Wed Oct 28, 2026 | 08:20 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vineet Malhotra , Consultant Urologist, Andrologist & Microsurgeon

बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों को ही नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकता है नुकसान, डॉक्टर से जानें क्रोनिक किडनी (CKD) के मरीज कैसे रखें ख्याल?

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के कारण सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि इससे किडनी में भी परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को क्रोनिक किडनी डिजीज की बीमारी है, उन्हें प्रदूषण में खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। 
बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों को ही नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकता है नुकसान, डॉक्टर से जानें क्रोनिक किडनी (CKD) के मरीज कैसे रखें ख्याल?
बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों को ही नहीं, किडनी को भी पहुंचा सकता है नुकसान, डॉक्टर से जानें क्रोनिक किडनी (CKD) के मरीज कैसे रखें ख्याल?

दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में लगातार प्रदूषण बढ़ने की खबरें आ रही हैं। इस वजह से लोगों को खांसी, गले में जलन और सांस लेने में परेशानी होने लगी है। खराब AQI में लोगों को लगता है कि इससे फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों जैसे COPD या अस्थमा के मरीजों और हार्ट से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को खास ध्यान देने की बात कही जाती है। बढ़ते प्रदूषण का असर किडनी पर भी पड़ता है और क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीज अगर ध्यान न दे, तो इससे कई गंभीर बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है। इस बारे में हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि प्रदूषित हवा में मौजूद कण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पर असर डाल सकते हैं। इससे ब्लड वेसल्स और किडनी फंक्शन प्रभावित हो सकते हैं। जिन लोगों को क्रोनिक किडनी की बीमारी हैं, उन्हें खासतौर पर ध्यान देने की जरूरत होती है।

खराब AQI का किडनी पर क्या असर पड़ता है?

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “किडनी शरीर के वेस्ट प्रोडक्ट और अतिरिक्त फ्लूड को बाहर निकालने का काम करती है। इसके साथ ही किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। जब प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 सांस के जरिए शरीर में जाते हैं, तो यह फेफड़ों में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस शरीर में टिश्यू को नुकसान पहुंचाने वाले प्रोसेस और उनसे बचाव करने के बीच के बैलेंस को बिगाड़ देता है। इस बदलाव के कारण किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।”

खराब AQI से क्रोनिक किडनी डिजीज हो सकता है?

Scientific Reports में कुल 22 अध्ययन शामिल किए गए, जिनमें लगभग 80 लाख लोग थे। इसमें CKD के मरीजों और PM 2.5 के बीच के कनेक्शन को समझाया गया। इसमें देखा गया कि क्रोनिक किडनी डिजीज बीमारी से जूझ रहे लोग अगर वायु प्रदूषण में लंबे समय से रह रहे हैं, उन्हें कई किडनी से जुड़े कई रिस्क देखे गए हैं। इसलिए किडनी से जुड़ी बीमारी के मरीजों को प्रदूषण से बचना चाहिए।

प्रदूषण बढ़ने पर CKD मरीज किन 6 बातों का रखें ध्यान

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि क्रोनिक किडनी डिजीज में मरीज की किडनी का फंक्शन कम हो जाता है और अगर किसी मरीज को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट की बीमारी है, तो उसकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी और हार्ट पर बढ़ने वाला प्रेशर पहले से CKD के मरीजों को परेशान कर सकता है। इसलिए CKD के मरीजों को खराब AQI के दौरान पेशाब की मात्रा, दवाओं, डाइट और रेगुलर चेकअप का खास ध्यान रखना चाहिए।

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  1. घर से निकलने से पहले AQI जरूर देखें - क्रोनिक किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को खराब AQI में निकलने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI जरूर देखना चाहिए। अगर प्रदूषण ज्यादा है, तो घर से बाहर निकलने से बचें।
  2. बाहर जाते समय N95 मास्क पहनें - खराब AQI में बाहर जाना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 जरूर पहनें। हालांकि, मास्क से पूरी तरह से सुरक्षा तो नहीं मिलती, लेकिन प्रदूषण में काफी हद तक मदद कर सकता है।
  3. घर के अंदर की हवा साफ रखने की कोशिश करें - जो CKD के मरीज घर में रहते हैं, तो उन्हें घर में धूप, अगरबत्ती या धुएं वाली चीजें नहीं जलानी चाहिए। इसके अलावा, खराब AQI में घर की खिड़कियां बंद रखें।
  4. ज्यादा पानी न पिएं - अक्सर लोग सोचते हैं कि प्रदूषण में पानी पीने से किडनी डिटॉक्स हो जाती है, लेकिन क्रोनिक किडनी की बीमारी वाले मरीजों को ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसे में ज्यादा पानी पीने से पैरों में सूजन या सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।
  5. खाने में नमक कम लें - CKD के मरीजों को नमक का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। इससे शरीर में पानी की मात्रा बढ़ सकती है। इसके अलावा, पोटैशियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर की सलाह लेकर लेनी चाहिए।
  6. दवाएं और किडनी की रेगुलर जांच कराएं - खराब AQI के दौरान भी क्रोनिक डिजीज के मरीजों को अपनी दवाएं रेगुलर लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह लिए पेनकिलर दवाएं लेना किडनी पर भारी पड़ सकता है। इसके अलावा, समय पर क्रिएटिनिन, eGFR और यूरिन में प्रोटीन की जांच जरूर करानी चाहिए।

CKD के मरीज किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि क्रोनिक डिजीज के मरीजों को बढ़ते प्रदूषण में कुछ खास लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

  • अगर पैरों या चेहरे पर नई सूजन दिखाई दे या पहले से मौजूद सूजन बढ़ रही हो, तो डॉक्टर को दिखाएं।
  • पेशाब की मात्रा में कमी हो या कोई बदलाव महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
  • बहुत ज्यादा थकान और सांस फूलने पर ध्यान देना जरूरी है।
  • अगर सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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निष्कर्ष
बढ़ते प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों या स्किन पर ही नहीं होता। इससे किडनी की बीमारी होने का रिस्क भी बना रह सकता है। क्रोनिक डिजीज से जूझ रहे मरीजों को खराब AQI में खास ध्यान देने की जरूरत है। अगर किसी को भी किडनी से जुड़ी समस्या या पेशाब की दिक्कत हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

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FAQ

  • क्या CKD मरीजों को प्रदूषण से बचने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े या डिटॉक्स ड्रिंक्स लेने चाहिए?

    किडनी के मरीजों के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी काढ़ा, गिलोय, त्रिफला या पोटैशियम-युक्त जड़ी-बूटी लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। क्षतिग्रस्त किडनी अतिरिक्त पोटैशियम और मिनरल्स को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे हाइपरकलेमिया हो सकता है, जो अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
  • क्या डायलिसिस पर चल रहे मरीजों को प्रदूषण से अतिरिक्त खतरा है?

     डायलिसिस मरीजों का इम्यून सिस्टम पहले से कमजोर होता है और उन्हें हार्ट से जुड़ी बीमारियों का रिस्क ज्यादा हो सकता है। ज्यादा प्रदूषण के दिनों में शरीर में सूजन बढ़ने से धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं। इससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 28, 2026 19:17 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Oct 28, 2026 19:17 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Vineet Malhotra