गर्दन में दर्द होना एक आम समस्या है। कई बार लंबे समय तक मोबाइल देखने, गलत तरीके से सोने, बैठने और मांसपेशियों में खिंचाव आने जैसी समस्याओं के कारण गर्दन में दर्द होने लगता है। ऐसी में आराम करने से दर्द को कम करने में मदद मिलती है, लेकिन अगर गर्दन दर्द के साथ हाथों या उंगलियों में लगातार झनझनाहट, सुन्नपन, जलन या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नॉर्मल दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण शरीर की नसों से जुड़ी किसी समस्या के हो सकते हैं। ऐसे में आइए Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV hospital, Bangalore से जानें।
गर्दन दर्द के साथ हाथों में झुनझुनी क्यों होती है?
डॉ. अरविंद एस एन के अनुसार, गर्दन दर्द के साथ हाथों में झुनझुनी होने का एक आम कारण सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी है। बता दें, गर्दन की रीढ़ में कई हड्डियां और उनके बीच डिस्क होती हैं। इनसे होकर निकलने वाली नसें कंधे, बांह, हाथ और उंगलियों तक संदेश पहुंचाती हैं। जब गर्दन की किसी नस की जड़ पर दबाव या जलन होती है, तो दर्द और दूसरे असामान्य एहसास गर्दन से हाथ की ओर जा सकते हैं। इससी स्थिति को सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी कहा जाता है।
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, इस समस्या में गर्दन के दर्द के साथ कंधे, बांह या हाथ में झुनझुनी, सुन्नपन और कमजोरी हो सकती है। कुछ लोगों को जलन या बिजली के झटके जैसा दर्द भी महसूस हो सकता है।
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सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी के कारण
डॉ. अरविंद बताते हैं, गर्दन की नस पर दबाव कई कारणों से हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ गर्दन की रीढ़ में होने वाले बदलाव, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस या बोन स्पर्स, डिस्क में बदलाव या हड्डी के छोटे उभार इसके कारणों में शामिल हैं।
डॉ. अरविंद का कहना है, कभी-कभी डिस्क अपनी नॉर्मल स्थिति से बाहर की ओर निकलकर आसपास की नस पर दबाव डाल सकती है। ऐसी स्थिति में गर्दन से हाथ तक जाने वाला दर्द और झनझनाहट ज्यादा साफ हो सकती है। लक्षण किस हिस्से में दिखाई देंगे, यह प्रभावित नस पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में, सामान उठाने, टाइप करने या सिर घुमाने जैसी एक्टिविटीज से भी लक्षण बढ़ जाते हैं।
StatPearls मेडिकल रिसोर्स के अनुसार, सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी तब होती है जब रीढ़ की हड्डी की कोई नर्व रूट दब जाती है या उसमें सूजन आ जाती है। कम उम्र के लोगों में, आमतौर पर 30 से 40 उम्र के बीच, डिस्क में चोट लगना और डिस्क का खिसकना इस दबाव या रुकावट के सबसे आम कारण होते हैं।
neck pain with tingling in the arms why it is caused 1 (4)
गर्दन दर्द का हाथों पर कैसे होता है असर?
डॉ. अरविंद के अनुसार, गर्दन की रीढ़ की कैनाल के नैरो होने (cervical spinal canal narrowing) की स्थिति को सर्वाइकल स्पाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। जिसमें दबाव सीधे स्पाइनल कॉर्ड पर पड़ता है, इस स्थिति में लक्षण सिर्फ एक हाथ तक सीमित नहीं रह सकते हैं।
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, इससे दोनों बाहों में कमजोरी, चलने में परेशानी, बैलेंस बिगड़ने या हाथों की एक्टिविटी में समस्या हो सकती है। ऐसे संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है, क्योंकि ये रीढ़ की हड्डी पर दबाव से जुड़े हो सकते हैं।
हर झनझनाहट का कारण गर्दन दर्द नहीं
डॉ. अरविंद के अनुसार, हाथों में झनझनाहट या सुन्नपन का कारण हमेशा गर्दन की समस्या ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कभी-कभी झुनझुनी कई कारणों से हो सकती है। जैसे -
- पेरिफेरल नर्व डिसऑर्डर जैसे कि कार्पल टनल सिंड्रोम।
- विटामिन B12 की कमी।
- डायबिटीज के कारण।
- सूजन वाली न्यूरोलॉजिकल स्थितियां।
ऐसे में हाथों में झुनझुनी की समस्या के लक्षणों के सही कारण का पता लगाना जरूरी है। ताकि सही इलाज किया जा सके।
StatPearls मेडिकल रिसोर्स के अनुसार, क्यूबाई टनल में नस दबने के कारण हाथ की चौथी और पांचवीं उंगलियों में सुन्नपन और हाथ की अंदरूनी कमजोरी पैदा होती है। कलाई या बाजू के निचले हिस्से (उलनार फोरआर्म) में सुन्नपन नहीं होता, क्योंकि वहां की सेंसिटिव मीडियल एंटीब्रीकियल क्यूटेनियस नर्व द्वारा नियंत्रित होती है।
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डॉक्टर किन जांचों की सलाह दे सकते हैं?
डॉ. अरविंद के अनुसार, डॉक्टर इन लक्षणों की जांच डिटेल्ड न्यूरोलॉजिकल जांच के जरिए करते हैं, जिसमें मांसपेशियों की ताकत, सेंसेशन और रिफ्लेक्स की जांच की जा सकती है। जब लक्षण बने रहते हैं या न्यूरोलॉजिकल कमियां दिखाई देती हैं, तो अक्सर एमआरआई जैसी इमेजिंग जांच की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में नर्व कंडक्शन स्टडी या इलेक्ट्रोमायोग्राफी यानी ईएमजी भी की जा सकती है।
किस तरह होता है इलाज?
डॉ. अरविंद के अनुसार, इलाज का तरीका समस्या के कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। कई मामलों में कंजर्वेटिव उपायों में फिजियोथेरेपी, सही पोस्चर पर ध्यान देना, सूजन कम करने वाली दवाएं, नसों के दर्द की दवाएं और देखरेख में की जाने वाली स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज शामिल हैं।
डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, अगर नस दबने की समस्या गंभीर हो और इसके साथ लगातार कमजोरी बढ़ रही हो या स्पाइनल कॉर्ड प्रभावित हो, तो दबाव कम करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. अरविंद का कहना है, अगर गर्दन के दर्द के साथ अचानक हाथों-पैरों में कमजोरी, ब्लैडर या बॉवेल पर नियंत्रिण खोने, चलने या बैलेंस बनाने में गंभीर परेशानी या किसी बड़ी चोट के बाद लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
जल्दी पता लगाना जरूरी है क्योंकि लंबे समय तक नस दबे रहने से स्थायी (permanent) कमजोरी या सेंसेरी लॉस होने की समस्या हो सकती है। समय पर इलाज से अक्सर बहुत अच्छा सुधार होता है और लंबे समय तक रहने वाली डिसेबिलिटी से बचा जा सकता है।
निष्कर्ष
गर्दन के दर्द के साथ हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है। कभी यह गर्दन की नस पर दबाव का संकेत होती है, तो कभी यह समस्या नसों से जुड़ी किसी अन्य समस्या से भी हो सकती है। ऐसे में ध्यान रहे, कोई भी परेशानी होने पर इसके लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें, कोई भी परेशानी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
ध्यान रहे, लगातार बने रहने वाले सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी को भी लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच कराने से समस्या का कारण समझने और इलाज शुरू करने में मदद मिल सकती है, साथ ही इससे जुड़ी समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
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FAQ
गर्दन दर्द क्यों होता है?
गलत पोस्चर, मांसपेशियों में खिंचाव, लंबे समय तक झुककर मोबाइल का इस्तेमाल करने, गलत तरीके से सोने, उम्र बढ़ने और डिस्क में घिसाव होने के कारण गर्दन में दर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।हाथों में बार-बार झुनझुनी आने का क्या कारण है?
हाथों में बार-बार झुनझुनी आने के कारण व्यक्ति को नसों के दबने, ब्लड सर्कुलेशन ठीक से न होने, पोषक तत्वों की कमी होने और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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Aug 14, 2026 21:10 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N
