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क्या स्लिप डिस्क में कपालभाति कर सकते हैं? जानें योगाचार्य से

स्लिप डिस्क एक गंभीर समस्या है जिसमें व्यक्ति को दर्द की शिकायत रहती है। यहां जानिए, स्लिप डिस्क में कपालभाति करना सुरक्षित है या नहीं?
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क्या स्लिप डिस्क में कपालभाति कर सकते हैं? जानें योगाचार्य से


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और घंटों तक लैपटॉप या मोबाइल पर झुके रहने की आदत ने रीढ़ और कमर की समस्याओं को बेहद आम बना दिया है। खासतौर पर स्लिप डिस्क (Slip Disc) की समस्या आजकल 30 से 50 वर्ष के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। इस समस्या में रीढ़ की हड्डियों के बीच की नरम डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है और नसों पर दबाव डालती है, जिससे पीठ और कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द, झुनझुनी और कभी-कभी पैरों तक सुन्नपन महसूस होने लगता है। यह स्थिति इतनी तकलीफदेह होती है कि मरीज रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाते। ऐसे में जो लोग रोजाना एक्सरसाइज और योगाभ्यास करते हैं उन्हें इसे बंद करना पड़ता है। कई लोगों का सवाल होता है कि क्या स्लिप डिस्क में कपालभाति कर सकते हैं? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने उत्तम नगर में स्थित योग जंक्शन के योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम से बात की-

स्लिप डिस्क में कपालभाति करना सुरक्षित है या नहीं? - Can We Do Kapalbhati In Slip Disc

योग थेरेपिस्ट प्रवीण गौतम बताते हैं कि हर समस्या में एक ही प्राणायाम उपयोगी नहीं होता। कपालभाति जहां हेल्दी लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, वहीं स्लिप डिस्क में यह स्थिति को और बिगाड़ सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर स्लिप डिस्क में कपालभाति करना चाहिए या नहीं, इसके क्या खतरे हो सकते हैं और किन प्राणायाम व योगासन को अपनाना ज्यादा सुरक्षित रहेगा। कपालभाति प्राणायाम में तेज श्वास-प्रश्वास किया जाता है। पेट को बार-बार संकुचित कर सांस बाहर निकालने और फेफड़ों को शुद्ध करने की प्रक्रिया को कपालभाति कहते हैं। इसे अक्सर डिटॉक्स, पेट की चर्बी कम करने और दिमाग को तरोताजा करने के लिए किया जाता है। परंतु चूंकि इसमें पेट और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बनता है, इसलिए यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता।

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स्लिप डिस्क में कपालभाति करने से जोखिम

  • कपालभाति के दौरान पेट की दीवार और कमर पर दबाव बढ़ता है, जिससे रीढ़ की हड्डी और खिसकी हुई डिस्क पर और ज्यादा स्ट्रेस पड़ सकता है।
  • लगातार झटके से डिस्क पर और दबाव आ सकता है।
  • नसों पर खिंचाव बढ़ने से दर्द और झुनझुनी ज्यादा हो सकती है।
  • कुछ मामलों में यह चोट को और गंभीर बना सकता है।
  • इसलिए योग विशेषज्ञ और डॉक्टर सलाह देते हैं कि स्लिप डिस्क के मरीजों को कपालभाति से बचना चाहिए।

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kapalbhati in slip disc

कपालभाति का अभ्यास किसे नहीं करना चाहिए? - Who should avoid kapalbhati pranayama

सिर्फ स्लिप डिस्क ही नहीं, बल्कि कुछ और स्थितियां भी हैं जिनमें कपालभाति से बचना जरूरी है।

  • हर्निया के मरीज
  • गंभीर पीठ दर्द या सर्वाइकल समस्या वाले
  • हार्ट पेशेंट
  • हाई ब्लड प्रेशर और माइग्रेन से ग्रसित लोग
  • प्रेग्नेंट महिलाएं

इन परिस्थितियों में कपालभाति करने से स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है।

स्लिप डिस्क के लिए कौन से योगासन फायदेमंद हैं? - Which yoga is best for slip discs

स्लिप डिस्क में कपालभाति से बचना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि योग पूरी तरह छोड़ दिया जाए। कुछ आसन और श्वसन अभ्यास स्लिप डिस्क में सुरक्षित और लाभकारी माने जाते हैं-

मकरासन  यह आसन पीठ और रीढ़ को आराम देता है और नसों पर दबाव कम करता है।
शवासन पूरे शरीर और नसों को रिलैक्स करता है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम बिना जोर लगाए श्वसन को संतुलित करता है और तनाव घटाता है।
भ्रामरी प्राणायाम मानसिक तनाव और दर्द को कम करने में सहायक है।

निष्कर्ष

स्लिप डिस्क एक गंभीर समस्या है, जिसे नजरअंदाज करने पर यह बढ़ सकती है। योग और प्राणायाम इसमें मदद कर सकते हैं, लेकिन हर आसन या तकनीक सभी के लिए सुरक्षित नहीं होती। कपालभाति स्लिप डिस्क में बिलकुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रीढ़ और डिस्क पर ज्यादा दबाव डालता है। अगर आप योग से राहत पाना चाहते हैं तो डॉक्टर या प्रशिक्षित योग एक्सपर्ट से परामर्श लेकर ही सही आसनों का चयन करें।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • स्लिप डिस्क के मरीज कौन से प्राणायाम कर सकते हैं?

    स्लिप डिस्क में हल्के प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी सुरक्षित माने जाते हैं। ये नसों पर दबाव नहीं डालते और मानसिक तनाव भी कम करते हैं।
  • क्या स्लिप डिस्क में योगासन करना फायदेमंद है?

    हां, लेकिन सही योगासन और एक्सपर्ट की देखरेख जरूरी है। मकरासन और शवासन स्लिप डिस्क के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकते हैं। गलत आसन करने से नुकसान हो सकता है।
  • स्लिप डिस्क के मरीजों को और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    लंबे समय तक बैठने से बचें, भारी सामान न उठाएं, सोने के लिए कठोर गद्दे का इस्तेमाल करें, फिजियोथेरेपी राहत दे सकती है। किसी भी योग या एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर या योग एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

 

 

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