Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deepak Kumar Arora , Orthopaedics & Joint Replacement

कमर दर्द का कारण मसल्स में खिंचाव है या स्लिप डिस्क? ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जानिए कैसे पहचानें अंतर

मसल्स में खिंचाव का दर्द अक्सर मांसपेशियों तक सीमित रहता है, जबकि स्लिप डिस्क में दर्द कमर से पैर तक जा सकता है और झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जानिए, कमर के दर्द और मसल्स में खिंचाव के बीच अंतर कैसे पहचानें?

कमर में अचानक दर्द उठे तो ज्यादातर लोग इसे मांसपेशियों में खिंचाव यानी मसल्स स्ट्रेन मान लेते हैं। खासकर भारी सामान उठाने, लंबे समय तक बैठने या गलत तरीके से एक्सरसाइज करने के बाद कमर दर्द होना आम है लेकिन क्या हर कमर दर्द का कारण मांसपेशियों में खिंचाव ही होता है? कई बार स्लिप डिस्क की वजह से भी कमर में दर्द हो सकता है और शुरुआती लक्षण इतने मिलते-जुलते होते हैं कि दोनों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। Max Hospital Patparganj के ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. दीपक अरोड़ा बताते हैं कि मांसपेशियों में खिंचाव में आमतौर पर मांसपेशी या उससे जुड़े टिश्यू पर जरूरत से ज्यादा दबाव या खिंचाव पड़ता है। वहीं स्लिप डिस्क में रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क में बदलाव के कारण आस-पास की नस पर दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि कुछ लोगों में कमर दर्द के साथ कूल्हे या पैर तक दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन भी महसूस हो सकता है।

मांसपेशियों में खिंचाव और स्लिप डिस्क के दर्द में अंतर

डॉ. दीपक अरोड़ा के अनुसार, मसल्स स्ट्रेन यानी मांसपेशियों में खिंचाव में दर्द अक्सर कमर के किसी खास हिस्से में सीमित रहता है। शरीर को मोड़ने, कोई सामान उठाने पर दर्द बढ़ सकता है। वहीं स्लिप डिस्क में कमर के दर्द के साथ कूल्हे से पैर की तरफ जाने वाला दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी हो सकती है। खासकर अगर नस पर दबाव पड़ रहा हो तो दर्द पैर के किसी हिस्से तक फैल सकता है।

विशेषता मांसपेशियों में खिंचाव (Muscle Strain) स्लिप डिस्क (Slipped Disc)
कारण भारी सामान उठाने, अचानक झुकने, गलत तरीके से एक्सरसाइज करने या शारीरिक क्षमता से ज्यादा एक्टिविटी करने से मांसपेशियों या टिश्यू पर ज्यादा दबाव पड़ना। रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद कुशन जैसी डिस्क का कमजोर या डैमेज होकर बाहर की ओर उभरना और आस-पास की नस पर दबाव डालना।
प्रभावित एरिया यह समस्या मुख्य रूप से शरीर की किसी भी मांसपेशी जैसे पीठ, गर्दन, जांघ आदि में हो सकती है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और पीठ के निचले हिस्से में होती है।
दर्द का प्रकार और लक्षण प्रभावित हिस्से में दर्द, जकड़न, हल्की सूजन और मांसपेशी को हिलाने या उस पर दबाव पड़ने से दर्द का बढ़ना। पीठ दर्द के साथ-साथ पैर में सुन्नपन, कमजोरी या झनझनाहट महसूस होना।
तंत्रिका (Nerve) का प्रभाव इसमें आमतौर पर नसें सीधे तौर पर नहीं दबती हैं, इसलिए न्यूरोलॉजिकल लक्षण नहीं होते। इसमें नस पर सीधा दबाव पड़ता है, जिसके कारण गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा हो सकते हैं।
गंभीरता के संकेत इसमें आमतौर पर पेशाब या मल पर कंट्रोल खोने जैसी गंभीर समस्याएं नहीं होती हैं। पेशाब या मल पर कंट्रोल में परेशानी, जांघों के अंदरूनी हिस्से में सुन्नपन और पैरों में गंभीर कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं, जिनमें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
एमआरआई (MRI) की जरूरत शुरुआती अवस्था में इसके लिए आमतौर पर एमआरआई की जरूरत नहीं होती है, फिजिकल चेकअप से काम चल जाता है। यदि गंभीर लक्षण हों, लंबे समय तक दर्द रहे या नस से जुड़े संकेत मिलें, तो डॉक्टर MRI कराने की सलाह दे सकते हैं।

The American Journal of Sports Medicine में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, मांसपेशियों में खिंचाव (Muscle Strain) एक आम समस्या है, जो अक्सर ज्यादा खिंचाव या एक्टिव मांसपेशी के मुड़ने के कारण होती है। यह नुकसान आमतौर पर मसल-टेंडन जंक्शन के मिलने वाले स्थान पर होता है। मांसपेशी समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन ठीक होने के बाद भी दोबारा चोट लगने का जोखिम बना रहता है। यह स्टडी ये भी बताती है कि वार्म-अप, स्ट्रेचिंग और नियमित एक्सरसाइज से मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन बढ़ता है, जिससे इस प्रकार की चोटों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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मसल्स में खिंचाव और स्लिप डिस्क का इलाज

डॉ. दीपक अरोड़ा के अनुसार, मांसपेशियों में खिंचाव यानी मसल्स स्ट्रेन की स्थिति में आराम, फिजिकल एक्टिविटीज में कुछ समय के लिए बदलाव, फिजियोथेरेपी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दर्द कंट्रोल करने के उपाय किए जा सकते हैं। कई मामलों में यह समय के साथ ठीक हो जाता है। स्लिप डिस्क में भी कई मरीज बिना सर्जरी के ठीक हो सकते हैं। डॉक्टर स्थिति के अनुसार दवाओं, फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज की सलाह दे सकते हैं। गंभीर नर्व के दबाव या अन्य विशेष परिस्थितियों में अलग इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

Muscle Strain vs Slipped Disc

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साल 2023 में NIH की Bookshelf में प्रकाशित जानकारी के अनुसार-

  • स्लिप डिस्क के कारण होने वाला साइटिका का दर्द कई बार समय के साथ अपने आप ठीक हो जाता है। तब तक दवा, फिजियोथेरेपी जैसे विभिन्न तरीकों यानी मल्टीमॉडल ट्रीटमेंट से इसके लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • यदि दर्द 6 से 12 सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे, तो स्लिप डिस्क के कारण होने वाले गंभीर दर्द को ठीक करने के लिए सर्जरी एक विकल्प हो सकती है, जिसका उद्देश्य नस पर दबाव कम करना होता है।
  • हालांकि, यदि पैरों में लकवा या ब्लैडर/बॉवेल (पेशाब-मल) पर कंट्रोल खत्म होने जैसे आपातकालीन लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है।

निष्कर्ष

मसल्स स्ट्रेन और स्लिप डिस्क दोनों में कमर दर्द हो सकता है, लेकिन इनके लक्षणों में अहम अंतर हो सकते हैं। मांसपेशियों के खिंचाव में दर्द अक्सर प्रभावित हिस्से तक सीमित रहता है, जबकि नस पर दबाव पड़ने वाली स्लिप डिस्क की समस्या में दर्द  पैर तक जाना, झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए लगातार या गंभीर कमर दर्द को केवल सामान्य खिंचाव मानकर नजरअंदाज न करें। सही कारण जानने के लिए ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

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FAQ

  • मसल्स पेन कैसे ठीक होता है?

    मांसपेशियों में दर्द होने पर आराम करना चाहिए और भारी सामान को उठाने से बचना चाहिए। अगर समस्या बढ़ रही है तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से तुरंत सलाह लें।
  • क्या वजन उठाने से कमर में दर्द हो सकता है?

    ज्यादा वजन उठाने से रीढ़ और कमर पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए बिना सपोर्ट के ज्यादा वजन उठाने से बचना चाहिए। खासकर अगर आपको कमर दर्द से जुड़ी समस्या रहती है तो ज्यादा वजन उठाते समय इसका ध्यान रखना चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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