Wed Sep 30, 2026 | 01:46 PM IST

Medically Reviewed by Dr Annu Aggarwal , Consultant – Neurologist | Cognitive & Behavioural Neurology

गर्दन घुमाने पर सिर में दर्द क्यों महसूस होता है? डॉक्टर से जानें

गर्दन घुमाने पर होने वाला सिरदर्द कई कारणों से हो सकता है, जैसे सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस। सही पोस्चर, एक्सरसाइज और सही तकिए का इस्तेमाल करके इसे रोका जा सकता है, लेकिन लगातार दर्द होने पर न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
गर्दन घुमाने पर सिर में दर्द क्यों महसूस होता है? डॉक्टर से जानेंगर्दन घुमाने पर सिर में दर्द क्यों महसूस होता है? डॉक्टर से जानें

कई बार व्यक्ति को गर्दन घुमाने पर अचानक से सिर में तेज दर्द होने की समस्या या खिंचाव महसूस होता है। इसको कई बार लोग शारीरिक थकान या गलत तरीके से सोने या गलत तकिया लगाने की समस्या समझते हैं।

हमारी गर्दन और सिर की शारीरिक बनावट एक-दूसरे से बेहद कॉम्प्लेक्स और सूक्ष्म रूप से जुड़ी होती है। गर्दन की हड्डियों, मांसपेशियों, नसों (Nerves) और जोड़ों में होने वाली छोटी सी भी गड़बड़ी सीधे हमारे सिर तक दर्द का सिग्नल भेज सकती है। जब गर्दन घुमाने पर सिरदर्द की शिकायत होती है, तो यह संकेत देता है कि समस्या सिर्फ सिर में नहीं, बल्कि गर्दन के ऊपरी हिस्से या तंत्रिका तंत्र में हो सकती है। आइए, एक विशेषज्ञ डॉक्टर के नजरिए से समझते हैं कि आखिर गर्दन घुमाने पर सिरदर्द क्यों होता है और इसके पीछे कौन-कौन से मुख्य कारण छिपे हो सकते हैं। आइए इस बारे में Dr. Annu Aggarwal, Consultant, Neurology, Specialist Cognitive and Behavioural Neurology, Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital, Mumbai से जानें।

गर्दन घुमाने पर सिरदर्द की समस्या के कारण

डॉ. अणु अग्रवाल के अनुसार, गर्दन घुमाने पर सिरदर्द की समस्या सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या स्ट्रेस, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस, चोट लगने, नस दबने, गलत पोस्चर, खराब लाइफस्टाइल या मेडिकल कंडीशन्स के कारण हो सकती है।

सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द

डॉ. अणु अग्रवाल कहती हैं, गर्दन घुमाने पर होने वाले सिरदर्द का सबसे प्रमुख और आम कारण सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द है। यह एक ऐसा सिरदर्द है, जिसकी शुरुआत सिर में न होकर गर्दन के ऊपरी हिस्से से होती है, लेकिन इसका दर्द सिर के पिछले हिस्से, कनपटी या आंखों के आसपास भी महसूस होता है।

गर्दन की हड्डियों (Cervical Spine) या नसों में कोई समस्या होने पर जब आप गर्दन घुमाते हैं, तो उन प्रभावित हिस्सों पर दबाव पड़ता है। यह दबाव नसों के जरिए सिर तक जाता है और दर्द को ट्रिगर करता है। यह आमतौर पर सिर के एक तरफ ज्यादा महसूस होता है। अगर उस तरफ की नस या मसल्स ज्यादा दबी हुई है तो।

Cleveland Clinic के अनुसार, हड्डियां (C1 से C3 वर्टिब्रा), जोड़, लिगामेंट्स, नर्व रूट्स, वर्टेब्रल आर्टरीज, अर्थराइटिस, फ्रैक्चर (टूटी हुई वर्टिब्रा), दबी हुई नस, स्लिप्ड डिस्क, मांसपेशियों में मोच, ट्यूमर और व्हिपलेश जैसे कारणों से व्यक्ति को सर्वाइकोजेनिक सिरदर्द की समस्या होती है, जिसमें गर्दन घुमाने पर सिरदर्द की समस्या होती है।

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1. मांसपेशियों में खिंचाव और तनाव

गर्दन की मांसपेशियां सिर के भारी वजन को संभालने और उसे हर दिशा में घुमाने का काम करती हैं। लगातार मोबाइल देखना (Text Neck), लैपटॉप पर घंटों गलत पोस्चर में बैठना या सिर को एक ही एंगल में झुकाए रखना आम बात है। इससे बचने के लिए गर्दन को सपोर्ट देने वाले तकिए का इस्तेमाल करें, जिसका इस्तेमाल फ्लाइट में किया जाता है।

इससे गर्दन की मांसपेशियों में सूजन, जकड़न और माइयोफेशियल ट्रिगर पॉइंट्स (Myofascial Trigger Points) बन जाते हैं। जब आप अपनी गर्दन घुमाते हैं, तो इन खींची हुई मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव बनता है, जो सिरदर्द के रूप में उभरता है। ऐसा कमजोर मांसपेशियों (मोच के कारण) और एक्सरसाइज न करने के कारण मांसपेशियों के कमजोर होने के कारण भी हो सकता है।

2. सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या स्पाइन अर्थराइटिस

उम्र बढ़ने के साथ या ज्यादा शारीरिक दबाव के कारण गर्दन की रीढ़ की हड्डियों और उनके बीच मौजूद डिस्क (Discs) में घिसाव होने लगता है। इस स्थिति को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कहा जाता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस को स्पाइन का अर्थराइटिस भी कहा जाता है, जो गर्दन और स्लीप डिस्क में होता है।

जब ये डिस्क घिस जाती हैं या अपनी जगह से खिसकने लगती हैं, तो गर्दन की फ्लैक्सिबिलिटी (Flexibility) कम हो जाती है। ऐसे में गर्दन को किसी भी दिशा में मोड़ने या घुमाने पर हड्डियों और जोड़ों के बीच फ्रिक्शन होता है, जिससे सिर के पिछले हिस्से में दर्द और भारीपन होने लगता है। इसको Radiculopathy कहते हैं।

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3. नसों का दबना

गर्दन के पिछले हिस्से से निकलकर कुछ जरूरी नसें (Occipital Nerves) खोपड़ी के ऊपरी हिस्से तक जाती हैं। ये नसें जब इरिटेट होती हैं, तो दर्द गर्दन के निचले हिस्से से शुरू होता है, जो सिर के पिछले हिस्से में तक जाता है।

ये ज्यादातर गर्दन के दाईं और बाईं तरफ होता है, ये दर्द बहुत ज्यादा होता है, जो बिजली के करंट जैसा लगता है। यह कुछ सेकंड के लिए रहता है। यह दर्द बार-बार हो सकता है। इस स्थिति को ऑक्सिपिटल न्यूराल्जिया (Occipital Neuralgia) कहते हैं।

4. गलत पोस्चर और लाइफस्टाइल

कंप्यूटर स्क्रीन के सामने कंधे झुकाकर बैठना, सोते समय बहुत मोटा या सख्त तकिया इस्तेमाल करना और लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए काम करना गर्दन के जोड़ों पर ज्यादा तनाव पैदा करता है। समय के साथ यह गलत पोस्चर आपकी गर्दन के नेचुरल कर्व (Natural Curve) को प्रभावित करता है। जब गर्दन की अलाइनमेंट बिगड़ जाती है, तो गर्दन को थोड़ा सा भी हिलाने-डुलाने पर सिर में दर्द और चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।

ऐसा ज्यादातर मामलों में नर्व में जलन या इरिटेशन के कारण होता है और दिमाग के एमआरआई (Brain MRI) में किसी भी तरह का दबाव या खिंचाव नहीं दिखाई देता है। साथ ही, गर्दन का एमआरआई (Neck MRI) भी बिल्कुल नॉर्मल है। इस तरह की परेशानी का इलाज दवाइयों और कभी-कभी दर्द वाली जगह पर इंजेक्शन (nerve block) लगाकर बहुत अच्छे से किया जा सकता है।

बचाव और शुरुआती राहत के उपाय

गर्दन से जुड़े इस सिरदर्द से राहत और इसे बढ़ने से रोकने के लिए कुछ आसान आदतों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल किया जा सकता है। जैसे-

1. पोस्चर सही रखें

बैठते और खड़े होते समय अपनी रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखें। स्क्रीन को हमेशा आंखों के स्तर (Eye level) पर रखें।

2. सही तकिए का चुनाव करें

सोने के लिए ऐसे तकिए का इस्तेमाल करें, जो गर्दन को सही सहारा दे, बहुत ज्यादा ऊंचा या सख्त तकिए का इस्तेमाल न करें।

3. स्ट्रैचिंग और ब्रेक लें

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें। हर एक घंटे में 5 मिनट का ब्रेक लें और गर्दन की हल्की स्ट्रैचिंग करें।

4. योग और एक्सरसाइज करें

गर्दन, कंधे और पीठ को फ्लैक्सिबल बनाए रखने के लिए नियमित रूप से योग और एक्सरसाइज करें।

5. हल्की सिकाई करें

गर्दन के जकड़े हुए हिस्से पर गर्म पानी के बैग (हॉट वॉटर बैग) से सिकाई करने से मांसपेशियों की ऐंठन को आराम मिलता है।

निष्कर्ष

गर्दन घुमाने पर होने वाला सिरदर्द कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसे सिर्फ पेनकिलर खाकर दबाया जाए। यह इस बात का साफ संकेत है कि आपकी गर्दन की हड्डियों, मांसपेशियों या नसों को ध्यान और देखभाल की जरूरत है। अगर यह दर्द कभी-कभार थकान की वजह से होता है, तो सही पोस्चर और आराम से इसमें सुधार हो सकता है।

लेकिन अगर यह दर्द लगातार बना रहता है, गर्दन घुमाने पर बढ़ता है या इसके साथ हाथों में सुन्नपन, झनझनाहट जैसा अहसास या चक्कर आने की समस्या महसूस होती है, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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FAQ

  • गर्दन में दर्द किस विटामिन की कमी से होता है?

    शरीर में विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी के कारण व्यक्ति को गर्दन में दर्द होने की समस्या हो सकती है।
  • अचानक गर्दन में दर्द होने पर क्या करें?

    अचानक गर्दन दर्द की समस्या 1-2 दिन तक रहती है। इससे राहत के लिए गर्म या ठंडी सिंकाई की जा सकती है। इसके अलावा, हल्की स्ट्रेचिंग करना भी इससे राहत देने में सहायक है।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 30, 2026 11:58 IST

    Published By : Priyanka Sharma
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