Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bala Raja Sekhar Chandra , Sr. Consultant - Neuro & Spine Surgeon

गर्दन की जकड़न की वजह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस तो नहीं? डॉक्‍टर से जानें इसके रिस्क

गर्दन में दर्द, जकड़न, गर्दन घुमाने में द‍िक्कत होना, हाथों में दर्द या सुन्नपन का कारण सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis) हो सकता है। जानें इसके ल‍िए कौन से र‍िस्‍क फैक्‍टर्स ज‍िम्‍मेदार हैं?  

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हमारी स्‍पाइन स‍िर से शुरू होकर कमर के नीचे तक होती है। स्‍पाइन के ऊपरी स‍िरे को सर्वाइकल स्‍पाइन कहा जाता है। सर्वाइकल स्‍पाइन (Cervical Spine) को ह‍िन्‍दी में गर्दन की रीढ़ भी कहते हैं। इसके लगातार इस्‍तेमाल और उम्र बढ़ने के साथ इसमें घ‍िसाव होता है ज‍िससे गर्दन में दर्द और अकड़न महसूस होती है। इस स्‍थि‍त‍ि को सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस कहा जाता है। आजकल यह समस्‍या बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्‍टरों का मानना है कि‍ मोबाइल और लैपटॉप का लगातार गलत ढंग से इस्‍तेमाल, सर्वाइकल स्‍पाइन को प्रभाव‍ित करता है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, 60 साल से ज्‍यादा उम्र के 85 % से ज्‍यादा लोग सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से प्रभावित हो जाते हैं इसल‍िए इसके र‍िस्‍क फैक्‍टर्स को समझना जरूरी है। र‍िस्‍क फैक्‍टर्स समझकर बचाव में मदद म‍िल सकती है। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

40 की उम्र के बाद डिस्क कमजोर होने लगती है

जैसे-जैसे व्‍यक्‍त‍ि 40 की उम्र तक पहुंचता है उसकी रीढ़ में मौजूद ड‍िस्‍क कमजोर होने लगती है। Mayo Clinic के मुताब‍िक, डिस्क, वर्टिब्रा (स्पाइन को बनाने वाली छोटी-छोटी हड्डियां) के बीच कुशन की तरह काम करती हैं। 40 साल की उम्र में ज्‍यादातर लोगों की रीढ़ की डिस्क सूखने और सिकुड़ने लगती हैं। जैसे-जैसे डिस्क छोटी होती जाती हैं, वर्टिब्रा के बीच हड्डियों का आपस में संपर्क बढ़ जाता है और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस हो सकता है।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के जोख‍िम कारक

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1. बढ़ती उम्र है स्पोंडिलोसिस का मुख्‍य कारक

Spine Surgeon Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri ने कहा ''उम्र बढ़ने के साथ गर्दन की रीढ़ (सर्वाइकल स्पाइन) में होने वाला घ‍िसाव, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का मुख्‍य कारण माना जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ड‍िस्‍क में पानी की कमी, हड्डियों के बीच मौजूद लचीली परत कार्टि‍लेज का खराब होना और हड्डियों में असामान्य वृद्धि (Bone Spurs) जैसी समस्‍याएं होने लगती हैं।''

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स्‍पाइनल कॉर्ड की समस्‍याएं बढ़ सकती हैं

अगर समय पर सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का इलाज न क‍िया जाए, तो यह स्‍पाइनल कॉर्ड को भी प्रभाव‍ित कर सकता है। साल 2025 में StatPearls में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण इंटरवर्टि‍ब्रल ड‍िस्‍क, फेसेट ज्‍वॉइंट, ल‍िगामेंट में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। यह समस्‍या 50 साल की उम्र के बाद ज्‍यादा देखी जाती है। इसके कारण स्‍पाइनल कॉर्ड पर भी जोर पड़ सकता है ज‍िससे सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी (गर्दन की रीढ़ से निकलने वाली नस पर दबाव पड़ना) या र्वाइकल मायलोपैथी (गर्दन में स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव पड़ने की स्थिति) जैसी समस्‍याओं का खतरा बढ़ जाता है।

2. जन्‍मजात रीढ़ की असामान्यताएं

जरूरी नहीं है क‍िसी नई कंडीशन के कारण ही सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस हो। यह जन्‍मजात समस्‍याओं के कारण भी हो सकता है। कुछ लोगों में रीढ़ की बनावट जन्‍म से ही अलग होती है ज‍िससे गर्दन पर दबाव पड़ सकता है और यह समस्‍या हो सकती है।

3. गर्दन की पुरानी चोट

अगर गर्दन में पहले से चोट लगी है, तो वह स्‍पाइन स्‍ट्रक्‍चर को प्रभाव‍ित कर सकती है और इससे सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का खतरा बढ़ जाता है।

4. गलत पॉश्चर अपनाना

लंबे समय तक गलत ढंग से बैठना या गर्दन को गलत पोजीशन में रखने के कारण सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का खतरा बढ़ सकता है। कई लोग ऑफ‍िस में काम करने के दौरान गर्दन को काफी देर तक झुकाकर रखते हैं ज‍िसके कारण गर्दन की मांसपेश‍ियों पर लगातार दबाव बढ़ता है और इस समस्‍या का जोख‍िम बढ़ जाता है।

5. लाइफस्‍टाइल से जुड़े कारण

  • जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस होने का खतरा ज्‍यादा हो सकता है क्‍योंक‍ि धूम्रपान करने से ड‍िस्‍क तक पोषण पहुंचने की प्रक्र‍िया पर बुरा असर पड़ता है ज‍िससे ड‍िस्‍क कमजोर हो सकती है।
  • जो लोग शारीर‍िक रूप से कम एक्‍ट‍िव होते हैं उनमें गर्दन को सपोर्ट देने वाली मसल्‍स कमजोर हो सकती हैं और गर्दन की रीढ़ पर दबाव बानने से यह समस्‍या हो सकती है।
  • लंबे समय तक ड्राइव‍िंग करना या लगातार वाइब्रेशन वाले काम करने से भी यह समस्‍या हो सकती है।
  • भारी वजन उठाने या जेनेट‍िक कारणों से भी सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • मोटापे के कारण शरीर की रीढ़ पर जोर पड़ता है ज‍िससे ड‍िस्‍क जल्‍दी घ‍िस जाती है और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस हो सकता है।

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सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से कैसे बचें?

  • बैठने, मोबाइल या लैपटॉप का इस्‍तेमाल करने के दौरान गर्दन को ज्‍यादा देर न झुकाएं। काम करते समय गर्दन की पोजीशन ठीक रखकर अनावश्यक दबाव को कम क‍िया जा सकता है।
  • नियमित रूप से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करके गर्दन को बेहतर सहारा मिल सकता है। जैसे- गर्दन को ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं घुमाना, नेक रोटेशन वगैरह।
  • मोटापा कम करें ताक‍ि गर्दन पर दबाव न पड़े और धूम्रपान की आदत से परहेज करें।
  • गर्दन पर चोट लगी है, तो डॉक्‍टर से तुरंत इलाज कराएं ताक‍ि सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के खतरे से बचा जा सके।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का इलाज कैसे होता है?

Dr. Bala Raja ने बताया क‍ि सीटी स्‍कैन, एमआरआई या एक्‍स-रे से इस बीमारी का पता लगाया जाता है। सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस होने पर एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं, पेनक‍िलर्स, स्‍टेरॉइड इंजेक्‍शन द‍िए जाते हैं। कुछ लोगों को डॉक्‍टर गले में सॉफ्ट कॉलर पहनने की भी सलाह देते हैं। ज्‍यादातर मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। कुछ मामलों में स्‍पाइन कॉर्ड पर दबाव बनने की स्‍थ‍िति‍ में सर्जरी की जाती है ज‍िसमें डॉक्‍टर हड्डी पर दबाव बनाने वाले ह‍िस्‍से को र‍िमूव कर देते हैं।

Medline Plus के मुताब‍िक, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण समय के साथ बढ़ते हैं। कुछ मामलों में लक्षण धीरे-धीरे महसूस होते हैं, तो कुछ में ये अचानक शुरू हो जाते हैं। खड़े होने या बैठने के बाद दर्द बढ़ सकता है, रात के दौरान भी दर्द बढ़ सकता है। कुछ लोगों को गंभीर मामलों में छींकने, खांसने या हंसने पर भी दर्द महसूस हो सकता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • गर्दन का दर्द या अकड़न जो कुछ हफ्तों के बाद भी ठीक न हो।
  • कंधे की हड्डियों के बीच दर्द होना।
  • हाथों में दर्द या सुन्नपन होना।
  • ब्‍लैडर या आंतों पर कंट्रोल न होना।

न‍िष्‍कर्ष:

बढ़ती उम्र के कारण सर्वाइकल स्पाइन में होने वाला घ‍िसाव, जन्‍मजात रीढ़ की असामान्यताएं, गर्दन की पुरानी चोट, गलत पॉश्चर अपनाना, धूम्रपान करना, कम एक्‍ट‍िव रहना, वजन ज्‍यादा होना, लंबे समय तक ड्राइव‍िंग करना या जेनेट‍िक कारण वगैरह सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के र‍िस्‍क फैक्‍टर्स हैं। बचाव के ल‍िए गर्दन को ज्‍यादा देर झुकाकर न रखें और गर्दन की एक्‍सरसाइज को जरूर अपनाएं। गर्दन में दर्द हफ्ते भर से ज्‍यादा समय तक बना रहे या हाथों में दर्द या सुन्नपन हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

FAQ

  • क्या सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस पूरी तरह ठीक होता है?

    सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षणों को सही इलाज और लाइफस्‍टाइल में बदलाव करके कंट्रोल क‍िया जा सकता है, लेक‍िन यह पूरी तरह से ठीक नहीं होता क्‍योंक‍ि यह एक डि‍जनरेट‍िव यानी उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कंडीशन है।
  • सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में क‍िन चीजों से बचें?

    सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस होने पर गर्दन को ज्‍यादा देर झुकाकर न रखें, भारी वजन उठाने से बचें और गर्दन को अचानक से झटका देने से बचें। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 24, 2026 17:58 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra

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