Tue Oct 27, 2026 | 12:49 AM IST

Medically Reviewed by Dr Abhishek Vaish , Orthopaedician

स्लिप डिस्क से जुड़ी हैं ये 5 गंभीर समस्याएं, भूलकर भी न करें इग्नोर

Slipped Disc Complications: स्लिप डिस्क की समस्या होने पर व्यक्ति को चलन-फिरने और रोजमर्रा के कामकाज करने में भी दिक्कत आ सकती है। इसलिए, इसके प्रति लापरवाही बिल्कुल सही नहीं है।
स्लिप डिस्क से जुड़ी हैं ये 5 गंभीर समस्याएं, भूलकर भी न करें इग्नोर
स्लिप डिस्क से जुड़ी हैं ये 5 गंभीर समस्याएं, भूलकर भी न करें इग्नोर

स्लिप डिस्क अपने आप में एक गंभीर समस्या है। वैसे तो बढ़ती उम्र के साथ डिस्क डिजनेरेशन की दिक्कत हो जाती है। इसका मतलब है बढ़ती उम्र के साथ डिस्क का कमजोर हो जाता है। लेकिन, कभी-कभी भारी सामान उठाना, कोई गंभीर एक्सीडेंट, मोटापा भी स्लिप डिस्क का कारण हो सकत हैं। बहरहाल, क्या आप जानते हैं कि स्लिप डिस्क होने की वजह से लोगों का रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो जाती है। इसकी वजह से लोगों को चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। इस लेख में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल और हिलिंग टच क्लीनिक के ऑर्थोपेडिक सर्जन और स्पोर्ट्स इंजरी स्पेशलिस्ट डॉ. अभिषेक वैश से हम जानेंगे कि आखिर स्लिप डिस्क होने पर किस-किस तरह की परेशानी हो सकती है।

स्लिप डिस्क से जुड़ी परेशानियां- What Are The Complications Of A Slipped Disc

What are the complications of a slipped disc 1 (5)What are the complications of a slipped disc 1 (5)

नर्व का दबना

स्लिप डिस्क होने पर लोगों को सबसे कॉमन परेशानी नसों पर दबाव होता है। जब नस दब जाती है, तो इसकी वजह से सुन्नपन, झुनझुनाहट और दर्द का अहसास होने लगता है। याद रखें कि सुन्नपन, झुनझुनाहट डायबिटीज के भी लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए, नर्व पर दबाव महसूस हो और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।

इसे भी पढ़ें: स्लिप डिस्क का आसान और सुरक्षित इलाज है ये थेरेपी, जानें खास बातें

क्रॉनिक पेन

स्लिप डेस्क होने की वजह से नसें दब जाती हैं। अगर दबी हुई नसों का इलाज न किया जाए यानी मरीज अपना ट्रीटमेंट नहीं करवाता है, तो इसकी वजह से धीरे-धीरे दर्द क्रॉनिक हो जाता है। रह-रह कर दर्द बढ़ या घट सकता है। लगातार दर्द बने रहने के कारण लोगों को अपने रोजमर्रा के काम करने में भी दिक्कत आती है।

हिलने में दिक्कत

स्लिप डिस्क होने की वजह से लोगों को हिलने-डुलने या चलने-फिरने में भी परेशानी आने लगती है। वास्तव में, नर्व दबने के कारण मूवमेंट करते ही दर्द का अहसास होता है। कभी-कभी यह दर्द इतना शार्प होता है कि व्यक्ति के लिए मूवमेंट करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

कमजोर मांसपेशियां

स्लिप डिस्क का मासंपेशियों के साथ क्या कनेक्शन हो सकता है? मगर यकीन मानिए, जब लंबे समय तक कोई स्लिप डिस्क की प्रॉब्लम फेस करता है, तो इसकी वजह से मांसपेशियों पर भी बुरा असर पड़ता है। स्लिकप डिस्क की वजह से पैरों को मूव करने में दिक्कत आती है।

इसे भी पढ़ें: Slip Disc Treatment: बिना सर्जरी के भी किया जा सकता है स्लिप्ड डिस्क का उपचारइ 

निष्कर्ष

अगर स्पाइन की कोई भी डिस्क बाहर निकल जाती है, तो वह स्लिप डिस्क कहलाता है। ऐसे में व्यक्ति को सुन्नपन, झुनझुनाहट जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसा आपके साथ न हो, इसके प्रति लापरवाही न करें, क्योंकि इसके कारण आपको कई तरह की परेशानियां का जिक्र करना पड़ता है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • स्लिप डिस्क का परमानेंट इलाज क्या है?

    स्लिप डिस्क का स्थाई इलाज, उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर स्लिप डिस्क बिना सर्जरी के ठी हो जाते हैं। लेकिन, इसके लिए डॉक्टर के प्रॉपर ट्रीटमेंट की जरूरत होती है।
  • स्लिप डिस्क में सावधानियां क्या हैं?

    स्लिप डिस्क होने पर आपको हैवी सामान नहीं उठाना चाहिए, गलत एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए, लंबे समय तक खड़े और बैठे रहन से भी बचना चाहिए। अगर कोई भी मूवमेंट दर्द को बढ़ाता है, तो उसे भी नहीं करना चाहिए।
  • स्लप डिस्क को ठीक होने में कितना समय लगता है?

    स्लिप डिस्क को ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह स्थिति की गंभीरत से तय होता हे। अगर किसी को यह समस्या है, तो उन्हें धैर्य से काम लेना चाहिए।

Read Next

→ OMH Hyperlocal: बिहार में साल दर साल क्यों बढ़ रही है मच्छरों से जुड़ी बीमारियां? जानें इसके कारण डॉक्टरों से

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Sep 06, 2025 11:25 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Sep 06, 2025 11:25 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Abhishek Vaish