आज से कुछ समय पहले स्पाइनल अर्थराइटिस को लेकर लोगों में चिंता नजर नहीं आती थी, क्योंकि इसे बुजुर्गों को होने वाली बीमारी समझा जाता था। हालांकि, यह बीमारी अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है। स्पाइनल अर्थराइटिस वैसे तो एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसे समय पर कंट्रोल किया जा सकता है और इसे जरूरी कदम उठाकर कंट्रोल किया जा सकता है। स्पाइनल अर्थराइटिस में गर्दन, पीठ और कमर में दर्द, अकड़न और सूजन होती है जो किसी पेनकिलर या बाम से ठीक नहीं होती है, बल्कि इसके लक्षणों को जांच के बाद डॉक्टर ही कंट्रोल कर सकते हैं। चलिए जानते हैं स्पाइनल अर्थराइटिस आखिर क्या है और इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।
क्या है स्पाइनल अर्थराइटिस?

स्पाइनल अर्थराइटिस होने पर स्पाइन के जोड़ों, डिस्क या आसपास के टिशूज में सूजन आ जाती है। इस वजह से दर्द और अकड़न महसूस होती है। साल 2022 में Annals Of Physical And Rehabilitation Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, सुबह 30 मिनट से ज्यादा पीठ में अकड़न होना बुजुर्गों में स्पाइनल अर्थराइटिस का मुख्य संकेत है। साल 2023 में Journal Of Orthopedic Oncology नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, स्पाइनल अर्थराइटिस का कोई तय कारण नहीं है। हालांकि यह उम्र बढ़ने या कुछ मामलों में जेनेटिक कारणों से होता है।
यह भी पढ़ें- लगातार पीठ दर्द हो सकता है रीढ़ की गंभीर बीमारी का संकेत, डॉक्टर से जानें लक्षण
स्पाइनल अर्थराइटिस के लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं
- स्लिप डिस्क होने पर अचानक तेज दर्द होता है जबकि स्पाइनल अर्थराइटिस की स्थिति में दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है और समय के साथ बढ़ सकता है। इस स्थिति में पीठ या गर्दन के किसी खास हिस्से में दर्द उठता है जिसे अक्सर टीस उठने के तौर पर देखा जाता है।
- जैसे-जैसे समय बढ़ता है, दर्द शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द स्पाइन के साथ-साथ गर्दन, कंधे और बाहों तक भी फैल सकता है। साथ ही शरीर के निचले हिस्से यानी हिप्स, जांघ और पैरों तक भी दर्द जा सकता है।
- स्पाइनल अर्थराइटिस होने पर चलने-फिरने की क्षमता कम होने लगती है और सिर घुमाने या आगे झुकने में भी परेशानी होने लगती है।
यह भी पढ़ें- हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्न पड़ना कब हो सकता है रीढ़ की बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें
खराब पॉश्चर और भारी सामान उठाने की आदत को हल्के में न लें
अगर आप सोच रहे हैं कि स्पाइनल अर्थराइटिस जैसी गंभीर बीमारी के पीछे छुपे कारण भी गंभीर होंगे, तो आपको बता दें कि रोजमर्रा की खराब आदतें इस गंभीर बीमारी को जन्म दे सकती है जैसे-
- चलने या बैठने के दौरान बॉडी पॉश्चर सही न होना।
- भारी सामान उठाना और ज्यादा नीचे झुकना।
- कंधे पर भारी सामान उठाना।
- धूम्रपान के कारण भी स्पाइनल अर्थराइटिस हो सकता है। धूम्रपान से स्पाइन टिशूज में ब्लड फ्लो कम हो जाता है।
- लंबे समय तक स्लीप सपोर्ट न मिलने के कारण भी स्पाइन पर जोर पड़ सकता है और स्पाइनल अर्थराइटिस हो सकता है।
- एक्सरसाइज की कमी, बैठे रहने की आदत, वजन ज्यादा होना भी इसके प्रमुख कारण हैं।
यह भी पढ़ें- क्या घंटों एक-जगह बैठने की आदत से स्लिप डिस्क हो सकता है? डॉक्टर से जानें
हल्के और गंभीर मामलों के इलाज में अंतर
- स्पाइनल अर्थराइटिस में इलाज की जरूरत तब पड़ती है जब दर्द दवाएं और एक्सरसाइज की मदद से भी न जाए और एक्स-रे, एमआरआई जैसी जांच में अर्थराइटिस नजर आए।
- स्पाइनल अर्थराइटिस के बेहद गंभीर मामलों में स्पाइनल फ्यूजन (Spinal Fusion) और लैमिनेक्टॉमी (Laminectomy) की जाती है ताकि नसों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके।
- स्पाइनल अर्थराइटिस के ज्यादातर मरीज जो कम गंभीर श्रेणी में आते हैं, उनका इलाज दवाएं, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज, मसाज, वेट लॉस वगैरह के साथ किया जाता है।
निष्कर्ष:
स्पाइनल अर्थराइटिस होने के पीछे कई खराब आदतें होती हैं जैसे भारी सामान उठाना, बॉडी पॉश्चर खराब होना, धूम्रपान करना, एक्सरसाइज न करना, ज्यादातर समय बैठकर बिताना, मोटापा वगैरह। इसे ठीक करने के लिए दवाएं, फिजियोथेरेपी, सर्जरी की मदद ली जाती है।
FAQ
क्या स्पाइनल अर्थराइटिस के हर मरीज की सर्जरी होती है?
सभी मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। फिजियोथेरेपी, दवाएं और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसकी संभावना को कम किया जाता है। सर्जरी केवल गंभीर मामलों में होती है।स्लिप डिस्क और स्पाइनल अर्थराइटिस में क्या अंतर है?
स्लिप डिस्क होने पर स्पाइन की डिस्क खिसकने के कारण नसों पर दबाव पड़ता है और स्पाइनल अर्थराइटिस में स्पाइन के जोड़ों में घिसाव या सूजन होने लगती है।स्पॉन्डिलाइटिस और स्पाइनल अर्थराइटिस में क्या अंतर है?
स्पॉन्डिलाइटिस, स्पाइन की सूजन संबंधी बीमारी है जिसमें ऑटोइम्यून की भूमिका होती है वहीं स्पाइनल अर्थराइटिस, स्पाइन के जोड़ों के घिसने या सूजन के कारण होता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 08, 2026 16:32 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jul 08, 2026 16:32 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra