Mon Nov 2, 2026 | 06:36 PM IST

Medically Reviewed by Rhitika Sharma , Nutrition and Dietetics

प्रदूषण में फेफड़ों को रखना है मजबूत? डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स

खराब AQI में फेफड़ों को सेहतमंद रखने के लिए खाने पर ध्यान देना जरूरी है। लोगों को रोजाना की डाइट में कुछ फूड्स शामिल करने चाहिए, ताकि फेफड़ों को प्रदूषण से बचाया जा सके।
प्रदूषण में फेफड़ों को रखना है मजबूत? डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्सप्रदूषण में फेफड़ों को रखना है मजबूत? डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स

देश के कई हिस्सों में बढ़ता प्रदूषण बड़ी समस्या बन गया है। रोजाना खराब AQI के चलते सांस से जुड़ी समस्याओं के मरीजों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जैसे-जैसे दीवाली नजदीक आ रही है, पटाखों और बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में रोजाना की डाइट फेफड़ों (Best Foods for Air Pollution) को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है। इसलिए हमने Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि रोजाना की हेल्दी डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करना जरूरी है। ये सेल्स के नॉर्मल फंक्शन और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। हालांकि, कई लोग इसे फेफड़ों के डिटॉक्स से जोड़कर देखने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

फेफड़ों को हेल्दी रखने के 7 फूड्स

Frontiers in Immunology में प्रकाशित स्टडी में बताया गया है कि फेफड़ों का सीधा कनेक्शन इम्यून सिस्टम से होता है और इसके बेहतर रखने में डाइट महत्वपूर्ण होती है। इस स्टडी में डाइट और सांस से जुड़ी बीमारियों के रिस्क को जानने की कोशिश की गई है। इस स्टडी में नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (NHANES) के 2007 से 2018 के बीच के 23,042 वयस्कों के डेटा पर किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों की डाइट बेहतर थी, उनमें सांस की पुरानी बीमारियों का रिस्क काफी कम देखा गया था। उनकी डाइट में प्रोटीन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर फल-सब्जियां लेने से सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करता है।

Rhitika Sharma ने सलाह दी है कि बढ़ते प्रदूषण में कुछ फूड्स फेफड़ों के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इसलिए इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करना जरूरी है।

1. अमरूद, संतरा और आंवला

Rhitika Sharma ने बताया कि अमरूद, संतरा और आंवला विटामिन C से भरपूर होते हैं। विटामिन C एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर के सेल्स को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद करता है। यह इम्यून सिस्टम को बेहतर रखने में भी मदद करता है। इस बदलते मौसम और प्रदूषण में रोजाना इन फलों को नाश्ते या मिड-मील में शामिल कर सकते हैं।

2. गाजर और शकरकंद

Rhitika Sharma का कहना है, “शकरकंद और गाजर में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है और शरीर इसे जरूरत के अनुसार विटामिन A में बदल सकता है। विटामिन A शरीर की इम्यूनिटी और टिश्यू के नॉर्मल फंक्शन के लिए जरूरी होता है। इस मौसम में गाजर को सलाद या सब्जी के रूप में बना सकते हैं। वहीं, शकरकंद को उबालकर या भूनकर भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। इस बात का ध्यान जरूर रखें कि बीटा-कैरोटीन वाले फूड्स लेना और सप्लीमेंट्स लेने में अंतर है। इसलिए किसी को भी खासतौर पर स्मोकिंग करने वाले लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसे सप्लीमेंट नहीं लेने चाहिए।”

3. टमाटर

Rhitika Sharma ने बताया कि टमाटर में लाइकोपीन कैरोटेनॉयड पाया जाता है और इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो फेफड़ों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। लोग टमाटर को सलाद, सूप, सब्जी या दाल में शामिल कर सकते हैं।

Foods for healthy lungs during air pollutionFoods for healthy lungs during air pollution

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4. पालक और मेथी जैसी हरी सब्जियां

Rhitika Sharma के अनुसार, शरीर को फोलेट, विटामिन और कई अन्य न्यूट्रिशन देने में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी काफी कारगर होती हैं। इसलिए लोगों को बढ़ते प्रदूषण में खासतौर पर हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए। जब पत्तेदार सब्जियां लें, तो उन्हें ध्यान से धोकर ही इस्तेमाल करें।

5. अखरोट और अलसी

Rhitika Sharma कहती हैं, “अखरोट और अलसी में अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) नाम का पौधों से मिलने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है। इनमें अनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है। अखरोट और अलसी को नाश्ते में दलिया या सलाद में डाल सकते हैं। इसके अलावा, अखरोट को रात में भिगोकर सुबह भी खा सकते हैं। अलसी को दही में डालकर भी खाया जा सकता है।”

6. दालें, चना और साबुत अनाज

दालें, चना, राजमा, ओट्स और दूसरे साबुत अनाज प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स के अच्छे स्रोत हैं। प्रोटीन उन लोगों के लिए बेहतर हैं, जिन्हें सांस से जुड़ी बीमारी होती है, क्योंकि ऐसे मरीजों में मांसपेशियां कमजोर होने का रिस्क हो सकता है। प्रोटीन की प्रचुर मात्रा के लिए रोजाना खाने में दाल, चना, राजमा, ओट्स और साबुत अनाज को शामिल किया जा सकता है।

7. नॉन-वेज में मछली

सैल्मन, सार्डिन और मैकेरल जैसी मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन पाया जाता है। ओमेगा-3 फेफड़ों को सेहतमंद रख सकता है। जो लोग वेजीटेरियन हैं, वे अलसी, चिया सीड्स और अखरोट खा सकते हैं।

डायटिशियन की सलाह

फेफड़ों को हेल्दी रखने के लिए फूड्स के अलावा, सिगरेट और तंबाकू से परहेज करना जरूरी है। बढ़ते प्रदूषण में लोगों को बाहर निकलने से बचना चाहिए। AQI खराब होने पर खुले में लंबे समय तक रहने और हैवी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। अगर बाहर निकलते हैं, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

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निष्कर्ष
बढ़ते प्रदूषण में खासतौर पर सांस से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों को ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपनी डाइट में ओमेगा-3 और प्रोटीन जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना की डाइट में अमरूद, संतरा, आंवला, गाजर और शकरकंदी जरूर लेना चाहिए। नॉन-वेज खाने वाले लोग मछली ले सकते हैं। बैलेंस्ड डाइट से फेफड़ों को हेल्दी रखने में मदद मिल सकती है।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • लहसुन और प्याज फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए क्यों खास माने जाते हैं?

    लहसुन में एलिसिन और प्याज में क्वेरसेटिन पाया जाता है। ये दोनों नेचुरल एंटीबायोटिक और एंटी-एलर्जिक का काम करते हैं। क्वेरसेटिन हिस्टामाइन के ब्लीडिंग को रोकता है, जिससे प्रदूषण के कारण होने वाली बार-बार छींकें, आंखों में जलन और सांस की घरघराहट कम होती है।
  • क्या मुलेठी की चाय प्रदूषण की खांसी और गले की खराश में राहत देती है?

    मुलेठी में ग्लाइसीराइजिन होता है, जो सांस की नली को खुजली, सूखी खांसी और जलन को तुरंत शांत करता है। मुलेठी की जड़ का छोटा टुकड़ा चूसना या उसका काढ़ा पीना बहुत असरदार है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 02, 2026 17:35 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Rhitika Sharma