कमर दर्द एक आम समस्या है जो किसी को भी हो सकती है। अक्सर ज्यादा देर बैठे रहने या खड़े रहने के कारण कमर में दर्द उठता है, जो आराम करने पर ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ कमर दर्द ऐसे होते हैं जो दवा लेने पर भी ठीक नहीं होते और समय के साथ बढ़ते जाते हैं। कमर दर्द को हम जितना हल्के में लेते हैं, यह उतना ही गंभीर संकेत है कि शरीर में कुछ गड़बड़ है। Mayo Clinic के मुताबिक, कई स्पाइन समस्याएं हैं जिनके पीछे का एक कॉमन लक्षण कमर दर्द हो सकता है। जैसे- डिस्क का खराब होना, अर्थराइटिस होना या ऑस्टियोपोरोसिस होना। जानते हैं कमर दर्द के पीछे और कौन सी स्पाइनल समस्याएं हो सकती हैं? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें, तो एक अनुमान यह कहता है कि साल 2050 तक 84.3 करोड़ लोगों में लो बैक पेन के मामले देखे जा सकते हैं। दुनियाभर में विकलांगता का सबसे बड़ा कारण बैक पेन है। लो बैक पेन के मामले सबसे ज्यादा 50 से 55 साल की उम्र में देखे जाते हैं।
ये स्पाइन समस्याएं बढ़ा सकती हैं कमर में दर्द
कमर दर्द को अक्सर आम लोग बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन यह कोई बीमारी नहीं बल्कि किसी अंदरूनी समस्या का एक लक्षण है। अगर कमर में दर्द हो रहा है, तो इसके कुछ कारण इस प्रकार हैं-
1. स्पाइनल स्टेनोसिस (Spinal Stenosis)

इसमें स्पाइनल कैनाल (रीढ़ की हड्डी के अंदर की जगह) संकरी हो जाती है, जिससे नसों पर दबाव पड़ सकता है। साल 2023 में StatPearls में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, रीढ़ के निचले हिस्से यानी L4 या L5 लेवल पर यह समस्या अधिक देखी जाती है। लेख में यह भी बताया गया है कि कई लोगों में एमआरआई जांच में स्पाइनल कैनाल संकरी दिख सकती है, लेकिन उन्हें लक्षण जल्दी समझ नहीं आते। इसके कुछ लक्षण जरूर चिन्हित किए गए हैं जैसे-
लक्षण
- कमर दर्द।
- पैर में दर्द।
- कमजोरी।
- चलने या खड़े रहने में दिक्कत होना।
- सुन्नपन या झुनझुनी।
इलाज
स्पाइनल स्टेनोलिस के इलाज के लिए फिजियोथेरेपी की मदद ली जाती है। इसके अलावा एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन और गंभीर मामलों में स्पाइनल कैनाल को चौड़ा करने के लिए डीकम्प्रेशन सर्जरी भी की जा सकती है।
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2. डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज (Degenerative Disc Disease)
Spine Surgeon Dr. Bala Raja ने कहा, ''इसमें रीढ़ की डिस्क घिसने लगती हैं, जिससे उनका झटके को सहने (shock absorption) का काम कम हो जाता है और कमर दर्द हो सकता है।''
लक्षण
- कमर या गर्दन में दर्द।
- लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने पर दर्द बढ़ना।
- नसों पर दबाव पड़ने से झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी होना।
इलाज
डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज होने पर डॉक्टर लाइफस्टाइल में सुधार करने की सलाह देते हैं जैसे बॉडी पॉश्चर सुधारना, वजन कंट्रोल करना, एक ही पोजीशन में बैठने से बचना वगैरह। दर्द दूर करने के लिए दवाओं और इंजेक्शन की मदद ली जाती है।
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3. हर्नियेटेड या स्लिप डिस्क (Herniated or Slipped Disc)
इसमें रीढ़ की डिस्क बाहर की ओर खिसक सकती है, जो नसों पर दबाव डालकर दर्द को कमर से पैर या शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचा सकती है। Mayo Clinic के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले लोगों में कमर में दर्द की समस्या ज्यादा देखी जा सकती है। धूम्रपान से रीढ़ की डिस्क तक ब्लड फ्लो और पोषण प्रभावित हो सकता है, जिससे डिस्क कमजोर और जल्दी खराब हो सकती है।
लक्षण
- कमर में दर्द।
- जांघ या पैर तक दर्द होना।
- हाथ या पैर में झुनझुनी होना।
- लंबे समय तक बैठने, खांसने या छींकने पर दर्द होना।
इलाज
स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। गंभीर मामलों में डिस्क को हटाने के लिए माइक्रोडिस्केक्टॉमी (Microdiscectomy) जैसी सर्जरी की जा सकती है।
4. स्पोंडिलोलिस्थीसिस (Spondylolisthesis)
- इसमें रीढ़ की एक वर्टिब्रा (स्पाइन को बनाने वाली छोटी-छोटी हड्डियां) अपनी जगह से आगे की ओर खिसक जाती है।
- इस वजह से रीढ़ में अस्थिरता (instability) हो सकती है।
लक्षण
- कमर में दर्द।
- हिप्स और पैरों तक दर्द होना।
- पैरों में सुन्नपन या कमजोरी।
- गंभीर मामलों में चलने में परेशानी।
इलाज
- सूजन कम करने वाली दवाएं और इंजेक्शन दिए जाते हैं।
- नसों पर ज्यादा दबाव हो या रीढ़ अस्थिर हो जाए, तो स्पाइनल फ्यूजन (Spinal Fusion) सर्जरी की जाती है।
5. फेसेट आर्थ्रोपैथी (Facet Arthropathy)
Dr. Bala Raja ने कहा, ''रीढ़ की हड्डी के पीछे मौजूद छोटे-छोटे जोड़ों (Facet joints) में घिसाव या गठिया हो जाता है। इस वजह से कमर में दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है।''
लक्षण
- कमर में दर्द या अकड़न।
- लंबे समय तक खड़े रहने पर दर्द होना।
- हिप्स तक भी दर्द फैल सकता है।
इलाज
इलाज के लिए फिजियोथेरेपी, पेनकिलर्स, इंजेक्शन और कुछ मामलों में सर्जरी की मदद ली जाती है।
स्पाइन की समस्याओं से कैसे बचें?
- ऑफिस में लैपटॉप को आई लेवल पर रखें। झुककर काम करने से बचें और बॉडी पॉश्चर को चेक करें।
- स्ट्रेचिंग की मदद से दर्द को कंट्रोल करने और इससे बचने में मदद मिल सकती है।
- हेल्दी वेट मेंटेन करें। डाइट में प्रोटीन और फाइबर रिच फूड्स को शामिल करें।
- कोर को मजबूत बनाएं। प्लैंक, ब्रिज एक्सरसाइज, भुजंगासन करके कोर को मजबूती मिल सकती है।
- अल्कोहल और धूम्रपान से परहेज करें।
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स्पाइनल समस्याओं का खतरा किन लोगों में ज्यादा हो सकता है?
- जिनकी उम्र बढ़ रही है क्योंकि बढ़ती उम्र में डिस्क में घिसाव कम होने लगता है। Mayo Clinic के मुताबिक, कमर में दर्द 30 या 40 की उम्र में भी बहुत कॉमन होता है। इसके पीछे एंग्जायटी या डिप्रेशन जैसे कारण भी हो सकते हैं जो स्पाइनल समस्याओं से जुड़े हों, ये जरूरी नहीं है।
- जो लोग गलत बॉडी पॉश्चर में बैठते हैं उनमें यह समस्या हो सकती है।
- जो लोग शारीरिक रूप से कम एक्टिव हैं या जिनका वजन ज्यादा है।
- धूम्रपान और आनुवंशिक समस्याओं वाले लोग।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
स्पाइन समस्याओं के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें, इससे डिसेबिलिटी या विकलांगता का खतरा कम होता है। अगर ये लक्षण नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें-
- कमर, गर्दन, हाथ-पैर, हिप्स, पीठ में एक हफ्ते से ज्यादा दर्द होना।
- हाथ-पैर में सुन्नपन, झुनझुनी होना।
- रात में दर्द बढ़ना।
- बिना कारण वजन कम होना या बुखार के साथ दर्द होना।
निष्कर्ष:
कमर में दर्द को अक्सर लोग बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन यह अंदरूनी समस्याओं का एक लक्षण है। कमर दर्द अगर लंबे समय तक बना रहे, तो इसके पीछे कुछ स्पाइनल समस्याएं हो सकती हैं जैसे स्पाइनल स्टोनोसिस, डिजेनेरेटिव डिस्क डिजीज, हर्नियेटेड या स्लिप डिस्क, स्पोंडिलोलिस्थीसिस और फेसेट आर्थ्रोपैथी।
FAQ
कमर दर्द किन बीमारियों का संकेत होता है?
स्पाइनल समस्याओं के अलावा कमर दर्द यूटीआई, किडनी इंफेक्शन, एंडोमेट्रियोसिस, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों के कारण भी हो सकता है।स्पाइनल समस्याओं की जांच कैसे होती है?
स्पाइन में होने वाली समस्या की जांच के लिए डॉक्टर एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन जैसे टेस्ट करते हैं।
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Jul 24, 2026 19:58 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra