‍िंग करें।

यह भी पढ़ें- ऑफिस में कमर दर्द से रहते हैं परेशान? अपने बैठने की पोजीशन में करें ये 5 बदलाव

डॉक्‍टर को कब द‍िखाएं?

खराब आदतों के कारण स्‍पाइन की समस्‍याएं समय के साथ बढ़ने लगती हैं। अगर पीठ, कमर या गर्दन में तेज दर्द हो, तो देर क‍िए बगैर डॉक्‍टर से संपर्क करें। साथ ही पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी भी स्‍पाइन की समस्‍या हो सकती है ज‍िसे लोग अक्‍सर पैरों की समस्‍या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसी स्‍थ‍िति‍ में डॉक्‍टर से संपर्क करें और जरूरत पड़ने पर एमआरआई या सीटी स्‍कैन जैसी जांच कराएं। स्‍पाइन की तकलीफ को नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए वरना स्‍ल‍िप ड‍िस्‍क, स्‍पाइनल अर्थराइट‍िस, ड‍िस्‍क ड‍िजनरेशन, नस दबना या क्रॉन‍िक बैक पेन जैसी समस्‍याओं का खतरा बढ़ सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

ज्‍यादा देर बैठना, एक्‍सरसाइज न करना, भारी वजन उठाना, झुककर काम करना, धूम्रपान करने से स्‍पाइन कमजोर हो सकती है। बचाव के ल‍िए बैठने या खड़े रहने से बचें, क्रॉसबॉडी बेग से दोनों कंधों पर सामान का वजन दें, लैपटॉप को आई लेवल पर रखकर काम करें, पीठ के बल सोएं वगैरह। पीठ दर्द या पैरों में सुन्नपन, झुनझनी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

FAQ

  • स्‍पाइन के ल‍िए सोने की बेस्‍ट पोजीशन कौन सी है?

    स्‍पाइन को हेल्‍दी रखने के ल‍िए पीठ के बल सोएं या एक साइड करवट लेकर सोएं। पेट के बल सोने से स्‍पाइन पर जोर पड़ सकता है।
  • ड्राइव करने से भी स्‍पाइन की सेहत ब‍िगड़ती है?

    हां, जो लोग लंबे समय तक ड्राइव करते हैं उनकी कमर या पीठ पर दबाव बन सकता है और स्‍पाइनल समस्‍याएं होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। इसल‍िए समय-समय पर ब्रेक लेना और स्‍ट्रेच‍िंग करना जरूरी है। 
  • स्‍पाइन को मजबूत करने के ल‍िए कौन सी एक्‍सरसाइज करें?

    ब्र‍िज एक्‍सरसाइज, बर्ड-डॉग, कैट-काउ स्ट्रेच, प्लैंक, कोर स्‍ट्रेंथ एक्‍सरसाइज वगैरह करके स्‍पाइन को मजबूत बना सकते हैं।

Read Next

लगाकर पीठ में दर्द कहीं स्‍पाइनल अर्थराइट‍िस तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें लक्षण और कारण

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 08, 2026 17:34 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jul 08, 2026 17:34 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content