Sun Oct 18, 2026 | 09:05 AM IST

Medically Reviewed by Dr Jayaditya Ghosh , Consultant Endocrinologist

लगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेत

हाथ-पैरों में लगातार झुनझुनी, जलन या सुन्नपन पेरिफेरल न्यूरोपैथी का शुरुआती संकेत हो सकता है। यहां जानिए, इसके पीछे क्या कारण होते हैं, किन लोगों में जोखिम ज्यादा होता है और इलाज कैसे किया जाता है।
लगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेतलगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों या पैरों में बार-बार झुनझुनी होती है? क्या कभी ऐसा महसूस होता है कि उंगलियां सुन्न हो रही हैं, पैरों में जलन हो रही है या जमीन पर चलते समय पैरों में कुछ अजीब लगता है? कई लोग इन लक्षणों को थकान, कमजोरी या सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर झुनझुनी लगातार बनी रहती है या बार-बार वापस आती है, तो यह शरीर में नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है। ऐसी ही एक स्थिति है पेरिफेरल न्यूरोपैथी, जिसमें शरीर की बाहरी नसें प्रभावित होने लगती हैं। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष से जानिए, लगातार झुनझुनी कब पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत हो सकती है?

पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि हमारे शरीर में मौजूद पेरिफेरल नर्व्स (Peripheral Nerves) दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड से संदेशों को हाथों, पैरों और अन्य अंगों तक पहुंचाने का काम करती हैं। जब ये नसें किसी कारण से डैमेज या कमजोर हो जाती हैं, तो इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति को झुनझुनी, सुन्नपन, जलन, चुभन या सेंसिटिविटी में बदलाव महसूस हो सकता है। कई मामलों में यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती लक्षणों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

इसे भी पढ़ें: चेहरे की मांसपेशियों का फड़कना हो सकता है Hemifacial Spasm का संकेत? डॉक्टर से जानें कारण और लक्षण

डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, यदि झुनझुनी केवल कुछ मिनटों के लिए होती है और फिर ठीक हो जाती है, तो यह हमेशा गंभीर नहीं होती लेकिन यदि यह रोजाना होने लगे, रात में बढ़ जाए या हाथों और पैरों में लगातार बनी रहे, तो यह नसों के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है। पेरिफेरल न्यूरोपैथी में शुरुआत अक्सर पैरों की उंगलियों से होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ सकती है।

  • डॉक्टर जयादित्य घोष बताते हैं कि यदि झुनझुनी के साथ पैरों या हाथों में सुन्नपन, जलन, तेज दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, बैलेंस बिगड़ना या चलने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • कुछ मामलों में मरीजों को गर्म और ठंडे तापमान का सही अंदाजा लगाने में भी परेशानी हो सकती है।
  • यह संकेत देते हैं कि नसों का काम प्रभावित हो रहा है और हेल्थ चेकअप की जरूरत है।

इसे भी पढ़ें: गर्दन दर्द के साथ हाथों में कमजोरी या झुनझुनी क्यों होती है? डॉक्टर से जानें संभावित कारण

साल 2026 में JAMA Journals में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, पेरीफेरल न्यूरोपैथी दुनिया भर में लगभग 1% वयस्कों को प्रभावित करती है। इसकी वजह से शरीर में सुन्नपन, दर्द, कमजोरी और अंदरूनी अंगों में दिक्कतें आ सकती हैं। पश्चिमी देशों में इसका सबसे मुख्य कारण डायबिटीज है। अच्छी बात यह है कि इस नसों के दर्द को ठीक करने के लिए गाबापेंटिन, प्रीगाबालिन, डुलोक्सेटिन और एमिट्रिप्टिलाइन जैसी दवाएं फर्स्ट-लाइन के इलाज के रूप में काफी असरदार मानी जाती हैं। अगर समय पर ध्यान दिया जाए, तो इस समस्या और इसके दर्द को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

peripheral neuropathyperipheral neuropathy

पेरिफेरल न्यूरोपैथी के प्रमुख कारण

डॉक्टर जयादित्य घोष के अनुसार, डायबिटीज पेरिफेरल न्यूरोपैथी का सबसे आम कारण है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, किडनी रोग, थायराइड डिजीज, ज्यादा शराब का सेवन, कुछ इंफेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां और कुछ दवाओं के नुकसान भी इस समस्या का कारण बन सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर रिजल्ट निकालने के बजाय कारण की पहचान करना जरूरी होता है।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी की जांच और इलाज कैसे किया जाता है?

डॉक्टर जयादित्य घोष बताते हैं कि पेरिफेरल न्यूरोपैथी की जांच के लिए मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण यानी फिजिकल एग्जामिनेशन का मूल्यांकन किया जाता है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट, नर्व कंडक्शन स्टडी (NCS) और अन्य खास टेस्ट की सलाह दी जा सकती है। इलाज का मुख्य उद्देश्य कारण को कंट्रोल करना और नसों को होने वाले आगे के नुकसान को रोकना होता है। यदि डायबिटीज वजह है, तो ब्लड शुगर कंट्रोल सबसे जरूरी कदम होता है। वहीं विटामिन की कमी होने पर सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

हाथों या पैरों में लगातार होने वाली झुनझुनी को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह कई बार पेरिफेरल न्यूरोपैथी जैसी स्थिति का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसमें नसें प्रभावित होने लगती हैं। यदि झुनझुनी बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ सुन्नपन, कमजोरी और शरीर के बैलेंस संबंधी समस्याएं भी हैं, तो जल्द से जल्द एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से नसों को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है।

All Image Credit- magnific

FAQ

  • क्या पेरिफेरल न्यूरोपैथी का इलाज संभव है?

    इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है, कारण को कंट्रोल करने से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
  • लगातार झुनझुनी से बचाव कैसे करें?

    ब्लड शुगर कंट्रोल रखें, बैलेंस डाइट लें, विटामिन की कमी से बचें, नियमित एक्सरसाइज करें और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों पर डॉक्टर से सलाह लें।

Read Next

→ क्या दिनभर नींद आना सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत? डॉक्टर से जानें कब कराएं जांच

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 29, 2026 23:15 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh