Does Fried Food Affect Asthma Patients: मौसम बदल रहा है। इसका सबसे बुरा असर अस्थमा या सांस से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर ही पड़ता है। उनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर होती है। ऐसे में वे आसानी से बीमार पड़ जाते हैं। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने खानपान का पूरा ध्यान रखें। आपने देखा होगा कि कई अस्थमा के मरीज बेझिझक तली-भुनी चीजें खा लेते हैं। क्या आप जानते हैं कि अस्थमा के मरीजों के लिए तली-भुनी चीजें बिल्कुल सही नहीं है। इसका उनकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। आइए, Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानते हैं अस्थमा के मरीजों के लिए तली-भुनी चीजें खाने के नुकसानों के बारे में।
अस्थमा के मरीजों के लिए तली-भुनी चीजें खाने के नुकसान- Fried Foods Side Effects For Asthma Patients
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नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित एक शोध से यह पता चलता है कि मोटापा और तले हुए व प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक मात्रा में करने से बच्चों और वयस्कों दोनों में अस्थमा के खतरे, उसकी गंभीरता और उसे नियंत्रित करने में होने वाली मुश्किलें बढ़ जाती हैं। आगे जानते हैं अस्थमा के मरीजों के लिए तली-भुनी चीजें खाने के गंभीर नुकसान के बारे में-
शरीर में सूजन का बढ़नाः अगर अस्थमा के मरीज अपने खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं और तला-भुना अधिक खाते हैं, तो इसकी वजह से शरीर की सूजन बढ़ सकती है। खासकर, अधिक तेल में तली हुई चीजें खाने से अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।
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सीने में भारीपनः बदलते मौसम में अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऐसे में अगर आप फ्रिक्वेंटली तला-भुना खाते हैं, तो इससे गैस बनने लगती है। दरअसल, पेट फूलने (Bloating) से डायाफ्राम पर दबाव पड़ता है, जिससे फेफड़ों को फैलने में जगह कम मिलती है। ऐसे में सीने में दबाव बनता है, जो भारीपन का कारण भी बनता है।
लक्षणों का बढ़नाः तली-भुनी चीजों में काफी ज्यादा तेल होता है। अस्थमा के मरीजों को सीमित मात्रा में ऑयली चीजें खानी चाहिए। अगर आप अधिक मात्रा में ऑयली चीजें खाते हैं, तो इसकी वजह से अस्थमा के मरीजों में लक्षण बिगड़ सकते हैं। इसमें खांसी, सांस लेने में घराहट (Wheezing) आवाज आना आदि।
अचानक वजन बढ़नाः इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर कोई बहुत ज्यादा तला-भुना खाता है, तो इसकी वजह से तेजी से वजन बढ़ सकता है। वैसे तो किसी के लिए भी वजन का बढ़ना सही नहीं है। विशेषकर, अस्थमा के मरीजों की बात करें, तो वजन बढ़ने से उनके लंग्स पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिससे अस्थमा के मरीजों को लक्षण मैनेज करने में दिक्कतें आती हैं।
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निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कहने की बात ये है कि अस्थमा के मरीजों को तला-भुना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। हां, अगर आपका मन है, तो सीमित मात्रा में इसका सेवन करें। रेगुलर तला-भुना खाने से वजन बढ़ता है, जिससे लंग्स पर अतिरिक्त दबाव बनता है। ध्यान रखें कि अस्थमा के मरीजों के लंग्स पहले से ही कमजोर होते हैं। तला-भुना खाने से उनके लंग्स सही तरह से काम नहीं करते हैं, जिससे सांस संबंधी समस्या होने लगती है।
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FAQ
क्या तला-भुना खाने से तुरंत अस्थमा अटैक आ सकता है?
ऐसा नहीं होता है कि तला-भुना खाते ही अस्थमा अटैक आ जाए। हां, तला-भुना खाने से इंफ्लेमेशन बढ़ सकता है। इससे सांस संबंधी समस्या ट्रिगर हो सकती है।ऑयली फूड खाने के बाद सीने में भारीपन क्यों महसूस होता है?
तला-भुना खाने से भोजन को पचने में समय लगता है। ऐसे में पेट में गैस या ब्लोटिंग होने लगती है। दरअसल, फूला हुआ पेट डायाफ्राम पर दबाव डालता है, जिससे फेफड़ों को फैलने के लिए कम जगह मिलती है और अस्थमा के मरीज को सीने में जकड़न महसूस होने लगती है।क्या सभी प्रकार के फैट्स अस्थमा के लिए हानिकारक होते हैं?
किसी भी चीज की अति बुरी होती है। इसी तरह, अस्थमा के मरीज तला-भुना खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। इसके अलावा, अस्थमा के रोगियों के लिए समोसे, फ्रेंच फ्राइज या पकौड़ों में मौजूद ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट होते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसके विपरीत, ओमेगा-3 फैटी एसिड फेफड़ों की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
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Feb 23, 2026 17:07 IST
Modified By : Meera Tagore Feb 23, 2026 17:07 IST
Modified By : Meera TagoreFeb 23, 2026 17:07 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi