Delhi-NCR में अक्टूबर महीने के बाद से धीरे-धीरे वायु प्रदूषण की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं। वायु प्रदूषण सिर्फ आंखों में जलन या गले में खराश की समस्या नहीं बनतe है, बल्कि लंबे समय तक इसका असर फेफड़ों और सांस लेने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। हवा में मौजूद बहुत छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं, जिससे फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आप रोजाना ब्रीदिंग एक्सरसाइज और संतुलित डाइट अपना सकते हैं।
फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज
साल 2024 में Biology जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, नियमित और मध्यम-तीव्रता वाली एक्सरसाइज वायु प्रदूषण से फेफड़ों और इम्यून सिस्टम को होने वाले नुकसान के से बचाने में असरदार हैं।
Praveen Gautam, Yoga Therapist at Yoga Junction, Uttam Nagar के अनुसार, ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों को प्रदूषण से साफ नहीं करतीं, लेकिन नियमित रूप से सही तरीके से सांस लेने की आदत सांस पर कंट्रोल करने और श्वसन मांसपेशियों के इस्तेमाल में मदद कर सकती है। इसलिए, अपने फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए आप इन ब्रीदिंग एक्सरसाइजों को कर सकते हैं-
1. डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग
डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग (पेट से गहरी सांस लेना) फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार करने और शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन देने का एक असरदार तरीका है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए-
- आराम से बैठें या लेट जाएं।
- एक हाथ छाती और दूसरा पेट पर रखें।
- अब नाक से धीरे-धीरे सांस लें और कोशिश करें कि पेट ऊपर उठे।
- इसके बाद धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
शुरुआत में इसे 5 से 10 मिनट तक आराम से कर सकते हैं। सांस को जबरदस्ती रोकने की कोशिश न करें।
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2. पर्स्ड-लिप ब्रीदिंग
फेफड़ों के लिए पर्स्ड-लिप ब्रीदिंग (होंठ सिकोड़कर सांस लेना) एक बहुत ही प्रभावी तकनीक है, जो सांस फूलने की समस्या को कम करने और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए-
- नाक से धीरे-धीरे सांस लें।
- इसके बाद होंठों को ऐसे सिकोड़ें जैसे मोमबत्ती बुझाने वाले हों और धीरे-धीरे सांस बाहर निकालें।
- सांस बाहर छोड़ते समय सांस अंदर लेने से थोड़ा ज्यादा रखें।
- यह तकनीक सांस को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है।
3. अनुलोम-विलोम
फेफड़ों की सेहत के लिए अनुलोम-विलोम का नियमित अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है। गहरी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया से फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है। अनुलोम-विलोम करने के लिए आप आराम से बैठकर एक नथुने से सांस लें और दूसरे नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। फिर दूसरी तरफ से यही प्रक्रिया दोहराएं। इस एक्सरसाइज को आराम से करें और सांस को जबरदस्ती रोकने से बचें। प्रदूषण ज्यादा होने पर इसे खुले पार्क या बाहरी हवा में करने के बजाय घर के अंद र करें।
4. डीप ब्रीदिंग
डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता और ऑक्सीजन का लेवल बढ़ता है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए-
- सीधे बैठकर नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें।
- कुछ समय आराम से रुकने के बाद धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।
- इसे पूरी प्रक्रिया को कुछ मिनट तक दोहरा सकते हैं।
ध्यान रहे, अगर किसी एक्सरसाइज के दौरान चक्कर, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत रुक जाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।
Air-Pollution-Healthy-Lungs
एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट फूड्स
प्रदूषण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन से जुड़े असर पैदा कर सकता है। इसलिए, डाइट में एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
1. आंवला
आंवला विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स का अच्छा सोर्स है। इसे फल के रूप में या अपनी सामान्य डाइट का हिस्सा बनाकर लिया जा सकता है।
2. अमरूद और खट्टे फल
अमरूद, संतरा, मौसमी और नींबू जैसे फल विटामिन सी सहित कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। रोजाना अलग-अलग रंगों के फल खाना अच्छा विकल्प होता है।
3. हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियों में कई विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इन्हें नियमित रूप से आप अपने खाने में शामिल कर सकते हैं।
4. अखरोट और अलसी
अखरोट और अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में डाइट में शामिल करना अच्छा माना जाता है।
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5. टमाटर
टमाटर में लाइकोपीन जैसे नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसलिए, इन्हें आप सलाद, सब्जी या अन्य नॉर्मल भोजन के साथ खा सकते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों को पहुंचने वाले नुकसान से बचाने के लिए आप इन बातों का भी ध्यान रखें-
- घर के बाहर जाने से पहले इलाके का AQI लेवल जरूर चेक करें। AQI बहुत खराब होने पर बिना किसी कारण आउटडोर गतिविधियां करने से बचें।
- AQI खराब होने पर पार्क या सड़क पर रनिंग और तेज वॉक करने के बजाय घर के अंदर ही एक्सरसाइज करें।
- बहुत ज्यादा प्रदूषण वाले वातावरण में अच्छी फिटिंग वाला फेस मास्क पहनें, जिससे महीन कणों को सांस के द्वारा शरीर में जाने से रोकने में मदद मिल सके।
- ज्यादा ट्रैफिक वाली सड़कों पर प्रदूषण ज्यादा हो सकता है। संभव हो तो कम ट्रैफिक वाले रास्ते चुनें और बाहर रहने का समय कम रखें।
- घर के अंदर स्मोकिंग करने से बचें। इसके साथ ही खाना बनाते समय सही वेंटिलेशन रखें और घर के अंदर धुएं के अन्य सोर्स को कम करें।
निष्कर्ष
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच फेफड़ों की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। रोजाना कुछ मिनट ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूड्स खाएं और AQI के अनुसार अपनी आउटडोर गतिविधियों को बदलें।
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FAQ
एयर पॉल्यूशन से कौन-कौन सी बीमारी होती है?
वायु प्रदूषण से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां, दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।वायु प्रदूषण से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है
वायु प्रदूषण फेफड़ों के अंदरूनी टिश्यू में गंभीर सूजन और जलन पैदा करता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है।
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Oct 01, 2026 15:52 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Praveen Gautam
