Tue Nov 3, 2026 | 11:35 PM IST

Medically Reviewed by Dr Ujjawal Kumar , Senior Consultant - Cardiology at the Sarvodaya Hospital, Faridabad

खराब AQI बिगाड़ सकता है दिल की सेहत, डॉक्टर से जानें प्रदूषण बढ़ने पर हार्ट के मरीज किन लक्षणों पर रखें ध्यान?

बढ़ते प्रदूषण में लोग सिर्फ फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के प्रति ही सतर्क होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खराब एक्यूआई में हार्ट के मरीजों को भी तकलीफ हो सकती है। डॉ. उज्जवल कुमार ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम में दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को इन खास लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
खराब AQI बिगाड़ सकता है दिल की सेहत, डॉक्टर से जानें प्रदूषण बढ़ने पर हार्ट के मरीज किन लक्षणों पर रखें ध्यान?खराब AQI बिगाड़ सकता है दिल की सेहत, डॉक्टर से जानें प्रदूषण बढ़ने पर हार्ट के मरीज किन लक्षणों पर रखें ध्यान?

खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई), दिवाली में पटाखों का धुआं और बदलता मौसम फेफड़ों के साथ-साथ हार्ट से जुड़ी बीमारियों के मरीजों को भी परेशान कर सकता है। इस मौसम में खासतौर पर हार्ट के रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहे मरीजों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। बढ़ते प्रदूषण में हार्ट के मरीजों को किन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है? यह जानने के लिए हमने Dr. Ujjawal Kumar, Senior Consultant - Cardiology, Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की। उन्होंने बताया कि हवा में मौजूद धूल और धुआं के कारण PM2.5 और PM10 जैसे छोटे कण शरीर में पहुंचकर सूजन बढ़ा सकते हैं। यह ब्लड वेसल्स में खून के थक्के तक बना सकते हैं। इस वजह से खराब AQI में हार्ट अटैक, हार्ट से जुड़ी समस्याएं या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

बढ़ते प्रदूषण में हार्ट के मरीज किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?

PubMed में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने स्पष्ट किया है कि हवा में मौजूद PM2.5 दिल की गंभीर बीमारियों का सीधा कारण बनते हैं। यह सिर्फ बहुत ज्यादा प्रदूषित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नहीं है, बल्कि हाई रिस्क मरीज, बहुत ज्यादा प्रदूषण वाली जगहों पर सफर करने वाले और धूल या धुआं में रहने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “बदलते मौसम के साथ बढ़ता प्रदूषण लोगों में हार्ट से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकता है। अगर समय पर इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए और इलाज हो जाए, तो गंभीर समस्याओं से बचाव हो सकता है। इसलिए खराब एक्यूआई में लोगों को हार्ट से जुड़े लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।”

1. सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना

Dr. Ujjawal Kumar ने बताया कि छाती में दर्द या भारीपन हार्ट से जुड़ी परेशानी का महत्वपूर्ण लक्षण है। अगर सीने में प्रेशर, जकड़न या दर्द महसूस हो और यह कुछ मिनटों तक बना रहे, तो इसे एसिडिटी समझकर इग्नोर नहीं करना चाहिए। कई बार यह दर्द हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक भी फैल सकता है। ऐसे लक्षण हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। अगर सीने में दर्द अचानक शुरू हो या लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।”

2. सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी

Dr. Ujjawal Kumar के अनुसार, अगर लोगों को सामान्य काम करने में दिक्कत नहीं होती, लेकिन थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही सांस फूलने लगे, तो ऐसा होने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कुछ मामलों में देखा गया है कि आराम करते समय भी सांस लेने में परेशानी होने लगती है। अगर ऐसा हो रहा है, तो यह हार्ट फेलियर का लक्षण हो सकता है। इस समस्या को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रदूषण के दिनों में अगर यह समस्या बढ़ने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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3. दिल की धड़कन अचानक तेज या अनियमित होना

हालांकि, कभी-कभी हार्ट बीट नॉर्मल से तेज या धीमी हो सकती है, लेकिन अगर बार-बार ऐसा हो रहा है, तो इसकी वजह जानने के लिए जांच कराना बहुत जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट बीट बढ़ने के साथ चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या बेहोशी जैसा लगने लगे, तो इसे थकान या मौसम का असर न मानें। खराब एक्यूआई में यह समस्या ज्यादा हो सकती है।

4. बार-बार चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं, “अगर प्रदूषण के दिनों में हार्ट के मरीज को बार-बार चक्कर आते हैं या ऐसा लगता है कि वह बेहोश हो सकता है, तो इसे इग्नोर न करें। बहुत ज्यादा कमजोरी होना या आराम करने के बाद भी थकान महसूस होने का मतलब है कि शरीर में कोई परेशानी चल रही है। अगर चक्कर या कमजोरी के साथ सीने में दर्द, सांस फूलना या धड़कन अनियमित होने जैसी समस्या भी हो, तो तुरंत अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”

5. पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन बढ़ना

Dr. Ujjawal Kumar सलाह देते हैं कि कई लोग पैरों, टखनों या चेहरे की सूजन को मौसम का बदलाव समझ लेते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है। इसलिए अगर शरीर में सूजन बढ़ने के साथ-साथ अचानक वजन भी बढ़ने लगे, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

हार्ट के मरीजों के लिए डॉक्टर उज्जवल के उपाय

Dr. Ujjawal Kumar कहते हैं कि इस समय प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ने लगता है। खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या ज्यादा होती है, लेकिन इस बार मुंबई जैसे शहर में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में हार्ट की बीमारी से जुड़े मरीजों को खास बातों का ध्यान देना चाहिए।

  • हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीजों को प्रदूषण के दिनों में अपना ब्लड प्रेशर रेगुलर चेक कराते रहना चाहिए।
  • जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका है या स्टेंट लगाया गया है, उन्हें अपनी दवाएं समय पर लेनी चाहिए।
  • सुबह और शाम के समय प्रदूषण काफी ज्यादा होता है, तो ऐसे में बाहर निकलने से बचना चाहिए।
  • अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो N95 मास्क पहनें।
  • घर के अंदर स्मोकिंग बिल्कुल न करें और वेंटिलेशन का खास ध्यान रखें।
  • हार्ट के मरीजों को प्रचुर मात्रा में पानी पीना चाहिए और डॉक्टर की सलाह पर हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए।

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निष्कर्ष
बढ़ता प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ हार्ट पर भी असर डाल सकता है। इस मौसम में खासतौर पर हार्ट के मरीजों को अपना ध्यान रखना चाहिए। अगर सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी, बेहोशी या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।

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FAQ

  • क्या स्मॉग और जहरीली हवा के कारण अचानक साइलेंट हार्ट अटैक आ सकता है?

    बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में प्रदूषण के कारण धमनियों में अचानक रुकावट आने पर सीने में तेज दर्द के बजाय सिर्फ बहुत ज्यादा थकान, एसिडिटी, उल्टी जैसा लग सकता है। अगर एक्यूआई खराब है, तो ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है। 
  • क्या एनजियोप्लास्टी (Stent) या बाईपास सर्जरी करा चुके मरीजों को प्रदूषण से अधिक खतरा है?

    जिन मरीजों के हार्ट में स्टेंट लगा है या बाईपास हुआ है, उनके शरीर में प्रदूषण से सूजन हो सकती है और इससे स्टेंट के अंदर दोबारा क्लॉटिंग हो सकती है। 

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 02, 2026 20:04 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Ujjawal Kumar