Wed Sep 30, 2026 | 02:41 PM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

गर्दन दर्द के कारण सिरदर्द क्यों होने लगता है? डॉक्टर से समझें कनेक्शन

गर्दन का दर्द अक्सर सिरदर्द का कारण बन सकता है, जिसे सर्विकोजेनिक हेडेक कहते हैं, जो गलत पोस्चर, मांसपेशियों में खिंचाव या सर्वाइकल स्पाइन जैसी समस्याओं के कारण होता है। इससे बचाव के लिए सही पोस्चर व नियमित एक्सरसाइज करना जरूरी है।
गर्दन दर्द के कारण सिरदर्द क्यों होने लगता है? डॉक्टर से समझें कनेक्शनगर्दन दर्द के कारण सिरदर्द क्यों होने लगता है? डॉक्टर से समझें कनेक्शन

कई बार गर्दन का दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता है। कई लोगों को गर्दन में खिंचाव या जकड़न के साथ सिर में भी दर्द महसूस होता है। खासकर लंबे समय तक मोबाइल देखने, लैपटॉप पर काम करने और गलत पोस्चर में लंबे समय तक बैठे रहने के कारण। कई बार दर्द गर्दन के पीछे से शुरु होकर सिर के पिछले हिस्से या सिर की एक तरह महसूस होता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि गर्दन का दर्द सिर तक क्यों पहुंच जाता है? आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV hospital, Bangalore से जानें।

गर्दन के दर्द से सिर दर्द क्यों होता है?

डॉ. अरविंद एस एन के अनुसार, गर्दन दर्द और सिरदर्द अक्सर एक साथ होते हैं क्योंकि गर्दन के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों, जोड़, नसों और लिगामेंट्स उन हिस्सों से गहराई से जुड़े होते हैं, जो सिर तक दर्द का संकेत पहुंचाते हैं। इस तरह के सिरदर्द को आमतौर पर सर्विकोजेनिक हेडेक (cervicogenic headache) कहा जाता है, जिसका मतलब है कि दर्द सिर के बजाय सर्वाइकल स्पाइन (गर्दन की रीढ़ की हड्डी) की समस्या से शुरू होता है।

ऐसे सिरदर्द में अक्सर दर्द सिर के पीछे या खोपड़ी के निचले हिस्से से शुरू होकर एक तरफ फैल सकता है। गर्दन को घुमाने या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रखने पर दर्द बढ़ सकता है और गर्दन की एक्टिविटी भी सीमित हो सकती है।

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खराब पोस्चर से होता है गर्दन और सिर में दर्द

डॉ. अरविंद एस एन बताते हैं, गलत पोस्चर बैठे रहने या खड़े रहना इसके मुख्य कारणों में से एक है। लंबे समय तक फोन की ओर नीचे झुककर देखना, सही एर्गोनॉमिक्स के बिना लैपटॉप पर काम करना या लंबे समय तक डेस्क पर बैठे रहने से गर्दन के पिछले हिस्से की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न से उन नसों में दर्द हो सकता है, जो ब्रेन से जुड़ी होती हैं, जिससे ये दर्द गर्दन से शुरू होकर सिर के पिछले, बगल या सामने के हिस्से तक फैल सकता है।

अगर काम के दौरान लगातार कई घंटे एक ही स्थिति में बैठे रहना पड़े, तो बीच-बीच में शरीर और गर्दन की स्थिति बदलना जरूरी है। ऐसे में काम करते समय स्क्रीन की ऊंचाई और बैठने के पोस्चर में सुधार भी गर्दन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकता है।

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गर्दन या सिर में दर्द के कारण

डॉ. अरविंद एस एन आगे कहते हैं, सिर्फ खराब पोस्चर ही गर्दन के दर्द की वजह नहीं होता है। इसके अलावा, कई तरह की स्थितियां गर्दन में दर्द का कारण बन सकती हैं। जैसे -

  • मांसपेशियों पर अधिक दबाव या खिंचाव।
  • व्हिपलैश इंजरी।
  • सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस यानी उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में होने वाले बदलाव।
  • गठिया यानी आर्थराइटिस।
  • स्लिप्ड डिस्क से जुड़ी समस्या।
  • नस पर दबाव।

इसके अलावा, लंबे समय तक बने हुए मानसिक तनाव से भी गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिचांव आ सकता है, जिससे दर्द और जकड़न बढ़ सकती है और सिरदर्द की संभावना बढ़ जाती है।

कैसे पहचानें कि सिरदर्द गर्दन से जुड़ा है या नहीं?

डॉ. अरविंद के अनुसार, गर्दन से जुड़ा सिरदर्द में कुछ लोगों को सिर के पीछे से दर्द महसूस होता है। दर्द एक तरफ भी फैल सकता है और गर्दन को हिलाने या लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से दर्द अक्सर बढ़ जाता है, साथ ही गर्दन में जकड़न, कंधे में दर्द या उसे पूरी तरह घुमाने में परेशानी हो सकती है।

हालांकि, सिर्फ इन लक्षणों के आधार पर खुद से यह तय करना सही नहीं है कि सिरदर्द सर्वाइकोजेनिक ही है। माइग्रेन और अन्य तरह के सिरदर्द में भी कुछ एक जैसे लक्षण दिख सकते हैं। सही पहचान के लिए डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री और शारीरिक जांच करते हैं।

साल 2023 में Musculoskelet Science & Practice Journal में प्रकाशित स्टडी के अनुसार माइग्रेन या टेंशन हेडऐक (TTH) से पीड़ित लगभग 73% से 90% लोगों को गर्दन में दर्द की समस्या भी होती है और सिरदर्द जितनी बार होता है, गर्दन का दर्द भी उसी हिसाब से बढ़ता जाता है।

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इलाज में क्या मदद मिल सकती है?

डॉ. अरविंद बताते हैं, गर्दन या सिर दर्द का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या का असल कारण क्या है। हल्के मामलों में पोस्चर ठीक करने, एर्गोनॉमिक बदलाव करने, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, फिजियोथोरेपी और पर्याप्त आराम से सुधार होता है।

डॉ. अरविंद आगे कहते हैं, जरूरत पड़ने पर दर्द कम करने वाली दवाएं या मसल रिलैक्सेंट (मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं) दी जा सकती हैं। अगर लक्षण लगातार बने रहते हैं या बार-बार होते हैं, तो सर्वाइकल स्पाइन की जांच के लिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एक्स-रे या एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट कराने की सलाह दे सकती हैं।

गर्दन या सिर दर्द के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. अरविंद बताते हैं, अगर गर्दन दर्द के साथ अचानक से बहुत तेज सिरदर्द, कमजोरी, सुन्नपन, बोलने या चलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना, तेज बुखार या किसी गंभीर चोट के बाद दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि अचानक शुरू हुआ तेज सिरदर्द भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षणों में घर पर दर्द की दवा लेकर इंतजार करना सही नहीं होता है।

गर्दन और सिरदर्द से बचाव कैसे करें?

डॉ. अरविंद के अनुसार, गर्दन और सिरदर्द की समस्या से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, ताकि इन समस्याओं से बचा जा सके। जैसे -

  • लंबे समय तक एक ही पोस्चर में बैठने से बचें।
  • सही पोस्चर में बैठें।
  • डेस्क वर्क के दौरान नियमित ब्रेक लें।
  • गर्दन और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करें।
  • गर्दन को लगातार नीचे झुकाकर रखने की आदत कम करें।
  • स्ट्रेस को मैनेज करें।

गर्दन दर्द के कारण होने वाले सिरदर्द को कम करने के लिए डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के साथ एक्सरसाइज की जा सकती है। इसके अलावा, स्ट्रेस को नियंत्रित करने और पर्याप्त आराम करने से भी गर्दन की मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव को कम करने में मदद मिल सकती है, साथ ही इससे गर्दन से जुड़े सिरदर्द का खतरा काफी कम हो सकता है।

डॉ. अरविंद कहते हैं, शुरुआती जांच और इलाज से न सिर्फ दर्द से राहत मिलती है, बल्कि लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों को रोकने में भी मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

गर्दन का दर्द और सिरदर्द कई बार एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन हर सिरदर्द की वजह गर्दन नहीं होती है। ऐसे में सिरदर्द के सही कारण को समझना और इसके अनुसार इलाज कराना जरूरी हो जाता है। ऐसे में ध्यान रहे, अगर दर्द बार-बार हो रहा है, रोज के काम प्रभावित हो रहे हैं या लक्षण लगातार बढ़ रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। ध्यान रहे, कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा, इनसे बचने के लिए सही पोस्चर, नियमित फिजिकल एक्टिविटी, सही एक्सरसाइज और समय पर इलाज कराने से गर्दन से जुड़ी कई समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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FAQ

  • गर्दन में दर्द क्यों होता है?

    गर्दन में दर्द होने की समस्या गलत पोस्चर में बैठने, मांसपेशियों में खिंचाव आने, लंबे समय तक फोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करने के लिए झुके रहने, गलत तरीके से सोने, बढ़ती उम्र या सर्वाइकल की समस्या हो सकती है।
  • गर्दन की नसों में खिंचाव के क्या लक्षण हैं?

    गर्दन की नसों में खिंचाव होने की समस्या होने पर व्यक्ति को गर्दन में तेज दर्द होने, जकड़न होने, कंधे और बाजू में सुन्नपन होने, झनझनाहट होने और हाथों में कमजोरी महसूस होने की समस्या हो सकती है।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 14, 2026 13:21 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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