क्रॉनिक किडनी डिजीज तब होता है जब किडनी कुछ महीने से ज्यादा समय के लिए डैमेज होती हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज की शुरुआती स्टेज में अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आता है, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, कंडीशन गंंभीर हो जाती है। क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीजोंं को अक्सर लो ब्लड शुगर लेवल की समस्या होती है। जानें इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Senior Consultant Nephrologist, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
क्रॉनिक किडनी डिजीज और लो ब्लड शुगर का संंबंध

किडनी शरीर में अतिरिक्त इंंसुलिन को घटाने और सही शुगर लेवल को मेनटेन करने का काम करती है। क्रॉनिक किडनी डिजीज में अक्सर मरीजों को लो ब्लड शुगर लेवल की शिकायत होती है। क्रॉनिक किडनी डिजीज के बहुत से लोग डाइट से पर्याप्त ग्लूकोज नहीं ले पाते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे डाइट खराब होना, तबीयत ठीक न होना, ईटिंंग पैटर्न में असामान्य बदलाव होना।
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क्या कहती है स्टडी?
साल 2014 में Mayo Clinic Proceedings में पब्लिश एक रिव्यू के मुताबिक, लो ब्लड शुगर लेवल
का खतरा क्रॉनिक किडनी डिजीज और डायबिटिक मरीजों में ज्यादा देखी जाती है। इसके दो मुख्य कारण बताए गए हैं पहला शरीर के हार्मोन बनाने की क्षमता कम होना और ठीक ढंग से दवाओंं का सेवन न करना।
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हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा
क्रॉनिक किडनी डिजीज होने पर जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती है, तो इंसुलिन और डायबिटीज की कई दवाएं लंंबे समय तक ब्लड में मौजूद रहती हैं जिससे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही किडनी ग्लूकोज बनाने में मदद करती हैं, लेकिन गंभीर बीमारी होने पर इस काम में रुकावट आती है। इस वजह से क्रॉनिक किडनी डिजीज के मरीज खासतौर पर जिन्हें डायबिटीज है, उन्हें लगातार शुगर लेवल चेक कराने और दवा बदलने की जरूरत होती है।
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क्रॉनिक किडनी डिजीज से कैसे बचें?
- अगर आपको डायबिटीज है, तो डॉक्टर से नियमित जांच कराएं और हार्ट डिजीज, हाई बीपी, मोटापा, फैमिली हिस्ट्री जैसे रिस्क फैक्टर्स को समझें।
- वजन कंट्रोल करें और रोजाना फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज के लिए समय निकालें।
- ताजे फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन करें और ऐसी चीजें खाएं जिसमें नमक की मात्रा कम हो।
- ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करें और नियमित मॉनिटरिंग करते रहें।
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डॉक्टर से संंपर्क कब करें?
सिर चकराना, पसीना आना, भ्रम या उलझन महसूस होना, शरीर कांपना, कमजोरी जैसे लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर बीमारी का पता लगाने से इलाज में मदद मिलती है।
निष्कर्ष:
जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो इसका असर ब्लड शुगर लेवल पर भी पड़ता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज में अक्सर हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
FAQ
हाइपोग्लाइसीमिया से कैसे बचें?
डायबिटीज की दवाएं समय पर लें, भोजन छोड़ने या कम खाने से बचें। ज्यादा अल्कोहल के सेवन और अधिक शारीरिक गतिविधि से भी बचें।हाइपोग्लाइसीमिया में शुगर लेवल कितना होता है?
अगर ब्लड शुगर लेवल 70 mg/dL से कम है, तो उसे लो ब्लड शुगर लेवल या हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है।
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Current Version
Jun 30, 2026 13:40 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jun 30, 2026 13:40 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu