आज के समय में एक ओर बढ़ते औद्योगीकरण, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य और धूल के कारण हवा की क्वालिटी लगातार खराब हो रही है, तो दूसरी ओर सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू के प्रोडक्ट्स का सेवन लाखों लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। कैलाश हॉस्पिटल, देहरादून के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. अम्बरीश दीक्षित के अनुसार, वायु प्रदूषण में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10, जहरीली गैस और अन्य सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, हार्ट डिजीज और फेफड़ों के फंक्शन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रदूषण या स्मोकिंग, फेफड़ों के लिए ज्यादा खतरनाक क्या है?
डॉक्टर अम्बरीश दीक्षित बताते हैं कि धूम्रपान के जरिए शरीर में कई केमिकल्स प्रवेश करते हैं, जिनमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी शामिल होते हैं। ये फेफड़ों के टिश्यू को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ हार्ट, दिमाग और ब्लड वैसेल्स को भी प्रभावित करते हैं।
वहीं लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने वाले लोगों में भी सांस संबंधी बीमारियां, हार्ट डिजीज और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान भी करता है और प्रदूषित वातावरण में भी रहता है, तो स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव और ज्यादा गंभीर हो सकता है।
| स्मोकिंग | वायु प्रदूषण |
| व्यक्तिगत लेवल पर ज्यादा खतरनाक है क्योंकि सिगरेट के धुएं में जहरीले केमिकल्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। | सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा क्योंकि इसका असर एक साथ लाखों लोगों पर पड़ता है। |
| सिगरेट के धुएं में 7,000 से ज्यादा रसायन होते हैं, जिनमें कई कैंसर पैदा करने वाले होते हैं। | प्रदूषित हवा में PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक कण मौजूद होते हैं। |
| धुआं सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर उनकी सेल्स को नुकसान पहुंचाता है। | हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं। |
| फेफड़ों के कैंसर, COPD और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। | लंबे समय तक संपर्क रहने पर अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। |
| धूम्रपान से दिल की बीमारी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है। | प्रदूषण के महीन कण खून में पहुंचकर दिल और ब्लड वैसेल्स को भी प्रभावित कर सकते हैं। |
| नुकसान ज्यादा जल्दी हो सकता है क्योंकि धूम्रपान करने वाला व्यक्ति सीधे जहरीले धुएं को अंदर लेता है। | नुकसान धीरे-धीरे होता है क्योंकि व्यक्ति रोजाना प्रदूषित हवा में सांस लेता है। |
| धूम्रपान करने वाला व्यक्ति खुद अपने जोखिम को बढ़ाता है। | प्रदूषण का असर उन लोगों पर भी पड़ता है जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी। |
| धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों और दिल की सेहत में बड़ा सुधार आ सकता है। | प्रदूषण से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन AQI खराब होने पर बाहर कम निकलना और मास्क पहनना जोखिम कम कर सकता है। |
| अगर कोई व्यक्ति स्मोकिंग करता है, तो सबसे पहला कदम सिगरेट छोड़ना होना चाहिए। | अगर आप स्मोकिंग नहीं करते, तब भी प्रदूषण से बचाव करना जरूरी है क्योंकि इसका असर लंबे समय में गंभीर हो सकता है। |
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क्या पैसिव स्मोकिंग बहुत हानिकारक है?
डॉ. अम्बरीश दीक्षित बताते हैं कि केवल धूम्रपान करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उसके आसपास मौजूद लोग भी पैसिव स्मोकिंग का शिकार हो सकते हैं। सिगरेट का धुआं बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक होता है।
pollution vs smoking
साल 2023 में Frontiers in Public Health में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, पिछले कुछ दशकों की रिसर्च से यह साफ है कि वायु प्रदूषण (Air Pollution) और सिगरेट का धुआं हमारे दिल की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। हवा में मौजूद हानिकारक कण (PM2.5) और सिगरेट का धुआं शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर 1 से 3 mm Hg तक बढ़ जाता है। आंकड़ों के अनुसार, लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष
प्रदूषण और धूम्रपान दोनों ही सेहत के लिए गंभीर खतरा हैं, लेकिन डॉक्टर अम्बरीश दीक्षित के अनुसार, एक्टिव धूम्रपान का जोखिम आमतौर पर ज्यादा होता है क्योंकि इसमें शरीर सीधे ज्यादा जहरीले केमिकल्स के संपर्क में आता है। वहीं लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना भी फेफड़ों, हार्ट और संपूर्ण स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
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FAQ
क्या वायु प्रदूषण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है?
लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, सीओपीडी और फेफड़ों के फंक्शन में कमी हो सकती है।पैसिव स्मोकिंग क्या होती है?
जब कोई व्यक्ति खुद धूम्रपान नहीं करता, लेकिन दूसरे के सिगरेट या बीड़ी के धुएं के संपर्क में आता है, तो इसे पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।क्या धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़े ठीक हो सकते हैं?
धूम्रपान छोड़ने के बाद समय के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होने लगता है।
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Jul 29, 2026 22:18 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Ambrish Dixit
