आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल, घंटों कंप्यूटर पर काम करना, मोबाइल फोन का लगातार इस्तेमाल और गलत बैठने की आदतों के कारण गर्दन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अधिकांश लोग गर्दन में दर्द को सामान्य थकान या मांसपेशियों में खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन जब गर्दन के दर्द के साथ हाथ में झुनझुनी, सुन्नपन, कमजोरी या उंगलियों में करंट जैसा एहसास होने लगे, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण अक्सर गर्दन से निकलने वाली नसों पर दबाव पड़ने या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी की ओर इशारा करते हैं। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, गर्दन में दर्द के साथ हाथ की कमजोरी या झुनझुनी को कभी भी सामान्य दर्द समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
गर्दन दर्द के साथ हाथों में कमजोरी या झुनझुनी क्यों होती है?
डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि गर्दन से निकलने वाली नसें कंधे, हाथ और उंगलियों तक जाती हैं। यदि किसी कारण से इन नसों पर दबाव पड़ता है, तो दर्द के साथ हाथ में झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है। इसका सबसे आम कारण सर्वाइकल स्लिप डिस्क (Cervical Disc Herniation) है, जिसमें डिस्क बाहर निकलकर नस को दबाने लगती है। इसके अलावा सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, उम्र बढ़ने के साथ होने वाले हड्डियों के बदलाव, स्पाइनल कैनाल का संकरा होना, गर्दन में चोट या नसों की सूजन भी इस समस्या के कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में विटामिन B12 की कमी, डायबिटीज से होने वाली नसों का डैमेज या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।
- यदि गर्दन का दर्द कुछ दिनों में ठीक नहीं हो रहा है और इसके साथ हाथ में लगातार झुनझुनी, पकड़ कमजोर होना, चीजें हाथ से गिरना, उंगलियों में सुन्नपन या कंधे से लेकर हाथ तक फैलता हुआ तेज दर्द महसूस हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
- इसके अलावा यदि दोनों हाथों में कमजोरी, चलने में असंतुलन, पेशाब या मल पर कंट्रोल में परेशानी या अचानक मांसपेशियों की ताकत कम होने लगे, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जा सकता है।
- ऐसे मामलों में देर करने से नसों को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
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साल 2025 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सर्वाइकल डिस्क हर्निएशन (गर्दन की दबी हुई नस) ज्यादातर रीढ़ की C5-C6 और C6-C7 हड्डियों के बीच होता है, जिससे C6 और C7 नसों पर असर पड़ता है। ऐसे मरीजों की जांच करते समय उनकी मुख्य समस्या, दर्द की शुरुआत, आराम देने या दर्द बढ़ाने वाली चीजें, और पुराने इलाज की जानकारी लेना बहुत जरूरी है। इसमें मरीजों को आमतौर पर गर्दन में दर्द की शिकायत होती है। इसके साथ ही, प्रभावित नस वाले हिस्से में जैसे कंधे, हाथ या उंगलियों में तेज दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है। सही इलाज के लिए इन लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है।

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जांच और इलाज कैसे किया जाता है?
डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि समस्या का सही कारण जानने के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल चेकअप करते हैं। जरूरत पड़ने पर एमआरआई (MRI), एक्स-रे, सीटी स्कैन जैसी जांचें कराई जा सकती हैं। इलाज पूरी तरह समस्या के कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती मामलों में दवाएं, फिजियोथेरेपी, गर्दन की एक्सरसाइज, सही पोश्चर और पर्याप्त आराम से काफी राहत मिल सकती है। यदि नस पर गंभीर दबाव हो या हाथ की ताकत लगातार कम हो रही हो, तो कुछ मरीजों में सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना पेन किलर दवाओं का लंबे समय तक सेवन करना उचित नहीं है।
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर भरत कुमार सुरीसेट्टी के अनुसार, गर्दन से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए सही बैठने की आदत अपनाना बेहद जरूरी है। कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें, हर 30 से 40 मिनट में थोड़ी देर के लिए ब्रेक लें और गर्दन को हल्का स्ट्रेच करें। मोबाइल का इस्तेमाल करते समय सिर को लंबे समय तक नीचे झुकाकर न रखें। नियमित एक्सरसाइज, योग, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले एक्सरसाइज और बैलेंस डाइट भी रीढ़ और नसों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। साथ ही पर्याप्त नींद लें और ऐसा तकिया इस्तेमाल करें जो गर्दन को सही सपोर्ट दे।
निष्कर्ष
गर्दन में दर्द के साथ हाथ में कमजोरी, झुनझुनी या सुन्नपन जैसे लक्षण केवल सामान्य दर्द नहीं हो सकते, बल्कि यह नसों या रीढ़ की गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। समय रहते एक्सपर्ट डॉक्टर से जांच कराना, सही कारण का पता लगाना और उचित इलाज शुरू करना फ्यूचर में होने वाली समस्याओं से बचा सकता है। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ते जाएं, तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे जरूरी है।
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FAQ
क्या गर्दन दर्द का इलाज हो सकता है?
गर्दन दर्द के अधिकांश शुरुआती मामलों में दवाओं, फिजियोथेरेपी, सही एक्सरसाइज, आराम से राहत मिल सकती है।क्या ज्यादा फोन इस्तेमाल करने से गर्दन में दर्द हो सकता है?
लंबे समय तक सिर झुकाकर मोबाइल देखने से गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द और नसों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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Jul 13, 2026 14:47 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti