Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

ज्यादा नमक खाना क्यों है दिल, किडनी और लिवर के लिए खतरनाक? एक्‍सपर्ट से जानें नुकसान

खाने में जब नमक तेज हो जाता है, तो हम उसे अक्‍सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेक‍िन क्‍या आपको पता है इससे हार्ट, क‍िडनी और ल‍िवर पर क‍ितना बुरा असर पड़ सकता है? जानें ज्‍यादा नमक क्‍यों है हान‍िकारक?

ज्‍यादा नमक खाना केवल एक फूड च्‍वॉइस नहीं है ज‍िसे अपने मुताब‍िक तय क‍िया जा सकता है बल्‍क‍ि यह सेहत के ल‍िए एक खास कदम है ज‍िसे नजरअंदाज नहीं क‍िया जा सकता। अगर आप भी खाने के ऊपर से नमक डालकर खाते हैं या ज्‍यादा नमक वाली चीजोंं का सेवन करते हैं, तो सावधान हो जाएंं। बाजार में म‍िलने वाले ब‍िग साइज बर्गर में 800 से 900 एमजी नमक हो सकता है जबक‍ि अमेर‍िकन हार्ट एसोस‍िएशन के मुताब‍िक रोजाना 1500 एमजी से ज्‍यादा नमक का सेवन नहीं करना चाह‍िए।एक्‍सपर्ट्स और स्‍टडीज ऐसा मानती हैं क‍ि इससे हार्ट, क‍िडनी और ल‍िवर जैसे अंग प्रभाव‍ित हो सकते हैं। ज्‍यादा नमक खाने के नुकसान जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

हार्ट, क‍िडनी और ल‍िवर का दुश्‍मन है अध‍िक नमक

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हार्ट

American Heart Association के मुताब‍िक, जब शरीर में ज्‍यादा नमक होता है, तो हार्ट कम समय में ज्‍यादा ब्‍लड पंप करता है ज‍िससे व्‍यक्‍त‍ि को हाई बीपी की समस्‍या हो सकती है। हाई बीपी के कारण भव‍िष्‍य में हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक और अन्‍य समस्‍याओं का खतरा रहता है।

क‍िडनी

हार्ट के साथ-साथ क‍िडनी पर भी ज्‍यादा नमक खाने का बुरा असर होता है। क‍िडनी, ज्‍यादा नमक को शरीर से बाहर न‍िकाल देती है, लेक‍िन जब व्‍यक्‍त‍ि को हाई बीपी की समस्‍या होती है, तो क‍िडनी के ल‍िए नमक को बाहर करना मुश्‍क‍िल हो जाता है और ज्‍यादा नमक से शरीर में सूजन बढ़ सकती है।

ल‍िवर

नमक का अध‍िक सेवन ल‍िवर डैमेज का कारण बन सकता है। Journal Of Agricultural And Food Chemistry के मुताब‍िक, ज्‍यादा नमक के सेवन से ल‍िवर फाइब्राेस‍िस का खतरा बढ़ सकता है। हालांंक‍ि यह एक पशु आधार‍ित स्‍टडी है और इंंसानोंं पर और अध‍िक शोध की जरूरत है। साल 2025 में Communications Medicine नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज्‍यादा नमक का सेवन करने से MASLD का खतरा बढ़ता है। मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (Metabolic Dysfunction–Associated Steatotic Liver Disease या MASLD) को पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) के नाम से जाना जाता था।

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शरीर के अन्‍य अंगोंं को भी नुकसान पहुंचा सकता है ज्‍यादा नमक

नमक का अध‍िक सेवन केवल हार्ट, क‍िडनी और ल‍िवर को ही नहींं, बल्‍क‍ि शरीर के अन्‍य अंग जैसे ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ज्‍यादा नमक ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचा सकता है ज‍िससे हाई बीपी के मरीजों में स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। कुछ स्‍टडीज में यह भी बताया गया है क‍ि ज्‍यादा नमक का सेवन करने से इम्‍यून‍िटी पर बुरा असर पड़ता है ज‍िससे सूजन बढ़ती है।

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एक द‍िन में क‍ितना नमक खाएं?

अमेर‍िकन हार्ट एसोस‍िएशन के मुताब‍िक द‍िनभर में 1500 एमजी प्रत‍िद‍िन से ज्‍यादा मात्रा में नमक का सेवन नहीं करना चाह‍िए। यह मात्रा 5 ग्राम नमक या 1 टीस्‍पून नमक ज‍ितनी होती है।

न‍िष्‍कर्ष:

ज्‍यादा नमक का सेवन हार्ट, क‍िडनी और ल‍िवर जैसे अंंगाें को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक, हाई बीपी, सूजन, MASLD, फाइब्रोस‍िस जैसी बीमार‍ियोंं का खतरा बढ़ सकता है।

FAQ

  • हाई सॉल्‍ट फूड्स कौन से हैं?

    ब्रेड और बेकरी उत्‍पाद, बाजार में म‍िलने वाली सॉस, प्रोसेस्‍ड फूड्स, जंक फूड्स जैसे प‍िज्‍जा, बर्गर और पैक्‍ड फूड्स में नमक की मात्रा ज्‍यादा होती है।
  • अच्‍छी सेहत के ल‍िए कौन सा नमक खाएं?

    बेहतर सेहत के ल‍िए सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 30, 2026 16:25 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 30, 2026 16:25 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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