Fri Sep 11, 2026 | 09:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

चीनी छोड़ देंगे तो क‍िडनी कहेगी 'थैंक्‍यू', जानें शुगर कम खाना क्‍योंं है फायदेमंद?

चीनी का सेहत सेहत के ल‍िए हान‍िकारक माना जाता है। ज्‍यादा चीनी खाने से ब्‍लड शुगर और वजन बढ़ने के साथ क‍िडनी की सेहत को नुकसान पहुंचता है। क‍िडनी को हेल्‍दी रखने के ल‍िए चीनी का सेवन बंद कर दें, जानें ऐस करना क‍िडनी को कैसे रखता है स्‍वस्‍थ?

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लगभग सभी पैकेज्‍ड फूड्स में चीनी मौजूद होती है। भारतीय लोगों की द‍िन की शुरुआत ही चीनी वाली चाय से होती है। चाय-कॉफी, सॉस, ब‍िस्‍क‍िट, म‍िठाइयों सभी में चीनी मौजूद होती है। ज्‍यादा चीनी खाने से न स‍िर्फ वजन बढ़ता है बल्‍क‍ि क‍िडनी की सेहत भी खराब होने लगती है। अगर चीनी का सेवन कम कर दें, तो क‍िडनी को बीमारि‍यों से और क‍िडनी की सेहत खराब होने से बचाया जा सकता है।

JAMA Network की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज‍िन लोगों ने द‍िनभर में एक ग‍िलास से ज्‍यादा मीठी ड्र‍िंक्‍स का सेवन क‍िया उनमें क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज का खतरा ज्‍यादा देखा गया। स्‍टडी में यह भी देखा गया क‍ि ज‍िन लोगों ने द‍िन की एक शुगर ड्र‍िंक को पानी या नेचुरल जूस से र‍िप्‍लेस क‍िया उनमें क‍िडनी ड‍िजीज का खतरा कम होता देखा गया। इस लेख में हम जानेंगे क‍िडनी के ल‍िए चीनी का सेवन कम करने के फायदे।

1. बीपी नहीं बढ़ेगा और क‍िडनी की ब्‍लड वेसल्‍स स्‍वस्‍थ रहेंगी- It Controls BP Which Affects Kidney

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Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि ज्‍यादा चीनी खाएंगे, तो मोटापा तेजी से बढ़ेगा, वजन बढ़ने के कारण बीपी ज्‍यादा रहेगा और हाई बीपी का क‍िडनी की ब्‍लड वेसल्‍स पर बुरा असर पड़ता है। चीनी कम करने से वजन कंट्रोल होता है और बीपी कंट्रोल रखने में मदद म‍िलती है।

2. शुगर कंट्रोल होगी और क‍िडनी पर दबाव नहीं पड़ेगा- It Controls Sugar Level Which Affects Kidney

क‍िडनी ब्‍लड को फ‍िल्‍टर करती है और शरीर के व‍िषाक्‍त पदार्थों को बाहर न‍िकालने का काम करती है। अगर आप ज्‍यादा चीनी लेते हैं, तो ग्‍लूकोज लेवल बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई ब्‍लड शुगर के कारण क‍िडनी की ब्‍लड वेसल्‍स डैमेज होने लगती हैं। इस वजह से हाई शुगर लेवल क‍िडनी फेल होने का कारण बनता है। चीनी की मात्रा कम कर देंगे, तो क‍िडनी पर ज्‍यादा दबाव नहीं पड़ेगा और क‍िडनी स्‍वस्‍थ रहेगी।

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3. फैटी ल‍िवर के असर से क‍िडनी का बचाव होगा- It Reduces Risk Of Fatty Liver And Bad Kidney Health

जो लोग र‍िफाइंड चीनी का ज्‍यादा सेवन करते हैं उनका वजन तेजी से बढ़ता है और फैटी ल‍िवर की समस्‍या हो जाती है। अगर फैटी ल‍िवर की समस्‍या है, तो क‍िडनी पर भी जोर पड़ सकता है। मीठी ड्र‍िंक्‍स या चीनी का सेवन कम कर देंगे, तो मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ अच्‍छी रहेगी और क‍िडनी की सेहत भी खराब नहीं होगी।

4. क‍िडनी स्‍टोन का खतरा कम होता है- It Reduces Risk Of Kidney Stone

जो लोग ज्‍यादा चीनी का सेवन करते हैं, उनमें यूर‍िक एस‍िड का लेवल बढ़ सकता है। हाई यूर‍िक एस‍िड के कारण क‍िडनी स्‍टोन का खतरा बढ़ सकता है। शुगर कम करने से यूर‍िक एस‍िड का लेवल कंट्रोल होता है और क‍िडनी स्‍टोन बनने की संभावना भी कम हो जाती है।

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5. क‍िडनी के र‍िस्‍क फैक्‍टर्स घटते हैं- Less Sugar Decrease Kidney Risk Factors

क‍िडनी की खराब सेहत के पीछे दाे बड़े र‍िस्‍क फैक्‍टर्स हो सकते हैं, पहला है सूजन और दूसरा है मोटापा। चीनी कम करने से सूजन और मोटापा कम होता है। सूजन से क‍िडनी की सेहत खराब होती है और मोटापे के कारण क‍िडनी को ज्‍यादा खून फि‍ल्‍टर करना पड़ता है ज‍िससे उस पर दबाव पड़ता है। चीनी का सेवन कम करेंगे, तो मोटापा और सूजन दोनों घटेंगे।

न‍िष्‍कर्ष:

चीनी की मात्रा को कम करना क‍िडनी की सेहत के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है। चीनी कम करने से क‍िडनी स्‍टोन का खतरा कम होता है, फैटी ल‍िवर के कारण होने वाले क‍िडनी के नुकसान से बचाव होता है, शुगर और बीपी कंट्रोल होता है ज‍िससे क‍िडनी पर जोर नहीं पड़ता। चीनी कम करने से क‍िडनी के दो र‍िस्‍क फैक्‍टर्स मोटापा और सूजन भी कंट्रोल होती है।

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FAQ

  • चीनी छोड़ने के फायदे क्‍या हैं?

    चीनी न खाने से वजन कंट्रोल होता है, इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस का खतरा घटता है। क‍िडनी, हार्ट और ल‍िवर पर दबाव कम होता है, एनर्जी बनी रहती है और डाय‍ब‍िटीज का खतरा भी कम होता है।
  • चीनी खाने के नुकसान क्‍या हैं?

    ज्‍यादा चीनी लेंगे, तो मोटापा, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस, डायब‍िटीज का खतरा बढ़ सकता है। चीनी ज्‍यादा खाने से हाई ब्‍लड प्रेशर या फैटी ल‍िवर जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। ज्‍यादा मीठा खाने से क‍िडनी और हार्ट पर बुरा असर पड़ता है।
  • चीनी कम कैसे करें?

    चीनी को अचानक से बंद करने के बजाय मात्रा को धीरे-धीरे घटाएं। मि‍ठाइयों का सेवन सीमि‍त करें और मीठे की जगह फल खाएं। चीनी की मात्रा को धीरे-धीरे कम करें ताक‍ि क्रेव‍िंग्‍स कंट्रोल रहें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 23, 2026 16:58 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Published By : Yashaswi Mathur
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