Tue Sep 22, 2026 | 07:22 PM IST

Medically Reviewed by Dr Jayaditya Ghosh , Consultant Endocrinologist

लगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेत

हाथ-पैरों में लगातार झुनझुनी, जलन या सुन्नपन पेरिफेरल न्यूरोपैथी का शुरुआती संकेत हो सकता है। यहां जानिए, इसके पीछे क्या कारण होते हैं, किन लोगों में जोखिम ज्यादा होता है और इलाज कैसे किया जाता है।
लगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेतलगातार झुनझुनी को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से जानें कब यह Peripheral Neuropathy का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों या पैरों में बार-बार झुनझुनी होती है? क्या कभी ऐसा महसूस होता है कि उंगलियां सुन्न हो रही हैं, पैरों में जलन हो रही है या जमीन पर चलते समय पैरों में कुछ अजीब लगता है? कई लोग इन लक्षणों को थकान, कमजोरी या सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर झुनझुनी लगातार बनी रहती है या बार-बार वापस आती है, तो यह शरीर में नसों से जुड़ी किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है। ऐसी ही एक स्थिति है पेरिफेरल न्यूरोपैथी, जिसमें शरीर की बाहरी नसें प्रभावित होने लगती हैं। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष से जानिए, लगातार झुनझुनी कब पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत हो सकती है?

पेरिफेरल न्यूरोपैथी का संकेत

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि हमारे शरीर में मौजूद पेरिफेरल नर्व्स (Peripheral Nerves) दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड से संदेशों को हाथों, पैरों और अन्य अंगों तक पहुंचाने का काम करती हैं। जब ये नसें किसी कारण से डैमेज या कमजोर हो जाती हैं, तो इसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति को झुनझुनी, सुन्नपन, जलन, चुभन या सेंसिटिविटी में बदलाव महसूस हो सकता है। कई मामलों में यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती लक्षणों को लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

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डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, यदि झुनझुनी केवल कुछ मिनटों के लिए होती है और फिर ठीक हो जाती है, तो यह हमेशा गंभीर नहीं होती लेकिन यदि यह रोजाना होने लगे, रात में बढ़ जाए या हाथों और पैरों में लगातार बनी रहे, तो यह नसों के प्रभावित होने का संकेत हो सकता है। पेरिफेरल न्यूरोपैथी में शुरुआत अक्सर पैरों की उंगलियों से होती है और धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ सकती है।

  • डॉक्टर जयादित्य घोष बताते हैं कि यदि झुनझुनी के साथ पैरों या हाथों में सुन्नपन, जलन, तेज दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, बैलेंस बिगड़ना या चलने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • कुछ मामलों में मरीजों को गर्म और ठंडे तापमान का सही अंदाजा लगाने में भी परेशानी हो सकती है।
  • यह संकेत देते हैं कि नसों का काम प्रभावित हो रहा है और हेल्थ चेकअप की जरूरत है।

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साल 2026 में JAMA Journals में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, पेरीफेरल न्यूरोपैथी दुनिया भर में लगभग 1% वयस्कों को प्रभावित करती है। इसकी वजह से शरीर में सुन्नपन, दर्द, कमजोरी और अंदरूनी अंगों में दिक्कतें आ सकती हैं। पश्चिमी देशों में इसका सबसे मुख्य कारण डायबिटीज है। अच्छी बात यह है कि इस नसों के दर्द को ठीक करने के लिए गाबापेंटिन, प्रीगाबालिन, डुलोक्सेटिन और एमिट्रिप्टिलाइन जैसी दवाएं फर्स्ट-लाइन के इलाज के रूप में काफी असरदार मानी जाती हैं। अगर समय पर ध्यान दिया जाए, तो इस समस्या और इसके दर्द को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

peripheral neuropathyperipheral neuropathy

पेरिफेरल न्यूरोपैथी के प्रमुख कारण

डॉक्टर जयादित्य घोष के अनुसार, डायबिटीज पेरिफेरल न्यूरोपैथी का सबसे आम कारण है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, किडनी रोग, थायराइड डिजीज, ज्यादा शराब का सेवन, कुछ इंफेक्शन, ऑटोइम्यून बीमारियां और कुछ दवाओं के नुकसान भी इस समस्या का कारण बन सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर रिजल्ट निकालने के बजाय कारण की पहचान करना जरूरी होता है।

पेरिफेरल न्यूरोपैथी की जांच और इलाज कैसे किया जाता है?

डॉक्टर जयादित्य घोष बताते हैं कि पेरिफेरल न्यूरोपैथी की जांच के लिए मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक परीक्षण यानी फिजिकल एग्जामिनेशन का मूल्यांकन किया जाता है। इसके अलावा ब्लड टेस्ट, नर्व कंडक्शन स्टडी (NCS) और अन्य खास टेस्ट की सलाह दी जा सकती है। इलाज का मुख्य उद्देश्य कारण को कंट्रोल करना और नसों को होने वाले आगे के नुकसान को रोकना होता है। यदि डायबिटीज वजह है, तो ब्लड शुगर कंट्रोल सबसे जरूरी कदम होता है। वहीं विटामिन की कमी होने पर सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

हाथों या पैरों में लगातार होने वाली झुनझुनी को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह कई बार पेरिफेरल न्यूरोपैथी जैसी स्थिति का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसमें नसें प्रभावित होने लगती हैं। यदि झुनझुनी बार-बार हो रही है, लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ सुन्नपन, कमजोरी और शरीर के बैलेंस संबंधी समस्याएं भी हैं, तो जल्द से जल्द एक्सपर्ट डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से नसों को होने वाले गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है।

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FAQ

  • क्या पेरिफेरल न्यूरोपैथी का इलाज संभव है?

    इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है, कारण को कंट्रोल करने से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है।
  • लगातार झुनझुनी से बचाव कैसे करें?

    ब्लड शुगर कंट्रोल रखें, बैलेंस डाइट लें, विटामिन की कमी से बचें, नियमित एक्सरसाइज करें और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों पर डॉक्टर से सलाह लें।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 29, 2026 23:15 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh

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