दिल्ली-NCR से लेकर मुंबई समेत कई शहरों में AQI लगातार बढ़ रहा है और बढ़ते प्रदूषण के कारण सुबह धुंध जैसी दिखने लगती है। कुछ ही दिनों में दिवाली के पटाखे और पराली के जलने से हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जाएगा। ऐसे में कई लोगों को गले में खराश, खांसी या आंखों में जलन होने लगती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या सांस से जुड़ी कोई परेशानी है, उनके लिए यह मौसम और मुश्किल हो सकता है। इसलिए प्रदूषण बढ़ने से पहले ही लोगों को फेफड़ों को सेहतमंद रखने के उपाय करने जरूरी हो जाते हैं। बढ़ते प्रदूषण में फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपायों के बारे में जानने के लिए हमने Dr. Chetan Sharma, Senior Ayurveda Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बहुत ही छोटे कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। इसलिए लोगों को फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए तुलसी, अदरक, हल्दी और प्राणायाम जैसे आयुर्वेदिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।
प्रदूषण में फेफड़ों को हेल्दी रखने के 7 उपाय
Dr. Chetan Sharma कहते हैं, “आयुर्वेद में आहार-विहार, दिनचर्या और श्वसन का खास ध्यान रखा जाता है। इस समय बढ़ते AQI में सिर्फ खान-पान का ही नहीं, बल्कि कुछ फिजिकल एक्टिविटीज का भी ध्यान रखना जरूरी है।
1. तुलसी और अदरक की चाय
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि आयुर्वेद में तुलसी और अदरक का कई घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती रही है। सर्दी-खांसी या गले में खराश होने पर तुलसी-अदरक की चाय पीने की सलाह देते हैं। दोनों को मिलाकर गुनगुनी चाय बनाकर पीने से गले को आराम महसूस होता है। अगर किसी को गंभीर अस्थमा की समस्या है, तो उन्हें रोजाना इस चाय को पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine में प्रकाशित जर्नल के मुताबिक, आयुर्वेद में तुलसी का इस्तेमाल कई सदियों से हो रहा है। तुलसी के फायदों को लेकर को आयुर्वेद में 1,553 अध्ययनों की स्क्रीनिंग के बाद 24 क्लिनिकल अध्ययनों में करीब 1.111 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें 10 से 80 साल के लोग शामिल थे। इन्हें तुलसी के ताजे पत्तों का रस, अर्क और पाउडर के तौर पर दिया गया। इन सभी रिसर्च में तुलसी का इस्तेमाल सुरक्षित पाया गया। इससे इम्यून सेल्स में बढ़ोतरी, वायरल इंफेक्शन और अस्थमा के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद पाया गया।
वहीं Harvard Health Publishing के अनुसार, अदरक में विटामिन और मिनरल्स पाए गए हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने और सूजन कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
2. दिनभर पर्याप्त पानी पीना
Dr. Chetan Sharma का कहना है, “प्रदूषण बढ़ने पर कई लोग ज्यादा गर्म पानी पीने लगते हैं। उन्हें लगता है कि इससे फेफड़ों में जमा गंदगी बाहर निकल जाएगी, लेकिन पानी पीने से प्रदूषण के कण फेफड़ों से बाहर निकल जाते हैं, इसका कोई प्रमाणित वैज्ञानिक आधार नहीं है। इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। इससे शरीर में हाइड्रेशन बनी रहती है और कुछ लोगों को गुनगुना पानी पीने से गले की खराश में भी आराम मिल सकता है, लेकिन दिनभर गर्म पानी न पिएं, बल्कि हल्का गुनगुना पानी ले सकते हैं।”
3. खाने में हल्दी लेना
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि हल्दी का इस्तेमाल भारतीय घरों में आमतौर पर होता है। हल्दी में करक्यूमिन पाया जाता है, जो शरीर की सूजन कम करने में मदद कर सकता है। हल्दी सब्जियों में डाली जा सकती है, जो लोग दूध पीते हैं, वे चुटकी भर हल्दी डालकर दूध ले सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि हल्दी को किसी दवा से रिप्लेस न करें और न ही हल्दी की बहुत ज्यादा मात्रा लें।
4. मौसमी फल और हरी सब्जियां लेना
Dr. Chetan Sharma का कहना है, “जब AQI बढ़ता है, तो सोशल मीडिया पर प्रदूषण से फेफड़ों को बचाने के लिए कई तरह के लंग्स डिटॉक्स जूस और ड्रिंक्स के दावे दिखाई देने लगते हैं, लेकिन किसी एक जूस या फल से फेफड़े प्रदूषण से सुरक्षित हो जाएंगे, ऐसा नहीं होता है, बल्कि बिना एक्सपर्ट की सलाह के एक ही तरह का जूस लेना कई बार नुकसान भी कर सकता है। इसलिए डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और मेवे शामिल करने चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि रोजाना खाने में अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां लें और किसी एक डिटॉक्स ड्रिंक पर निर्भर न रहें।”
Ayurvedic Tips to Protect Lungs From Pollution
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5. नाक से सांस लेना और मास्क का इस्तेमाल करना
Dr. Chetan Sharma के मुताबिक, कई लोग नाक से सांस लेने के बजाय मुंह से सांस लेने लगते हैं। दरअसल, नाक से सांस लेने पर अंदर जाकर हवा गर्म और नम बनती है और कई प्रदूषण से जुड़े कणों को भी रोकने का काम करती है। हालांकि, नाक से सांस लेने पर भी PM2.5 जैसे बहुत छोटे कणों से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती। इसलिए बढ़ते AQI में बेवजह बाहर निकलने से बचें और अगर जाना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क का इस्तेमाल करें।
6. प्राणायाम करना
Dr. Chetan Sharma ने कहा, “बढ़ते प्रदूषण में अनुलोम-विलोम और सांस से जुड़े योग करने से स्ट्रेस कम होता है और सांस की नली साफ होती है। जब बाहर प्रदूषण बहुत ज्यादा हो, तो पार्क में बैठकर प्राणायाम न करें। घर के अंदर रहकर सांस से जुड़ी एक्सरसाइज करें। अस्थमा या COPD के मरीज डॉक्टर की सलाह लेकर ही प्राणायाम करें।”
7. घर के अंदर की हवा साफ रखना
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि घर के अंदर की हवा को भी साफ रखना जरूरी है। जो लोग घर में अगरबत्ती, धूप या मोमबत्ती जलाते हैं या स्मोकिंग करते हैं, उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए। बाहर बहुत प्रदूषण हो, तो घर पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं। घर में वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें।
खराब AQI में किन लोगों को ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए?
Dr. Chetan Sharma ने बताया कि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, COPD या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को बढ़ते प्रदूषण में खास सावधानी बरतनी चाहिए। अगर लगातार खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न या सांस फूलने की शिकायत है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जो लोग अस्थमा या COPD की दवाएं और इनहेलर ले रहे हैं, वे अपनी मर्जी से न बदलें।
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निष्कर्ष
नवम्बर शुरू होने से कुछ समय पहले ही हवा में AQI बढ़ने लगता है और बढ़ते प्रदूषण से लोगों को खांसी और गले से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। जो लोग अस्थमा से जूझ रहे हैं, उन्हें ज्यादा तकलीफ हो जाती है। इसलिए फेफड़ों को सेहतमंद रखने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं।
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FAQ
बढ़ते AQI वाले दिनों में सुबह की सैर पर जाना चाहिए या नहीं?
सुबह और शाम के समय थर्मल इन्वर्जन के कारण जहरीला स्मॉग और PM2.5 जमीन के सबसे करीब होते हैं। जॉगिंग या तेज चलने से व्यक्ति गहरी सांसें लेता है, जिससे प्रदूषण सीधे फेफड़ों में चले जाते हैं। सैर सिर्फ धूप निकलने के बाद करें या घर के अंदर ही हल्की एक्सरसाइज करें।क्या साधारण कपड़े या सर्जिकल मास्क से PM2.5 प्रदूषण से बचाव संभव है?
कपड़े का रुमाल या साधारण सर्जिकल मास्क सिर्फ बड़े धूल के कणों को रोकता है। PM 2.5 जैसे कणों और जहरीली गैस से फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए चेहरे पर ठीक से फिट बैठने वाला N95 या FFP2 रेस्पिरेटर मास्क ही प्रभावी होता है।
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Oct 27, 2026 13:23 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma
