Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajasekara C Madarasu , Senior Consultant Nephrologist | Clinical Director & Head of Department - Nephrology & Transplant Services

क्रॉनिक किडनी डिजीज में लो ब्लड शुगर की समस्या क्यों होती है? डॉक्‍टर से समझें दोनों का संबंध

क‍िडनी के मरीज अक्‍सर शुगर लेवल का ध्‍यान रखना भूल जाते हैं, लेक‍िन क‍िडनी और ब्‍लड शुगर लेवल का गहरा कनेक्‍शन है। दोनों का एक दूसरे पर गहरा असर होता है। जानते हैं दोनोंं में क्‍या कनेक्‍शन है?

क्रॉन‍िक क‍िडनी डि‍जीज तब होता है जब क‍िडनी कुछ महीने से ज्‍यादा समय के ल‍िए डैमेज होती हैं। क्रॉन‍िक कि‍डनी ड‍िजीज की शुरुआती स्‍टेज में अक्‍सर कोई लक्षण नजर नहीं आता है, लेक‍िन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कंडीशन गंंभीर हो जाती है। क्रॉन‍िक क‍िडनी डि‍जीज के मरीजोंं को अक्‍सर लो ब्‍लड शुगर लेवल की समस्‍या होती है। जानें इसके पीछे क्‍या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के लि‍ए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Senior Consultant Nephrologist, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

क्रॉनिक किडनी डिजीज और लो ब्लड शुगर का संंबंध

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क‍िडनी शरीर में अत‍िर‍िक्‍त इंंसुल‍िन को घटाने और सही शुगर लेवल को मेनटेन करने का काम करती है। क्रॉन‍िक क‍िडनी डि‍जीज में अक्‍सर मरीजों को लो ब्‍लड शुगर लेवल की श‍िकायत होती है। क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज के बहुत से लोग डाइट से पर्याप्‍त ग्‍लूकोज नहीं ले पाते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे डाइट खराब होना, तबीयत ठीक न होना, ईट‍िंंग पैटर्न में असामान्‍य बदलाव होना।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2014 में Mayo Clinic Proceedings में पब्‍ल‍िश एक र‍िव्‍यू के मुताब‍िक, लो ब्‍लड शुगर लेवल
का खतरा क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज और डायब‍िट‍िक मरीजों में ज्‍यादा देखी जाती है। इसके दो मुख्‍य कारण बताए गए हैं पहला शरीर के हार्मोन बनाने की क्षमता कम होना और ठीक ढंग से दवाओंं का सेवन न करना।

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हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा

क्रॉनिक किडनी डिजीज होने पर जब क‍िडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है, तो इंसुल‍िन और डायब‍िटीज की कई दवाएं लंंबे समय तक ब्‍लड में मौजूद रहती हैं ज‍िससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही क‍िडनी ग्‍लूकोज बनाने में मदद करती हैं, लेक‍िन गंभीर बीमारी होने पर इस काम में रुकावट आती है। इस वजह से क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज के मरीज खासतौर पर ज‍िन्‍हें डायब‍िटीज है, उन्‍हें लगातार शुगर लेवल चेक कराने और दवा बदलने की जरूरत होती है।

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क्रॉन‍िक क‍िडनी डि‍जीज से कैसे बचें?

  • अगर आपको डायब‍िटीज है, तो डॉक्‍टर से न‍ियम‍ित जांच कराएं और हार्ट ड‍िजीज, हाई बीपी, मोटापा, फैम‍िली ह‍िस्‍ट्री जैसे र‍िस्‍क फैक्‍टर्स को समझें।
  • वजन कंट्रोल करें और रोजाना फि‍ज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी या एक्‍सरसाइज के ल‍िए समय न‍िकालें।
  • ताजे फल और सब्‍ज‍ियों का ज्‍यादा सेवन करें और ऐसी चीजें खाएं ज‍िसमें नमक की मात्रा कम हो।
  • ब्‍लड शुगर लेवल और ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करें और न‍ियम‍ित मॉन‍िटर‍िंग करते रहें।

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डॉक्‍टर से संंपर्क कब करें?

स‍िर चकराना, पसीना आना, भ्रम या उलझन महसूस होना, शरीर कांपना, कमजोरी जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। समय पर बीमारी का पता लगाने से इलाज में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

जब क‍िडनी की कार्यक्षमता प्रभाव‍ित होती है, तो इसका असर ब्‍लड शुगर लेवल पर भी पड़ता है। क्रॉन‍िक क‍िडनी डि‍जीज में अक्‍सर हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है।

FAQ

  • हाइपोग्लाइसीमिया से कैसे बचें?

    डायब‍िटीज की दवाएं समय पर लें, भोजन छोड़ने या कम खाने से बचें। ज्‍यादा अल्‍कोहल के सेवन और अध‍िक शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि से भी बचें।
  • हाइपोग्लाइसीमिया में शुगर लेवल क‍ितना होता है?

    अगर ब्‍लड शुगर लेवल 70 mg/dL से कम है, तो उसे लो ब्‍लड शुगर लेवल या हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 13:40 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 30, 2026 13:40 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu

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